पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ जिले में आचार संहिता लागू, बैठक कल

राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। लंबे समय से चुनाव की तारीखों का इंतजार कर रहे संभावित उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच अब चुनावी हलचल तेज हो गई है। गांवों की चौपालों से लेकर पंचायत मुख्यालयों तक चुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने 3 अक्टूबर 2026 को पंचायत चुनाव कार्यक्रम जारी किया। इस बार प्रदेश की बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में चुनाव होने हैं। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में जिले में अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक का दौर शुरू हो गया है, जिसमें चुनाव प्रक्रिया और आदर्श आचार संहिता के नियमों की जानकारी दी जा रही है।
चुनाव की घोषणा होते ही बदल गया गांवों का माहौल
पंचायत चुनाव ग्रामीण राजस्थान की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तरह यहां मुद्दे केवल बड़े राजनीतिक सवालों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सड़क, पानी, बिजली, नाली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे सीधे मतदाताओं के सामने होते हैं।
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संभावित उम्मीदवारों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कई गांवों में उम्मीदवार अपने समर्थकों और स्थानीय लोगों से संपर्क साधने लगे हैं। हालांकि आचार संहिता लागू होने के बाद चुनाव प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों को निर्वाचन आयोग के निर्धारित नियमों के तहत ही करना होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार पंचायतीराज चुनावों को चरणबद्ध तरीके से कराने का फैसला किया है। जैसलमेर और फलोदी में चुनाव एक चरण में होंगे, जबकि जयपुर में चार चरणों में मतदान कराया जाएगा। अन्य जिलों में अलग-अलग संख्या में चरण निर्धारित किए गए हैं।
आचार संहिता लागू, अब किन बातों का रखना होगा ध्यान?
चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू होने का सीधा असर राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों की गतिविधियों पर पड़ता है। अब सरकारी मशीनरी और चुनाव से जुड़े अधिकारी आयोग के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे।
आचार संहिता का मकसद चुनाव के दौरान सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को समान अवसर देना तथा मतदाताओं को किसी तरह के दबाव, लालच या अनुचित प्रभाव से बचाना है।
चुनावी प्रक्रिया के दौरान सरकारी संसाधनों और पद का इस्तेमाल प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर या प्रचार सामग्री लगाने के लिए भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। चुनावी सभाओं, जुलूसों और प्रचार गतिविधियों के लिए संबंधित प्रशासन से आवश्यक अनुमति लेनी पड़ सकती है।
यानी अब गांवों में होने वाली हर राजनीतिक गतिविधि पर प्रशासन की नजर रहेगी। किसी भी तरह के विवाद या आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
बैठक में राजनीतिक दलों को दी जाएगी जरूरी जानकारी
चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद जिला प्रशासन की ओर से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में चुनाव कार्यक्रम, नामांकन प्रक्रिया, प्रचार के नियम, मतदान व्यवस्था और आचार संहिता से जुड़े प्रावधानों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
सीकर जिले में भी जिला निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें चुनाव प्रक्रिया और आचार संहिता के प्रमुख नियमों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों से आयोग के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
ऐसी बैठकों का उद्देश्य यही है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न बने और सभी पक्षों को नियमों की जानकारी पहले से हो।
14,403 ग्राम पंचायतों में चुनाव का रास्ता साफ
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 का दायरा काफी बड़ा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में आम चुनाव कराने की घोषणा की है। इसके अलावा जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर भी चुनाव होंगे।
आयोग के अनुसार जिला परिषद के 1,403 सदस्यों और पंचायत समिति के 8,245 सदस्यों के चुनाव कराए जाएंगे। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए भी मतदान होगा।
यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इनके परिणामों से गांव से लेकर जिला स्तर तक स्थानीय नेतृत्व का नया ढांचा तैयार होगा। जिला परिषद सदस्य मिलकर जिला प्रमुख और पंचायत समिति सदस्य प्रधान का चुनाव करेंगे।
25 नवंबर को सामने आएगा बड़ा फैसला
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन की प्रक्रिया 8 अक्टूबर से शुरू होगी। चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ उम्मीदवारों के नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी।
पंचायत चुनाव के बाद 25 नवंबर को मतगणना और शीर्ष पदों से जुड़ी चुनावी प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी सामने आई है। इस वजह से अक्टूबर और नवंबर के महीने में राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज रहने वाली हैं।
मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक रखा गया है। प्रशासन की कोशिश है कि ग्रामीण मतदाताओं को मतदान केंद्रों पर किसी तरह की परेशानी न हो और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
महिला आरक्षण भी इस चुनाव में रहेगा बड़ा मुद्दा
इस बार पंचायत चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व भी चर्चा का बड़ा विषय है। रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच चुनी जाएंगी।
20 जिलों में जिला प्रमुख का पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित है। ऐसे में इस चुनाव में महिला उम्मीदवारों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। गांवों में कई परिवारों और राजनीतिक समूहों ने अभी से संभावित महिला उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
हालांकि चुनाव में महिला आरक्षण का वास्तविक असर मतदान और परिणाम आने के बाद ही पूरी तरह सामने आएगा। कई जगहों पर पारंपरिक राजनीतिक समीकरण भी इसके चलते बदल सकते हैं।
प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर भी शुरू की तैयारी
इतने बड़े स्तर पर पंचायत चुनाव कराना प्रशासन के लिए भी बड़ी जिम्मेदारी है। चुनाव आयोग की जानकारी के अनुसार राजस्थान पंचायत चुनाव में करीब 3.17 लाख कर्मचारी चुनावी ड्यूटी में लगाए जाएंगे। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 2.72 लाख पुलिसकर्मियों की तैनाती की योजना है।
प्रत्येक जिले में चुनाव व्यवस्था की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सहायता के लिए वोटर असिस्टेंट बूथ बनाए जाने की जानकारी भी दी गई है।
इससे साफ है कि प्रशासन चुनाव को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता।
गांवों में अब शुरू होगी असली चुनावी दौड़
चुनाव की घोषणा से पहले तक संभावित उम्मीदवारों के बीच टिकट और आरक्षण को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। अब कार्यक्रम घोषित होने के बाद तस्वीर तेजी से बदलने वाली है।
कई गांवों में लोग यह जानने में जुटे हैं कि उनके वार्ड या पंचायत में किस वर्ग के लिए पद आरक्षित है। इसके बाद उम्मीदवार अपनी रणनीति तय करेंगे। कहीं पुराने राजनीतिक समीकरण काम आएंगे तो कहीं नए चेहरे मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।
स्थानीय स्तर के चुनावों में व्यक्तिगत संपर्क और गांव के मुद्दों की भूमिका काफी अहम होती है। इसलिए उम्मीदवार अब घर-घर संपर्क, स्थानीय बैठकों और मतदाताओं के साथ संवाद पर जोर दे सकते हैं। हालांकि यह सब आचार संहिता के नियमों के दायरे में रहकर ही करना होगा।
‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की दिशा में बड़ा कदम
राजस्थान सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत चुनावों को ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की अवधारणा से भी जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी पंचायतीराज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान कहा था कि राज्य सरकार वन स्टेट-वन इलेक्शन के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों की जगह चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना है। हालांकि इसके प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभावों को लेकर आने वाले समय में और चर्चा देखने को मिल सकती है।
अब उम्मीदवारों की नजर नामांकन पर
चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद अब सबसे ज्यादा नजर नामांकन प्रक्रिया पर है। संभावित उम्मीदवारों के लिए अगले कुछ दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद राजनीतिक दल और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेता उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मंथन करेंगे।
ग्रामीण राजनीति में एक-एक पंचायत का चुनाव भी कई बार बेहद करीबी मुकाबले में बदल जाता है। ऐसे में इस बार भी कई पंचायतों में रोचक मुकाबले देखने को मिल सकते हैं।
राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में चुनावी माहौल पूरी तरह बन चुका है। आचार संहिता लागू होने के बाद अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को आयोग के नियमों के अनुसार आगे बढ़ना होगा।
14,403 ग्राम पंचायतों के साथ जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर होने वाले ये चुनाव गांवों के अगले राजनीतिक नेतृत्व का फैसला करेंगे। महिला आरक्षण, स्थानीय विकास के मुद्दे, पुराने राजनीतिक समीकरण और नए चेहरों की दावेदारी इस चुनाव को और दिलचस्प बना रही है।
अब निगाहें नामांकन प्रक्रिया, उम्मीदवारों की सूची और अलग-अलग जिलों में होने वाले मुकाबलों पर रहेंगी। आने वाले दिनों में गांव की चौपाल से लेकर जिला मुख्यालय तक चुनावी चर्चाएं और तेज होने की उम्मीद है।