Sensex 473 अंक चढ़ा, Nifty 22,550 के पार: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से शेयर बाजार को मिली राहत

भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को जोरदार वापसी की। पिछले कई सत्रों से जारी दबाव के बाद घरेलू बाजार में खरीदारी देखने को मिली और Sensex तथा Nifty दोनों बढ़त के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर कम होती चिंता ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
कारोबारी सत्र के अंत में BSE Sensex 472.77 अंक यानी 0.66 फीसदी की बढ़त के साथ 72,382.47 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में 133.80 अंक यानी 0.60 फीसदी की तेजी रही और यह 22,555.75 के स्तर पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में Sensex 72,631.93 और Nifty 22,621.80 के उच्च स्तर तक भी पहुंचे।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी बाजार के लिए बड़ी राहत
सोमवार की तेजी के पीछे सबसे अहम कारणों में से एक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रही। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कमी सीधे तौर पर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकती है।
कारोबार के दौरान WTI क्रूड करीब 90.60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, जबकि Brent क्रूड लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। हाल की तेजी के मुकाबले तेल कीमतों में आई नरमी ने निवेशकों को कुछ राहत दी।
अगर कच्चा तेल लंबे समय तक नियंत्रित स्तर पर रहता है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव कुछ कम हो सकता है। खासकर एविएशन, ऑटो, पेंट, केमिकल और अन्य ऐसे उद्योगों को फायदा मिल सकता है जिनकी लागत में ऊर्जा और पेट्रोलियम उत्पादों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर चिंता कम होने से भी मिला फायदा
भारतीय शेयर बाजार पर सिर्फ घरेलू घटनाओं का ही नहीं बल्कि अमेरिकी बाजार और Federal Reserve की नीतियों का भी बड़ा प्रभाव पड़ता है। हालिया अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के उम्मीद से कमजोर रहने के बाद निवेशकों को लगा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आक्रामक तरीके से ब्याज दर बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने से बच सकता है।
ब्याज दरों को लेकर आक्रामक रुख की आशंका कम होने से दुनिया भर के जोखिम वाले एसेट्स को राहत मिली। इसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी दिखाई दिया। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने Fed की आक्रामक मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम की और इससे उभरते बाजारों की धारणा बेहतर हुई।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वैश्विक जोखिम पूरी तरह खत्म हो गए हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर, क्रूड और भू-राजनीतिक तनाव आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कारक बने रह सकते हैं।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी
सोमवार की तेजी में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। निवेशकों ने कई वित्तीय कंपनियों के सकारात्मक कारोबारी अपडेट के बाद इन शेयरों में खरीदारी की।
Sensex के प्रमुख शेयरों में Bajaj Finance करीब 2.28 फीसदी चढ़ा, जबकि ICICI Bank में लगभग 2.11 फीसदी की तेजी रही। Axis Bank, SBI और Bajaj Finserv में भी बढ़त देखने को मिली।
Bajaj Finance के सितंबर तिमाही में नए लोन की संख्या में सालाना आधार पर करीब 11 फीसदी की वृद्धि की खबर ने भी शेयर को समर्थन दिया। वहीं Punjab National Bank के ग्लोबल एडवांस में 14.8 फीसदी की वृद्धि और Bank of Baroda के एडवांस में 18 फीसदी की वृद्धि ने बैंकिंग सेक्टर के प्रति धारणा को मजबूत किया।
Mahindra & Mahindra Financial Services के डिस्बर्समेंट में भी तिमाही आधार पर मजबूत वृद्धि देखने को मिली। इन कारोबारी संकेतों से निवेशकों को उम्मीद मिली कि वित्तीय कंपनियों का कारोबार घरेलू मांग के बीच मजबूत बना रह सकता है।
ITC बना बाजार का बड़ा स्टार
सोमवार के कारोबार में ITC के शेयरों में करीब 4.5 फीसदी की तेजी देखने को मिली और यह Sensex के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहा। ब्रोकरेज फर्म Citi द्वारा ITC को लेकर सकारात्मक रुख अपनाने के बाद शेयर में खरीदारी बढ़ी।
ITC में तेजी का असर FMCG सेक्टर पर भी दिखाई दिया। Nifty FMCG इंडेक्स करीब 1.80 फीसदी चढ़ा। इसके अलावा Consumer Durables, Telecom, Realty और कई अन्य सेक्टरों में भी खरीदारी देखने को मिली।
यह संकेत देता है कि सोमवार की तेजी केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बाजार के कई हिस्सों में खरीदारी देखने को मिली।
चार दिन की गिरावट का सिलसिला टूटा
सोमवार की तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारतीय बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला टूट गया।
हालांकि इससे पहले Sensex और Nifty लगातार आठ सप्ताह की साप्ताहिक गिरावट दर्ज कर चुके थे। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, ऊंचे कच्चे तेल के दाम, बढ़ती वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कमजोर रुपये जैसे कारणों से भारतीय बाजार पर दबाव बना हुआ था।
इसलिए सोमवार की तेजी को फिलहाल एक राहत के तौर पर देखा जा रहा है। बाजार में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले सत्रों में यह खरीदारी जारी रहती है या निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं।
Midcap और Smallcap शेयरों में भी बढ़त
सोमवार को तेजी का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। Nifty Midcap 100 में करीब 0.67 फीसदी और Nifty Smallcap 100 में लगभग 0.47 फीसदी की बढ़त रही।
Nifty 100 करीब 0.55 फीसदी और Nifty 500 लगभग 0.52 फीसदी ऊपर बंद हुआ। इससे पता चलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी केवल Sensex और Nifty की बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही।
हालांकि कुछ सेक्टरों में कमजोरी भी देखने को मिली। Healthcare और Pharma इंडेक्स दबाव में रहे, जबकि IT इंडेक्स लगभग सपाट रहा।
FII की बिकवाली अभी भी बड़ी चिंता
शेयर बाजार में सोमवार की तेजी के बावजूद Foreign Institutional Investors यानी FII की बिकवाली निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
हाल के सत्रों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारतीय इक्विटी बाजार पर दबाव बनाया है। दूसरी तरफ Domestic Institutional Investors यानी DII लगातार बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एक हालिया सत्र में FII ने करीब 9,484 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि DII ने लगभग 10,042 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है और घरेलू संस्थागत निवेश जारी रहता है, तो बाजार में रिकवरी को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।
अब RBI की बैठक और तिमाही नतीजों पर नजर
निवेशकों की नजर अब RBI Monetary Policy Committee की बैठक और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर रहेगी। ब्याज दरों से जुड़े फैसले का असर बैंकिंग, NBFC और ब्याज-संवेदनशील सेक्टरों पर पड़ सकता है।
इसके अलावा कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। निवेशक यह देखेंगे कि कंपनियों की बिक्री, मुनाफा, मार्जिन और भविष्य के कारोबारी अनुमान किस तरह रहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार के लिए प्रमुख संकेतक रहेंगी।
क्या Sensex-Nifty की तेजी आगे भी जारी रहेगी?
सोमवार की तेजी ने निश्चित रूप से निवेशकों को राहत दी है, लेकिन इसे अभी पूरी तरह से बाजार के ट्रेंड में बदलाव के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
Nifty का 22,550 के ऊपर बंद होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत जरूर है। वहीं Sensex का 72,000 के ऊपर टिकना भी निवेशकों के लिए राहत की बात है। लेकिन बाजार में मजबूत रिकवरी के लिए लगातार कई सत्रों तक खरीदारी, विदेशी बिकवाली में कमी और वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता जरूरी होगी।
अगर क्रूड ऑयल की कीमतों में और नरमी आती है, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर दबाव कम होता है और घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहते हैं, तो बाजार में आगे भी खरीदारी देखने को मिल सकती है।
कुल मिलाकर 5 अक्टूबर 2026 का शेयर बाजार कारोबार निवेशकों के लिए राहत लेकर आया। Sensex 472.77 अंक चढ़कर 72,382.47 पर और Nifty 133.80 अंक बढ़कर 22,555.75 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर कम होती चिंता, सकारात्मक वैश्विक संकेत और बैंकिंग-फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी।
हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ऊंची बॉन्ड यील्ड, रुपये की कमजोरी और भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बाजार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इसलिए आने वाले दिनों में RBI का फैसला, तिमाही नतीजे, क्रूड ऑयल और FII की गतिविधियां Sensex और Nifty की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न माना जाए।