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‘Broken Neck’ से बिजनेस की दुनिया तक राधिका गुप्ता की कहानी, जिसने हार को अपनी ताकत बना लिया

By Aarti Mishra · Published 06 Sep 2026, 20:22 · Updated 06 Sep 2026, 20:23

आज की युवा पीढ़ी सफलता को अक्सर सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-दमक से जोड़कर देखती है। किसी को बड़ा बिजनेसमैन बनते हुए देखकर लगता है कि शायद उसकी जिंदगी हमेशा आसान रही होगी। लेकिन सच यह है कि बड़ी सफलता के पीछे अक्सर संघर्ष, असफलताएं, रिजेक्शन और खुद से लड़ने की लंबी कहानी होती है।

राधिका गुप्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

आज वह भारत की बिजनेस और निवेश की दुनिया का जाना-पहचाना नाम हैं। वह Edelweiss Asset Management की Managing Director और CEO हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था।

बचपन से लेकर पढ़ाई, नौकरी और बिजनेस तक, राधिका गुप्ता ने जिंदगी में कई मुश्किलों का सामना किया। उन्होंने रिजेक्शन देखे, खुद को लेकर असुरक्षा महसूस की और कई बार ऐसे दौर से गुजरीं जब जिंदगी आसान नहीं थी।

लेकिन उन्होंने एक चीज नहीं छोड़ी—आगे बढ़ने की हिम्मत।

यही वजह है कि आज उनकी कहानी सिर्फ बिजनेस की सफलता की कहानी नहीं है। यह आत्मविश्वास, संघर्ष और महिला सशक्तिकरण की भी एक मजबूत मिसाल है।

जन्म के समय शुरू हुआ मुश्किल सफर

राधिका गुप्ता की जिंदगी की शुरुआत भी सामान्य नहीं थी।

जन्म के समय हुई जटिलताओं के कारण उनके जीवन की शुरुआती परिस्थितियां कठिन रहीं। बचपन की एक घटना के कारण उनकी गर्दन की बनावट पर असर पड़ा।

बाद में यही अनुभव उनकी जिंदगी की पहचान का एक हिस्सा बन गया।

राधिका ने अपनी जिंदगी की कहानी को “The Girl with a Broken Neck” नाम से भी साझा किया है।

लेकिन सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपनी पहचान नहीं बनने दिया।

उन्होंने यह साबित किया कि इंसान की पहचान उसके शरीर, चेहरे या दूसरों की राय से नहीं, बल्कि उसके काम और हौसले से बनती है।

चार महाद्वीपों में बीता बचपन

राधिका गुप्ता के पिता भारतीय विदेश सेवा में थे। इस वजह से उनका बचपन अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के बीच बीता।

उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों में रहते हुए पढ़ाई की।

लगातार नई जगहों पर जाना, नए लोगों से मिलना और अलग-अलग माहौल में खुद को ढालना आसान नहीं होता।

लेकिन इस अनुभव ने उन्हें दुनिया को अलग नजरिए से देखने का मौका दिया।

आज की Gen Z पीढ़ी के लिए भी इसमें एक बड़ा संदेश है।

नई जगह, नए लोग और नई परिस्थितियां हमेशा डरने की चीज नहीं होतीं। कई बार यही अनुभव इंसान को ज्यादा मजबूत और आत्मविश्वासी बनाते हैं।

पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन

राधिका गुप्ता ने आगे चलकर अमेरिका की प्रतिष्ठित University of Pennsylvania में पढ़ाई की।

उन्होंने Management and Technology Program से शिक्षा प्राप्त की और Economics तथा Computer Science Engineering से जुड़ी पढ़ाई की।

यहां तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी।

लेकिन अच्छी पढ़ाई का मतलब यह नहीं था कि उनकी जिंदगी में हर चीज आसानी से मिल गई।

असल चुनौती अभी बाकी थी।

नौकरी के लिए कई बार मिला रिजेक्शन

आज जब लोग किसी सफल व्यक्ति को देखते हैं, तो अक्सर उसके रिजेक्शन की कहानी दिखाई नहीं देती।

राधिका गुप्ता को भी करियर की शुरुआत में कई जगह असफलता का सामना करना पड़ा।

उन्हें नौकरी के इंटरव्यू में रिजेक्शन मिले।

कई युवाओं के लिए रिजेक्शन बहुत मुश्किल समय होता है।

आज भी लाखों युवा नौकरी के लिए आवेदन करते हैं। किसी को बार-बार “नहीं” सुनना पड़ता है।

कई लोग इस स्थिति में खुद पर शक करने लगते हैं।

लेकिन राधिका की कहानी हमें एक महत्वपूर्ण बात सिखाती है—

रिजेक्शन का मतलब यह नहीं कि आप योग्य नहीं हैं। कई बार इसका मतलब सिर्फ इतना होता है कि आपका सही अवसर अभी नहीं आया है।

आखिरकार उन्हें McKinsey & Company में काम करने का अवसर मिला।

यहीं से उनके करियर का एक नया अध्याय शुरू हुआ।

दुनिया की बड़ी कंपनियों में काम करने का अनुभव

McKinsey के बाद राधिका गुप्ता ने AQR Capital Management में भी काम किया।

यहां उन्हें निवेश और फाइनेंस की दुनिया को करीब से समझने का मौका मिला।

उन्होंने बड़े स्तर पर काम किया और अपने अनुभव को लगातार मजबूत बनाया।

लेकिन उन्होंने केवल एक अच्छी नौकरी तक सीमित रहने का फैसला नहीं किया।

उनके अंदर कुछ नया करने की इच्छा थी।

यहीं से उनकी जिंदगी का सबसे साहसिक फैसला सामने आया।

आरामदायक नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला

साल 2009 में राधिका गुप्ता भारत वापस आईं।

यह एक बड़ा फैसला था।

उन्होंने अपने पति नलिन मोनिज के साथ मिलकर भारत में Forefront Capital Management की शुरुआत की।

किसी स्थापित कंपनी में नौकरी करना और अपना बिजनेस शुरू करना दो बिल्कुल अलग बातें हैं।

नौकरी में एक निश्चित ढांचा होता है।

लेकिन बिजनेस में हर दिन नई चुनौती होती है।

फैसले खुद लेने होते हैं।

जोखिम खुद उठाना होता है।

सफलता मिले तो जिम्मेदारी बढ़ती है और असफलता मिले तो उससे सीखना पड़ता है।

राधिका ने यही चुनौती स्वीकार की।

एक महिला का फाइनेंस की दुनिया में आगे बढ़ना

फाइनेंस और निवेश की दुनिया को लंबे समय तक पुरुषों के दबदबे वाला क्षेत्र माना जाता रहा है।

ऐसे क्षेत्र में एक महिला के लिए अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता।

लेकिन राधिका गुप्ता ने केवल इस दुनिया में कदम ही नहीं रखा, बल्कि अपनी क्षमता से मजबूत पहचान बनाई।

उनकी कंपनी Forefront Capital Management को बाद में Edelweiss Group ने अधिग्रहित कर लिया।

यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

इसके बाद उनका सफर और तेजी से आगे बढ़ा।

33 साल की उम्र में बनीं CEO

राधिका गुप्ता के करियर का एक बड़ा पड़ाव साल 2017 में आया।

उन्हें Edelweiss Asset Management का CEO बनाया गया।

उस समय वह देश के वित्तीय क्षेत्र में सबसे युवा CEOs में शामिल थीं।

कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं होता।

CEO का मतलब केवल एक बड़ी कुर्सी नहीं होता।

इसके साथ बड़े फैसले, टीम की जिम्मेदारी और कंपनी के भविष्य की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।

लेकिन राधिका ने इस चुनौती को स्वीकार किया।

उनके नेतृत्व में Edelweiss के एसेट मैनेजमेंट बिजनेस ने तेजी से विकास किया। हाल के वर्षों में कंपनी की प्रबंधनाधीन संपत्तियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।

Shark Tank से Gen Z के बीच बढ़ी पहचान

आज की युवा पीढ़ी राधिका गुप्ता को सिर्फ फाइनेंस की दुनिया से नहीं पहचानती।

Shark Tank India जैसे लोकप्रिय शो के जरिए भी उन्हें बड़ी संख्या में लोगों ने देखा।

यही वजह है कि उनकी पहचान आज बिजनेस, निवेश और युवा उद्यमिता—तीनों से जुड़ गई है।

Gen Z के लिए उनकी कहानी खास इसलिए है क्योंकि वह सिर्फ सफलता की बात नहीं करतीं।

वह संघर्ष, गलतियों और असफलताओं पर भी खुलकर बात करती हैं।

आज के सोशल मीडिया दौर में जहां लोग अक्सर केवल अपनी सफलता दिखाते हैं, वहां असफलताओं के बारे में बात करना भी एक तरह की ताकत है।

“लोग क्या सोचेंगे?” से बाहर निकलने की जरूरत

राधिका गुप्ता की कहानी का एक बड़ा संदेश आत्मविश्वास से जुड़ा है।

कई युवा अपने जीवन में इस सवाल से परेशान रहते हैं—

“लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे?”

कोई अपने लुक्स को लेकर परेशान है।

कोई अपनी भाषा को लेकर।

कोई अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर।

कोई सोशल मीडिया पर दूसरों से खुद की तुलना करता रहता है।

लेकिन राधिका की कहानी बताती है कि दूसरों की राय के आधार पर अपनी जिंदगी नहीं जी जा सकती।

अगर आप हर समय लोगों को खुश करने की कोशिश करेंगे, तो शायद अपने सपनों के लिए कभी समय ही नहीं निकाल पाएंगे।

महिला सशक्तिकरण का असली अर्थ

महिला सशक्तिकरण केवल नौकरी करने या पैसा कमाने तक सीमित नहीं है।

इसका असली मतलब है

अपने फैसले लेने की आजादी।

अपने सपनों को चुनने का अधिकार।

अपनी पहचान बनाने की हिम्मत।

और मुश्किल परिस्थितियों में खुद पर भरोसा रखना।

राधिका गुप्ता की यात्रा इन सभी बातों की मिसाल है।

उन्होंने एक ऐसे क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई जहां महिलाओं की संख्या लंबे समय तक कम रही।

उन्होंने बिजनेस किया।

बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।

और आज भी निवेश तथा वित्तीय जागरूकता पर अपनी बात रखती हैं।

महिलाओं के लिए आर्थिक आजादी क्यों जरूरी है?

आज भी बहुत सी महिलाएं पैसे से जुड़े बड़े फैसलों में खुद को शामिल नहीं करतीं।

कई घरों में निवेश, बचत और आर्थिक फैसले केवल पुरुषों द्वारा लिए जाते हैं।

लेकिन बदलते समय में महिलाओं के लिए आर्थिक जानकारी और आर्थिक स्वतंत्रता बेहद जरूरी है।

राधिका गुप्ता भी अक्सर वित्तीय जागरूकता और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी की बात करती रही हैं।

एक महिला जब अपने पैसे और आर्थिक फैसलों को समझती है, तो उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

Gen Z राधिका की कहानी से क्या सीख सकती है?

आज की Gen Z के सामने अवसर भी बहुत हैं और चुनौतियां भी।

सोशल मीडिया ने दुनिया को करीब ला दिया है।

लेकिन इसके साथ तुलना और असुरक्षा भी बढ़ी है।

हर दिन किसी न किसी की सफलता की कहानी मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देती है।

कोई 20 साल की उम्र में करोड़पति बन रहा है।

कोई स्टार्टअप शुरू कर रहा है।

कोई सोशल मीडिया स्टार बन रहा है।

ऐसे में कई युवा सोचते हैं कि वे पीछे रह गए हैं।

लेकिन हर व्यक्ति की जिंदगी की टाइमलाइन अलग होती है।

राधिका गुप्ता की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती।

इसके पीछे कई रिजेक्शन, गलत फैसले और कठिन दिन भी होते हैं।

इसलिए अपनी तुलना दूसरों से करने के बजाय अपने सफर पर ध्यान देना जरूरी है।

असफलता से डरना नहीं, सीखना जरूरी है

आज कई युवा असफल होने के डर से शुरुआत ही नहीं करते।

उन्हें लगता है कि अगर बिजनेस सफल नहीं हुआ तो क्या होगा?

अगर नौकरी नहीं मिली तो क्या होगा?

अगर लोग मजाक उड़ाएंगे तो क्या होगा?

लेकिन हर सवाल का जवाब पहले से जानना जरूरी नहीं है।

कई बार इंसान को आगे बढ़ने के लिए पहला कदम उठाना पड़ता है।

राधिका की यात्रा भी यही सिखाती है।

उन्हें रिजेक्शन मिले।

उन्होंने जोखिम उठाया।

नौकरी की।

बिजनेस शुरू किया।

नई जिम्मेदारियां संभालीं।

हर कदम पर नई चुनौतियां आईं।

लेकिन उन्होंने आगे बढ़ना नहीं छोड़ा।

खुद को स्वीकार करना सबसे बड़ी ताकत है

हर इंसान में कोई न कोई कमी होती है।

कोई भी पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता।

लेकिन सोशल मीडिया के दौर में परफेक्ट दिखने का दबाव बढ़ गया है।

लोग फिल्टर और एडिटिंग की दुनिया देखकर खुद को कमतर समझने लगते हैं।

राधिका गुप्ता की कहानी यहां एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—

अपनी कमियों से नफरत करने के बजाय खुद को स्वीकार करना सीखिए।

जब इंसान खुद को स्वीकार कर लेता है, तो दूसरों की राय का असर कम होने लगता है।

यही आत्मविश्वास आगे बढ़ने की ताकत देता है।

सफलता केवल पैसे या पद का नाम नहीं

आज राधिका गुप्ता एक सफल बिजनेस लीडर हैं।

लेकिन उनकी कहानी की असली ताकत केवल उनके पद में नहीं है।

असली ताकत यह है कि उन्होंने अपने संघर्षों को छिपाया नहीं।

उन्होंने अपनी जिंदगी के मुश्किल अनुभवों को लोगों के सामने साझा किया।

उन्होंने यह दिखाया कि कमजोर महसूस करना गलत नहीं है।

रिजेक्ट होना जिंदगी का अंत नहीं है।

और अलग दिखना कोई कमी नहीं है।

यही सोच उनकी कहानी को खास बनाती है।

जो अलग है, वही अपनी अलग पहचान बना सकता है

राधिका गुप्ता की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो खुद को किसी न किसी वजह से दूसरों से अलग महसूस करता है।

हर उस लड़की के लिए जो बड़े सपने देखती है।

हर उस महिला के लिए जो अपनी आर्थिक पहचान बनाना चाहती है।

और हर उस युवा के लिए जिसे जिंदगी में कभी रिजेक्शन मिला है।

उन्होंने साबित किया कि-

रिजेक्शन आपको रोक नहीं सकता।
दूसरों की बातें आपको परिभाषित नहीं कर सकतीं।
और आपकी कमियां आपकी सबसे बड़ी कमजोरी नहीं होतीं।

जरूरत है सिर्फ खुद पर भरोसा रखने की।

राधिका गुप्ता का सफर हमें यही सिखाता है कि जिंदगी में “अलग” होना कोई कमजोरी नहीं है।

कई बार आपकी अलग पहचान ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।

एक लड़की जिसने अपनी जिंदगी में असुरक्षा और रिजेक्शन का सामना किया, वही आज भारत की बिजनेस और निवेश की दुनिया में एक मजबूत आवाज बन चुकी है।

और शायद यही उनकी कहानी का सबसे बड़ा संदेश है

खुद को बदलकर दुनिया में फिट होने की कोशिश मत करो, अपनी पहचान के साथ आगे बढ़ो और दुनिया को अपनी जगह पहचानने दो।