KHABAR BITE की महत्वपूर्ण खबरों और अपडेट के लिए जुड़े रहें
Bite Size News, Right Size Information
👤
BREAKING NEWS
AI के दौर में क्यों परेशान हैं भारत के युवा? रोहन मय्या ने बताई बदलती नौकरी की असली तस्वीरPM Kisan 24वीं किस्त से पहले 4 बड़े अपडेट, किसान तुरंत करें ये कामInshallah की फिर होगी शुरुआत? Love & War के बाद Alia Bhatt और Sanjay Leela Bhansali की जोड़ी मचा सकती है धमालRuthless West Indies Women ने Zimbabwe को रौंदा, 1-0 से सीरीज में बढ़तपंचायत चुनाव की घोषणा के साथ जिले में आचार संहिता लागू, बैठक कलबीजेपी समर्थक परिवार से निकलीं, JNU में बनीं वामपंथी छात्र आंदोलन का चेहरा, कौन हैं नेहा बोरा?Sensex 473 अंक चढ़ा, Nifty 22,550 के पार: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से शेयर बाजार को मिली राहत6 या 7 अक्टूबर? इंदिरा एकादशी की सही तारीख जानिए, पितरों के लिए क्यों खास है ये व्रतखतरों के खेल का किंग बना ये टीवी स्टार, अविनाश मिश्रा ने जीती Khatron Ke Khiladi 15 की ट्रॉफीसंजय दत्त के ‘शांति’ वाले बयान ने मचाई हलचल, मुन्ना भाई बनकर देश और राजनीति पर यूं साधा निशाना
KHABAR BITE

गणेश चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, स्थापना, व्रत, विसर्जन और भगवान गणेश की महिमा

By Aarti Mishra · Published 14 Sep 2026, 17:11 · Updated 14 Sep 2026, 17:11

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन देशभर में भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को घर और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित करते हैं। महाराष्ट्र में इस पर्व का विशेष उत्साह देखने को मिलता है, लेकिन अब देश के लगभग हर हिस्से में गणपति उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है।

साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। गणेश पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि पूजा का सटीक समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है।

गणेश चतुर्थी 2026 का शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न का समय शुभ माना जाता है। उपलब्ध पंचांग के अनुसार पटना/दिनापुर क्षेत्र में 14 सितंबर को गणेश पूजा का समय सुबह 10:31 बजे से दोपहर 12:59 बजे तक बताया गया है।

वहीं नई दिल्ली में पूजा का समय लगभग 11:02 बजे से 1:31 बजे तक और मुंबई में 11:20 बजे से 1:48 बजे तक बताया गया है। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और स्थानीय गणना के कारण समय में अंतर होना सामान्य है। इसलिए पूजा करने वाले लोगों को अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देनी चाहिए।

घर में गणपति स्थापना से पहले क्या करें?

गणपति स्थापना से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद कलश स्थापना, भगवान गणेश का ध्यान और संकल्प किया जाता है।

पूजा के लिए सामान्य तौर पर रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत, फूल, दूर्वा, धूप, दीप, कपूर, फल, नारियल, पंचामृत और मोदक जैसी सामग्री रखी जाती है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में पूजा की सामग्री तथा विधि में कुछ अंतर हो सकता है।

भगवान गणेश को दूर्वा विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। इसी तरह मोदक को गणपति का प्रिय भोग माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दौरान घरों में तरह-तरह के मोदक बनाए जाते हैं और पूजा के बाद प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं।

गणेश चतुर्थी की पूजा विधि

गणपति स्थापना के बाद सबसे पहले भगवान गणेश का आह्वान किया जाता है। उन्हें चंदन, रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित की जाती है। इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान को मोदक, लड्डू और फल का भोग लगाया जाता है।

भक्त भगवान गणेश के सरल मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप कर सकते हैं। इसके बाद गणेश जी की आरती की जाती है और परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।

गणेश पूजा की विस्तृत शास्त्रीय विधि अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकती है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति विधिवत अनुष्ठान करना चाहता है तो स्थानीय पुरोहित से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने की मान्यता

गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता चंद्रदर्शन से संबंधित है। मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन एक निश्चित अवधि में चंद्रमा देखने से बचना चाहिए। इसके पीछे भगवान गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी पौराणिक कथा बताई जाती है।

पटना/दिनापुर क्षेत्र के लिए उपलब्ध पंचांग में 14 सितंबर को लगभग सुबह 8:29 बजे से शाम 7:37 बजे तक चंद्रमा देखने से बचने का समय बताया गया है। यह एक धार्मिक मान्यता है, इसे वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

गणेश उत्सव कितने दिन चलता है?

गणेश जी को घर में रखने की अवधि हर परिवार और क्षेत्र में अलग हो सकती है। कुछ लोग डेढ़ दिन बाद विसर्जन करते हैं, जबकि कुछ परिवार तीन, पांच या सात दिन तक गणपति को घर में रखते हैं। सार्वजनिक गणेश उत्सवों में अक्सर अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन किया जाता है।

2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को है। इसी दिन देश के कई हिस्सों में बड़े स्तर पर गणेश विसर्जन किया जाएगा।

गणेश चतुर्थी का इतिहास

गणेश चतुर्थी की धार्मिक परंपरा काफी पुरानी है, लेकिन आधुनिक समय में इसे बड़े सार्वजनिक उत्सव का रूप देने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार 1893 में तिलक ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप से लोकप्रिय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। इसका उद्देश्य लोगों को एक मंच पर लाना और सामाजिक एकता को मजबूत करना भी था।

आज मुंबई और महाराष्ट्र के गणेशोत्सव देशभर में प्रसिद्ध हैं। बड़े-बड़े पंडाल, आकर्षक सजावट, ढोल-ताशे और सामूहिक आरती इस पर्व को खास बनाते हैं।

पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव पर जोर

गणेश उत्सव के बढ़ते आकार के साथ पर्यावरण को लेकर भी चिंता सामने आई है। मूर्ति विसर्जन से जलस्रोतों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाओं और पर्यावरण-अनुकूल रंगों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी मूर्ति विसर्जन से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। घरों में छोटी मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करना और स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंड का इस्तेमाल करना पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर विकल्प हो सकता है।

गणेश चतुर्थी सिर्फ भगवान गणेश की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और संस्कृति को एक साथ जोड़ने का अवसर भी है। इस दिन भक्त भगवान गणेश से सुख, समृद्धि, बुद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

14 सितंबर से शुरू हो रहा गणपति उत्सव एक बार फिर घर-घर में भक्ति और उत्साह का माहौल लेकर आया है। गणपति स्थापना से लेकर विसर्जन तक भक्तों के बीच एक ही भावना रहती है गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया।