‘राहुल मियां’ वंदे मातरम् का महत्व नहीं समझ सकते ? नितिन नबीन का राहुल गांधी पर तीखा हमला, गरमाया सियासी विवाद
देश की राजनीति में इन दिनों ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण और इसके पहले दो अंतरों के गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। इसी विवाद के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के…
देश की राजनीति में इन दिनों ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण और इसके पहले दो अंतरों के गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। इसी विवाद के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।
9 सितंबर 2026 को उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक कार्यक्रम के दौरान नितिन नबीन ने राहुल गांधी को ‘राहुल मियां’ कहकर संबोधित किया और कहा कि राहुल गांधी वंदे मातरम् का महत्व नहीं समझ सकते। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।
वंदे मातरम् को लेकर क्यों शुरू हुआ विवाद?
विवाद की मौजूदा पृष्ठभूमि कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC के 19 अगस्त 2026 के फैसले से जुड़ी है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसके पीछे 1937 में लिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि 1937 में राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे गाने का फैसला किया गया था। पार्टी के मुताबिक उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और अन्य प्रमुख नेता इस चर्चा से जुड़े थे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी इस मामले में अपना पक्ष रख चुके हैं। उनका कहना है कि उन्होंने वही संस्करण गाया जिसे देश के कई बड़े नेता पहले गाते रहे हैं। कांग्रेस का तर्क है कि वंदे मातरम् के बाद के अंतरों में धार्मिक और पौराणिक संदर्भ ज्यादा हैं, इसलिए सभी समुदायों को ध्यान में रखते हुए पहले दो अंतरों को राष्ट्रीय आयोजनों के लिए उपयुक्त माना गया था।
बीजेपी का क्या कहना है?
दूसरी ओर बीजेपी ने कांग्रेस के इस रुख का कड़ा विरोध किया है। बीजेपी का कहना है कि वंदे मातरम् केवल एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रतीक है।
बीजेपी ने अगस्त में एक प्रस्ताव पारित कर वंदे मातरम् की पूरी विरासत, सम्मान और राष्ट्रीय महत्व को बनाए रखने की बात कही थी। पार्टी ने कांग्रेस के 1937 वाले रुख को लेकर भी सवाल उठाए।
इसी राजनीतिक माहौल में नितिन नबीन का राहुल गांधी पर हमला सामने आया। हल्द्वानी में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वंदे मातरम् के पूरे गायन को लेकर आपत्ति जताकर देश की भावनाओं को नहीं समझ रही है।
नितिन नबीन ने कहा कि वंदे मातरम् की गूंज स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी रही है और इसके महत्व को समझना जरूरी है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति और कांग्रेस के रुख पर भी सवाल खड़े किए।
‘राहुल मियां’ वाले बयान पर बढ़ा विवाद
नितिन नबीन का राहुल गांधी को ‘राहुल मियां’ कहना भी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया है। बीजेपी अध्यक्ष के बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया।
10 सितंबर को उत्तराखंड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और नितिन नबीन का पुतला भी जलाया। प्रदर्शनकारियों ने उनके बयान को लेकर नाराजगी जताई।
यानी मामला अब सिर्फ वंदे मातरम् के गायन तक सीमित नहीं रहा। इसमें दोनों प्रमुख दलों के नेताओं के बीच व्यक्तिगत राजनीतिक हमले भी जुड़ गए हैं।
राहुल गांधी की राजनीति पर भी निशाना
नितिन नबीन ने इसी दौरान राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की ओर से युवाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर किए जा रहे कार्यक्रमों का असर कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओं से आगे नहीं जा रहा।
दरअसल, राहुल गांधी हाल के दिनों में छात्रों, परीक्षाओं, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी इन अभियानों को राजनीतिक कार्यक्रम बता रही है, जबकि कांग्रेस इन्हें युवाओं की आवाज उठाने की कोशिश के तौर पर पेश कर रही है।
इससे साफ है कि वंदे मातरम् का विवाद अब व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुका है। एक तरफ बीजेपी राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को मुद्दा बना रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ऐतिहासिक फैसलों और समावेशी राजनीति का हवाला दे रही है।
केंद्र के नए प्रोटोकॉल ने भी बढ़ाई बहस
इस पूरे विवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी केंद्र सरकार की ओर से वंदे मातरम् को लेकर जारी नया प्रोटोकॉल भी है।
रिपोर्टों के मुताबिक सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के गायन और प्रस्तुति को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। निर्धारित सरकारी कार्यक्रमों में इसके पूर्ण संस्करण को शामिल करने की व्यवस्था की गई है। यही वह मुद्दा है जिसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस और तेज हुई।
वहीं, कांग्रेस अपने पार्टी कार्यक्रमों में 1937 के फैसले के अनुसार पहले दो अंतरों को ही गाने पर कायम है। इस तरह एक ही राष्ट्रीय गीत को लेकर दोनों पार्टियों का नजरिया अलग-अलग दिखाई दे रहा है।
मामला सिर्फ गीत का नहीं, राजनीति का भी है
वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह देशभक्ति की भावना जगाने वाले प्रमुख गीतों में शामिल रहा।
आज भी वंदे मातरम् का नाम आते ही राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता आंदोलन और देशभक्ति की भावनाएं जुड़ जाती हैं। यही वजह है कि इसके गायन और इसके स्वरूप को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस का असर सामान्य राजनीतिक मुद्दों से कहीं ज्यादा दिखाई देता है।
कांग्रेस का कहना है कि वह ऐतिहासिक परंपरा का पालन कर रही है, जबकि बीजेपी का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के पूरे स्वरूप और उसके ऐतिहासिक महत्व का सम्मान होना चाहिए। दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक और ऐतिहासिक तर्क जनता के सामने रख रहे हैं।
आगे क्या?
फिलहाल वंदे मातरम् विवाद के जल्द खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। एक तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर हमला कर रही है, वहीं कांग्रेस अपने 1937 के फैसले और ऐतिहासिक नेताओं के संदर्भ का इस्तेमाल कर अपना बचाव कर रही है।
नितिन नबीन का राहुल गांधी पर ताजा हमला इस राजनीतिक टकराव को और तेज करता दिखाई दे रहा है। ‘राहुल मियां’ वाला बयान भी अब अलग राजनीतिक विवाद बन चुका है और कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आ चुकी है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और बढ़ सकती है। खास बात यह होगी कि क्या वंदे मातरम् का मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर आगामी चुनावी राजनीति में भी इसे प्रमुख मुद्दा बनाया जाता है।
फिलहाल इतना साफ है कि वंदे मातरम् पर शुरू हुई बहस अब बीजेपी बनाम कांग्रेस की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुकी है जहां एक तरफ राष्ट्रीय गीत के सम्मान की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ उसके ऐतिहासिक और समावेशी संदर्भ को सामने रखा जा रहा है।
