Violence in Bangladesh: इंसानियत लहूलुहान,क्या नफरत के बाजार में भीड़ ही फैसला करेगी?
इंसानियत लहूलुहान है, नफ़रत का बाज़ार गर्म है,कहीं भीड़ का शोर है, तो कहीं कानून भी दम तोर है। पेड़ से लटकती लाश पूछती है— ये कैसी आज़ादी है? जहाँ इल्ज़ाम ही फैसला है और ख़ामोशी ही बर्बादी है इसी सब मुदो पर चर्चा करुं उससे पहले मेरा छोटा सा परिचय स्वीकार कीजिए “नमस्कार मेरा…
