वनवास हुआ खत्म क्या नई जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं स्मृति ईरानी
नई दिल्ली । भारतीय राजनीति में युवा वोटरों को नकारा नहीं जा सकता है। इसलिए युवाओं को ध्यान में रखकर सोशल मीडिया को सीढ़ी बनाकर बातचीत का तरीका अपनाया जा रहा है। जो अभी तक चल रहे राजनीतिक संवाद से बिल्कुल ही अलग है। इसी मौके का बहुत ही अच्छे तरीके से फायदा उठाया है…

नई दिल्ली । भारतीय राजनीति में युवा वोटरों को नकारा नहीं जा सकता है। इसलिए युवाओं को ध्यान में रखकर सोशल मीडिया को सीढ़ी बनाकर बातचीत का तरीका अपनाया जा रहा है। जो अभी तक चल रहे राजनीतिक संवाद से बिल्कुल ही अलग है। इसी मौके का बहुत ही अच्छे तरीके से फायदा उठाया है भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने Zen -G तक अपनी पहुंच को और मजबूत करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया है। इस मुहिम में पार्टी के बड़े नेताओं को अपने अनुभव को देखते हुए काम करना है। लेकिन इसमें स्मृति ईरानी का नाम प्रमुख में मौजूद है। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई टीम बनाई है जिसमें राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, गुजरात के मंत्री हर्ष सांगवी साथ में छत्तीसगढ़ से मंत्री ओपी चौधरी और भी कई नेताओं के नाम शामिल है।
Gen – Z इतने इंपोर्टेंट क्यों है?
1997 से 2012 तक के सभी युवाओं को Gen – Z माना जाता है। यह युवा आने वाले आगामी चुनाव में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाएंगे।
Gen – Z युवाओं की राजनीति के बारे में अपने अलग-अलग विचार हैं जो पहले की वोटरों से बिल्कुल ही अलग हैं- जो रोटी कपड़ा मकान पर आकर रुक जाता था।
इस पीढ़ी के युवाओं को अपने जुमलेबाजी से मूर्ख बनाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है उनके सवाल और राजनीतिक सोच बिल्कुल अलग है इनको पुराने और पारंपरिक प्रचार प्रसार को यूज़ करके कनेक्ट कर पाना असंभव है।
सभी राजनीतिक पार्टी अब युवाओं से सीधा-सीधा संवाद स्थापित करने के लिए नए-नए तरीके अपना रही है चाहे वह डिजिटल कैंपेन के माध्यम से हो या फिर सोशल मीडिया का सहारा लेकर जिससे वह ज्यादा से ज्यादा युवाओं के साथ अपना संवाद या फिर अपना राजनीतिक उद्देश्य बता पाए। लेकिन यह भी बात सत्य है की भारतीय जनता पार्टी का मकसद केवल संवाद स्थापित करना नहीं है। युवाओं की सोच उम्मीद रोजगार शिक्षा आगे आने वाले समय में अवसर या किसी भी प्रकार का बिजनेस स्टार्ट करना जैसे समस्याओं को मुख्य बिंदु मानकर युवाओं तक पहुंचाने का रोड में तैयार कर रहा है।
आखिर स्मृति ईरानी ही क्यों
स्मृति ईरानी नेशनल जनरल सेक्रेटरी पद से ही भारतीय जनता पार्टी में वापसी के साथ आने वाले समय में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।
राजनीतिक वापसी
2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हर का सामना करने के वह राजनीति से दूरी बनाकर अपने पुराने टीवी सीरियल की दुनिया में चली गई थी और राजनीति में बहुत ज्यादा एक्टिव नहीं थी।
2024 से 2026 तक के बीच में बहुत सारे राजनीतिक उठा पटक हुए। ऐसे में नई जिम्मेदारी के साथ उनका आना एक राजनीतिक वनवास खत्म के समान ही माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव
2027 में उत्तर प्रदेश जहां से किस की सरकार केंद्र में बनेगी वह तय होता है वहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसे में स्मृति ईरानी को नया पद देना । यहां भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य साफ-साफ दिख रहा है। स्मृति ईरानी का राजनीतिक शुरुआत में 2014 के लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद 2019 में अमेठी से ही जीत दर्ज की थी जो कांग्रेस का में गढ़ माना जाता था। बाद में केंद्र में आने के बाद उनको उनके हिसाब से मंत्रालय की जिम्मेदारियां भी मिली।
नितिन नवीन की इस टीम को देखकर लग रहा है संगठन में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ उन सभी नेताओं को भी महत्व दिया जा रहा है जो जनता से अपने भाषण में अपना संवाद सीधा-सीधा जोड़ पाते हैं और पार्टी में जिनकी मजबूत पहचान है।
संगठन में अलग पहचान
भारतीय जनता पार्टी मैं स्मृति ईरानी कि बस वापसी नहीं हुई है और ना ही उनको संसद या मंत्री के रूप में लाई है स्मृति ईरानी को सीधा देश के हित में जितने भी महत्वपूर्ण निर्णय होंगे। उसे गत में शामिल कियाहै।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
स्मृति ईरानी के हाल ही के कुछ इंटरव्यू में उन्होंने महिलाओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट रूप से राखी महिलाओं को जिम्मेदारी तो आसानी से मिल जाता है लेकिन अधिकार के लिए उनको लड़ना पड़ता है महिलाओं को अपने जिम्मेदारियां को निभाते हुए अपने आगे अधिकार के बारे में भी सोचना है। स्मृति ईरानी आज से नहीं महिला आरक्षण और 33% आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर बहुत समय से इस मुद्दे पर खुलकर अपने विचार पेश कर रहे हैं महिला हित के लिए वह समय-समय पर हमेशा से ही काम करती आई है।
नई हुआ शक्ति नई चुनौती
भारतीय जनता पार्टी के अभी अनुभवी नेताओं को यह समझना होगा कि आज की युवा पीढ़ी वास्तविकता में जीती है। आज के समय के युवा भाषण बाजी से दूरी बनाकर रखते हैं वह अपनी बात आपके सामने रखेंगे और उसका विशेष लेसन भी आपसे ही मांगेंगे।
स्मृति ईरानी की यहां दौड़ी जिम्मेदारी होगी पार्टी के विचारधारा को उसकी नीतियों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना और दूसरी तरफ युवाओं के सवाल तक अपने संगठन के अनुभवी नेताओं तक पहुंचाना यही दोनों तरफ की बात चित इस अभियान का आगे का रास्ता तय करेगी।
राजनीति में स्मृति ईरानी का आक्रामक तेवर
हमेशा से ही स्मृति ईरानी अपने बोलने की शैली से ही विपक्ष पर हावी रही है।
विपक्ष के तीखे हमले भी अपने वक्त छवि के कारण आसान इसे निकल जाती हैं। हर मुद्दे पर सही जानकारी और आंकड़ों का सही ज्ञान भी उनका संगठन के दूसरे नेताओं से अलग दिखती है।
परीक्षा के लिए तैयारी जमीन पर
भारत की सभी राजनीतिक पार्टी को इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि आज की युवा पीढ़ी को सिर्फ सोशल मीडिया या डिजिटल अभियान से जोड़ने तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
जब शिक्षा कंपटीशन टेक्नोलॉजी और उनके किए गए सवालों को समझना और उनका आंसर देना भी बहुत महत्वपूर्ण होगा।
इससे युवा पीढ़ी को वह आसानी से जुड़ पाएंगे।
