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विश्वकर्मा पूजा 2026: भगवान विश्वकर्मा की पूजा का महत्व, विधि और जानें क्यों खास है यह दिन

By Aarti Mishra · Published 17 Sep 2026, 08:52 · Updated 24 Sep 2026, 01:53

भारत में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प, वास्तुकला और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है। हर साल विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप, कार्यालयों और औद्योगिक संस्थानों में मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है। यह पर्व उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिनका काम निर्माण, इंजीनियरिंग, मशीनरी, हस्तशिल्प और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ा है।

विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मेहनत, हुनर और तकनीकी कौशल के सम्मान का भी प्रतीक मानी जाती है। इस दिन लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों को साफ करके उनकी पूजा करते हैं और बेहतर काम तथा तरक्की की कामना करते हैं।

कब मनाई जाती है विश्वकर्मा पूजा?

विश्वकर्मा पूजा आमतौर पर 17 सितंबर को मनाई जाती है। यह दिन सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश से जुड़ा माना जाता है और कई पंचांगों में इसे कन्या संक्रांति के रूप में भी देखा जाता है। इसी अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।

हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार पूजा के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखना उचित माना जाता है।

कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में उन्हें देवताओं के लिए विभिन्न भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और नगरों का निर्माण करने वाला बताया गया है।

मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और वास्तुकला का विशेष ज्ञान प्राप्त था। इसी कारण इंजीनियर, कारीगर, बढ़ई, लोहार, शिल्पकार, मशीन ऑपरेटर और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धा से याद करते हैं।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

विश्वकर्मा पूजा का सबसे बड़ा संदेश काम और हुनर का सम्मान है। किसी भी उद्योग या व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मशीनों के साथ-साथ उन्हें चलाने वाले लोगों की मेहनत और तकनीकी ज्ञान महत्वपूर्ण होता है।

इस दिन कारखानों और वर्कशॉप में मशीनों की सफाई की जाती है। कई जगह मशीनों और उपकरणों को फूलों से सजाया जाता है और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करके पूजा की जाती है।

व्यापारी और कर्मचारी इस अवसर पर अपने काम में सफलता, सुरक्षा और आर्थिक प्रगति की प्रार्थना करते हैं।

कैसे की जाती है विश्वकर्मा पूजा?

विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह कार्यस्थल और मशीनों की अच्छी तरह सफाई की जाती है। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित की जाती है।

पूजा में भगवान विश्वकर्मा को फूल, अक्षत, रोली, चंदन, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। इसके बाद दीपक और धूप जलाकर आरती की जाती है। कई जगहों पर मशीनों, औजारों और वाहनों की भी पूजा की जाती है।

पूजा के बाद कर्मचारियों और आसपास के लोगों में प्रसाद बांटा जाता है। कई औद्योगिक क्षेत्रों में इस दिन विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

मशीनों और औजारों की पूजा क्यों होती है?

विश्वकर्मा पूजा की एक खास परंपरा काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करना है। इसका संबंध इस विचार से है कि जिन साधनों के माध्यम से व्यक्ति अपनी आजीविका कमाता है, उनका सम्मान किया जाना चाहिए।

कारखानों में बड़ी मशीनों से लेकर छोटे औजारों तक की सफाई और पूजा की जाती है। ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में वाहन और उपकरण, निर्माण क्षेत्र में मशीनरी तथा छोटे कारोबारों में अपने-अपने काम के औजारों की पूजा की जाती है।

यह परंपरा काम के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती है।

किन क्षेत्रों में विशेष उत्साह से मनाई जाती है पूजा?

विश्वकर्मा पूजा देश के कई हिस्सों में मनाई जाती है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान समेत कई राज्यों में इस पर्व का विशेष महत्व देखने को मिलता है।

औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, वर्कशॉप और तकनीकी संस्थानों में इस दिन विशेष आयोजन किए जाते हैं। कई जगहों पर पंडाल सजाए जाते हैं और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा और आधुनिक तकनीक

आज का दौर तकनीक और मशीनों का है। कंप्यूटर, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक मशीनरी ने काम करने के तरीके को काफी बदल दिया है। ऐसे समय में विश्वकर्मा पूजा का महत्व एक अलग रूप में भी सामने आता है।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि तकनीक का विकास मानव के ज्ञान, कौशल और रचनात्मकता से जुड़ा हुआ है। नई मशीनें और तकनीक काम को आसान बना सकती हैं, लेकिन उन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित और कुशल लोगों की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है।

सुरक्षा का संदेश भी देता है पर्व

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मशीनों और उपकरणों की सफाई और रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाता है। औद्योगिक क्षेत्रों में मशीनों की नियमित देखभाल और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

इस लिहाज से यह पर्व कर्मचारियों को अपने कार्यस्थल और उपकरणों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का अवसर भी बन सकता है। मशीनों का सही रखरखाव दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने और काम की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है।

मेहनत और हुनर को सम्मान देने का पर्व

विश्वकर्मा पूजा का संदेश सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह उन लाखों लोगों के श्रम और कौशल को सम्मान देने का अवसर भी है, जो अपने हुनर से देश के निर्माण में योगदान देते हैं।

एक इंजीनियर से लेकर कारीगर तक और एक बड़े कारखाने के कर्मचारी से लेकर छोटी वर्कशॉप में काम करने वाले व्यक्ति तक—हर क्षेत्र में तकनीकी कौशल और मेहनत की अपनी अहमियत है।

विश्वकर्मा पूजा भारत की उन परंपराओं में शामिल है, जिसमें धर्म के साथ काम, कौशल और मेहनत को भी महत्व दिया जाता है। भगवान विश्वकर्मा को समर्पित यह पर्व मशीनों और औजारों की पूजा के साथ-साथ बेहतर काम, सुरक्षा, सफलता और समृद्धि की कामना का अवसर देता है।

आधुनिक समय में जब तकनीक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, तब विश्वकर्मा पूजा का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है—अपने काम का सम्मान करें, अपने हुनर को निखारें और तकनीक का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करें।