KHABAR BITE की महत्वपूर्ण खबरों और अपडेट के लिए जुड़े रहें
Bite Size News, Right Size Information
👤
BREAKING NEWS
जितिया व्रत 2026 कब है? जानें पूजा, व्रत कथा और महाभारत से जुड़ी मान्यताकालकाजी मंदिर गैंगरेप: नाबालिग से दरिंदगी का आरोप, खुद को पुलिस बताकर डराया; तीनों आरोपी गिरफ्तारजब आमिर खान को भारी पड़ा परफेक्शन, अक्षय खन्ना से खाए थे 17 थप्पड़, शूटिंग के बाद सूज गया था चेहरा2017 से पहले यूपी में गुंडों का था बोलबाला? CM योगी के बयान से फिर गरमाई सियासतगोविंदा संग कोमल रानी की तस्वीरें वायरल, सिंदूर को लेकर मची हलचल और सुनीता का बयान आया सामनेलाल किला मैदान में हुआ लव कुश रामलीला कमेटी का भूमि पूजन, 11 अक्टूबर से शुरू होगा भव्य मंचनसिद्धार्थ मल्होत्रा-तमन्ना भाटिया की ‘वन’ का ‘ठुमक ठुमक’ गाना लॉन्च, फोकलोर और फैंटेसी की दिखी रहस्यमयी दुनियाNational Film Awards 2026: कार्तिक आर्यन, यामी गौतम और ममूटी को राष्ट्रपति देंगी सम्मान, गुजरात में पहली बार सजेगा मंचEPFO New Rule 2026: ₹30 हजार, ₹40 हजार और ₹50 हजार बेसिक वालों का कितना कटेगा PF?महिंद्रा विजन एस का इंटीरियर आया सामने, थार रॉक्स और एक्सयूवी 7XO की दिखी झलक
क्राइम

कालकाजी मंदिर गैंगरेप: नाबालिग से दरिंदगी का आरोप, खुद को पुलिस बताकर डराया; तीनों आरोपी गिरफ्तार

By Aarti Mishra · Published 23 Sep 2026, 19:05 · Updated 23 Sep 2026, 19:05

दिल्ली के कालकाजी मंदिर इलाके में सामने आया कालकाजी मंदिर गैंगरेप का मामला बेहद गंभीर है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में दर्शन करने गई 17 साल की नाबालिग लड़की और उसके दोस्त को तीन युवकों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर डराया। इसके बाद दोनों को आस्था कुंज पार्क के एक सुनसान हिस्से में ले जाने का आरोप है, जहां नाबालिग के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती कार्रवाई के दौरान एक आरोपी आसिफ को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद पकड़ा था, जबकि बाद में हेमंत और उसके भाई को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है और घटनाक्रम से जुड़े सबूत जुटाए जा रहे हैं।

कालकाजी मंदिर से आस्था कुंज पार्क पहुंची थी नाबालिग

पुलिस के मुताबिक, नाबालिग लड़की अपने एक दोस्त के साथ सोमवार शाम कालकाजी मंदिर गई थी। दोनों मंदिर में दर्शन करने के बाद पास स्थित आस्था कुंज पार्क पहुंचे। वहां वे कुछ देर बैठे थे।

इसी दौरान तीन युवक उनके पास पहुंचे। आरोप है कि युवकों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और दोनों से पूछताछ करने लगे। उन्होंने कथित तौर पर नाबालिग और उसके दोस्त को यह कहकर डराया कि वे गलत जगह बैठे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

इसके बाद मामला अचानक गंभीर हो गया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने दोनों को पार्क के एक अलग हिस्से में ले जाकर धमकाया। आरोप है कि एक आरोपी ने नाबालिग के दोस्त को रोके रखा, जबकि बाकी आरोपियों ने नाबालिग के साथ यौन अपराध किया।

खुद को पुलिस बताकर डराने का आरोप

इस कालकाजी मंदिर गैंगरेप मामले का एक सबसे गंभीर पहलू आरोपियों द्वारा कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर डराने का है।

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी पहचान पुलिसकर्मियों के रूप में बताई और किशोर-किशोरी को कार्रवाई का डर दिखाया। इससे दोनों पर मानसिक दबाव बना। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर धमकी देकर उन्हें पार्क के सुनसान हिस्से की ओर जाने के लिए मजबूर किया।

ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होता है कि आरोपियों ने किस तरह पीड़ितों को विश्वास में लिया और फिर उन्हें धमकाया। पुलिस इसी घटनाक्रम को अलग-अलग सबूतों के आधार पर जोड़ने में जुटी है।

शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस की जांच

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद नाबालिग को चिकित्सकीय जांच के लिए भेजा गया और पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए मामले में POCSO Act यानी Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत भी कार्रवाई की गई है। नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में कानून पीड़ित बच्चे की पहचान और गरिमा की सुरक्षा पर विशेष जोर देता है।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके अलावा पुलिस ने पीड़िता और उसके दोस्त से मिली जानकारी के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की।

कपड़ों और हुलिए से मिला पुलिस को सुराग

जांच में आरोपियों की पहचान के लिए पीड़िता द्वारा बताए गए हुलिए को महत्वपूर्ण सुराग माना गया। पुलिस को आरोपियों के कपड़ों और शारीरिक बनावट से जुड़ी जानकारी मिली थी।

Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, एक संदिग्ध के चेक शर्ट और जींस पहनने तथा उसके हुलिए से जुड़ी जानकारी को पुलिस ने जांच में इस्तेमाल किया। इसके साथ CCTV और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों की मदद से संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश की गई।

यहां यह समझना जरूरी है कि किसी आरोपी की पहचान या गिरफ्तारी अपने आप में अपराध साबित नहीं करती। मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही होगा।

एक आरोपी को पकड़ने के दौरान हुई मुठभेड़

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की तलाश के दौरान आसिफ को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में रोकने की कोशिश की गई। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने टीम पर गोली चलाई।

इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, गोलीबारी में आसिफ के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान एक गोली पुलिसकर्मी की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी लगी थी, हालांकि पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई।

मुठभेड़ से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी फिलहाल पुलिस के बयान पर आधारित है। जांच में इस हिस्से से जुड़े सबूतों को भी देखा जा रहा है।

तीनों आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में

शुरुआत में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में बाकी दोनों आरोपियों तक भी पहुंच बनाई गई। दिल्ली पुलिस के अनुसार, हेमंत और उसके भाई को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्टों में तीनों आरोपियों की अलग-अलग पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया गया है। हालांकि इस मामले में उनकी कथित भूमिका का निर्धारण जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तीनों आरोपी एक-दूसरे को कैसे जानते थे, घटना से पहले उनकी गतिविधियां क्या थीं और वारदात के दौरान किस आरोपी की क्या भूमिका थी।

कालकाजी इलाके की सुरक्षा पर भी सवाल

कालकाजी मंदिर गैंगरेप मामले ने दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। कालकाजी मंदिर राजधानी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर के आसपास पार्क और दूसरे सार्वजनिक स्थान भी मौजूद हैं। ऐसे में CCTV निगरानी, शाम के समय पुलिस गश्त और सुनसान हिस्सों में सुरक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

हालांकि किसी एक घटना के आधार पर पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यह जांच का विषय है कि घटना के समय वहां निगरानी और पुलिस व्यवस्था कैसी थी और क्या किसी स्तर पर सुरक्षा में कमी सामने आई।

नाबालिग की पहचान रखना जरूरी

इस मामले की रिपोर्टिंग में सबसे जरूरी बात नाबालिग की पहचान की सुरक्षा है। कानून के तहत यौन अपराध की पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इसलिए नाम, तस्वीर, पता, स्कूल या ऐसी कोई जानकारी साझा नहीं की जानी चाहिए जिससे उसकी पहचान सामने आ सके।

ऐसे संवेदनशील मामलों में खबर को सनसनीखेज बनाने के बजाय तथ्यात्मक तरीके से पेश करना जरूरी है। घटना का विवरण भी उतना ही दिया जाना चाहिए जितना खबर को समझने के लिए आवश्यक हो।

जांच में अब किन बातों पर नजर?

पुलिस की जांच में CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िता और उसके दोस्त के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और आरोपियों से पूछताछ महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर कथित तौर पर दोनों को कैसे डराया और घटना से पहले तथा बाद में उनकी गतिविधियां क्या थीं।

फिलहाल तीनों आरोपी गिरफ्तार हैं और मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आगे की जांच में सामने आने वाले सबूतों से घटना की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

घटना ने खड़े किए सुरक्षा से जुड़े सवाल

कालकाजी मंदिर गैंगरेप का यह मामला कई गंभीर सवाल सामने लाता है। एक तरफ पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर सवाल बने हुए हैं।

मामले की जांच अभी जारी है। इसलिए आरोपों को अंतिम सच मानने के बजाय पुलिस की जांच और अदालत की प्रक्रिया का इंतजार करना जरूरी है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात पीड़िता की निजता और सुरक्षा बनाए रखना तथा मामले की निष्पक्ष कानूनी जांच सुनिश्चित करना है।