जयपुर में तीन मंजिला बिल्डिंग में भीषण आग, 25 दुकानें जलकर खाक; 5 सिलेंडर समय रहते निकाले गए

Jaipur Fire News: राजस्थान की राजधानी जयपुर के पुराने शहर यानी परकोटा इलाके से गुरुवार सुबह एक बड़ी आग की घटना सामने आई। त्रिपोलिया बाजार के मणिहारों का कटला स्थित तीन मंजिला सेठी कॉम्प्लेक्स में सुबह करीब 7 बजे अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि आसपास की करीब 25 दुकानें और गोदाम इसकी चपेट में आ गए। आग के कारण पूरे इलाके में धुएं का घना गुबार छा गया और कुछ दूर तक लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायत हुई।
आग बुझाने के लिए अलग-अलग स्थानों से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। संकरी गलियों और दुकानों में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामान होने के कारण फायरकर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। करीब साढ़े सात घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर करीब 2:30 बजे आग पर काबू पाया गया, हालांकि इसके बाद भी घटनास्थल पर धुआं और गर्मी बनी रही।
सुबह-सुबह लगी आग ने मचाई अफरा-तफरी
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 7 बजे सेठी कॉम्प्लेक्स में आग की शुरुआत हुई। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है, हालांकि आग लगने का अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। कुछ रिपोर्टों में आग की शुरुआत कपड़ों की दुकान के बाहर रखे कार्टन से तो कुछ में चूड़ियों के गोदाम से होने की बात सामने आई है। इसलिए इस हिस्से की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
आग लगते ही आसपास के इलाके में धुआं फैलने लगा। माणक चौक थाना घटनास्थल के पास होने के कारण पुलिसकर्मियों ने धुआं देखकर तुरंत मौके पर पहुंचकर दमकल विभाग को सूचना दी।
कुछ ही समय में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंच गईं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।
25 दुकानें और गोदाम आग की चपेट में
इस हादसे में कॉम्प्लेक्स की करीब 25 दुकानें और गोदाम प्रभावित हुए। यहां कपड़े, चूड़ियां, प्लास्टिक का सामान, कॉस्मेटिक आइटम और दूसरे ज्वलनशील सामान रखे हुए थे। इन सामानों के कारण आग तेजी से फैलती गई।
दुकानों और गोदामों में बड़ी मात्रा में सामान जमा होने की वजह से आग पर काबू पाना आसान नहीं था। आग की लपटें एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचती गईं और धुआं पूरे बाजार के ऊपर दिखाई देने लगा।
स्थानीय व्यापारियों के लिए यह हादसा बड़ा आर्थिक नुकसान लेकर आया है। हालांकि कुल नुकसान कितना हुआ है, इसका सटीक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। दुकानों का सामान जलने के साथ-साथ बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा है।
पांच LPG सिलेंडर बने बड़ा खतरा
इस हादसे के दौरान सबसे बड़ी चिंता LPG सिलेंडरों को लेकर थी। रिपोर्टों के मुताबिक बिल्डिंग के अंदर 5 कमर्शियल LPG सिलेंडर रखे हुए थे। आग बढ़ने से पहले फायरकर्मियों ने इन सिलेंडरों को समय रहते बाहर निकाल लिया। इससे एक संभावित बड़े हादसे का खतरा टल गया।
अगर सिलेंडर आग की चपेट में आ जाते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। दमकल कर्मचारियों ने आग के बीच जोखिम उठाकर इन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
यही वजह रही कि आग पर काबू पाने के दौरान फायर टीम ने आसपास के इलाके की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया।
संकरी गलियों ने बढ़ाई दमकलकर्मियों की परेशानी
जयपुर का परकोटा इलाका अपनी पुरानी इमारतों और संकरी गलियों के लिए जाना जाता है। त्रिपोलिया बाजार भी इसी पुराने शहर का व्यस्त इलाका है। यहां कई जगह इतनी कम जगह है कि बड़ी दमकल गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचाने में परेशानी होती है।
इस आग में भी संकरी गलियां फायर ब्रिगेड के लिए बड़ी चुनौती बनीं। दमकल की गाड़ियों को अलग-अलग रास्तों से घटनास्थल तक पहुंचाया गया और कर्मचारियों ने सीमित जगह में आग बुझाने का काम किया।
आग बुझाने के अभियान के दौरान इलाके की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई, ताकि किसी अतिरिक्त खतरे की संभावना कम की जा सके।
धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दिया
आग इतनी भीषण थी कि इससे उठने वाला काला धुआं जयपुर के परकोटा क्षेत्र में काफी दूर तक दिखाई दिया। रिपोर्टों के मुताबिक सुभाष चौक से लेकर चांदपोल तक धुएं का असर नजर आया। आसपास मौजूद लोगों को धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायत भी हुई।
आग की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास जमा होने लगे। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और दमकल वाहनों के लिए रास्ता खाली कराने का प्रयास किया।
दुकानदार सामान बचाने में जुटे
आग की जानकारी मिलते ही कई दुकानदार अपनी दुकानों से सामान निकालने में जुट गए। कुछ लोग खुद पानी डालकर आग को रोकने की कोशिश करते दिखाई दिए।
हालांकि आग तेजी से फैल रही थी, इसलिए कई दुकानदार अपनी दुकानों के अंदर नहीं जा सके। आग और धुएं के कारण काफी सामान जल गया।
कई व्यापारियों के लिए यह सिर्फ दुकान का नुकसान नहीं बल्कि उनकी लंबे समय की कमाई और जमा पूंजी का नुकसान है। आग से प्रभावित दुकानों में बड़ी मात्रा में व्यापारिक सामान रखा हुआ था।
फायर सेफ्टी व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद अब बिल्डिंग की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों ने आरोप लगाया कि बिल्डिंग में लगाए गए फायर सेफ्टी उपकरण ठीक तरह से काम नहीं कर रहे थे। कुछ रिपोर्टों में फायर सिस्टम के बंद होने की बात भी सामने आई है।
हालांकि इन आरोपों की पूरी पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही होगी। माणक चौक थाना अधिकारी ने भी बताया है कि बिल्डिंग की फायर एनओसी और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी।
ऐसे पुराने और भीड़भाड़ वाले बाजारों में आग से बचाव के इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। खासकर उन जगहों पर जहां कपड़े, प्लास्टिक और दूसरे ज्वलनशील सामान बड़ी मात्रा में मौजूद रहते हैं।
रेस्टोरेंट और निर्माण को लेकर भी उठे सवाल
आग के बाद स्थानीय व्यापारियों ने बिल्डिंग में चल रहे रेस्टोरेंट और कथित निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कुछ व्यापारियों का दावा है कि बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में रेस्टोरेंट और होटल से जुड़ा काम चल रहा था और वहां वेल्डिंग का काम भी किया जाता था।
इन आरोपों की भी जांच की जरूरत है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि आग का कारण इसी गतिविधि से जुड़ा था। शुरुआती पुलिस जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका बताई गई है।
ट्रैफिक पर भी पड़ा असर
आग के कारण त्रिपोलिया बाजार और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई। दमकल की गाड़ियों और पुलिस की मौजूदगी के कारण रास्तों पर भीड़ बढ़ गई। आसपास की कई दुकानें भी एहतियात के तौर पर बंद रहीं। रिपोर्टों के अनुसार बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार और त्रिपोलिया बाजार के आसपास जाम की स्थिति बनी।
पुलिस ने आग बुझाने के अभियान को देखते हुए आसपास के रास्तों पर आवाजाही को नियंत्रित किया।
गनीमत रही, नहीं हुई जनहानि
इस भीषण आग के बीच सबसे राहत की बात यह रही कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। आग सुबह के समय लगी, जब बाजार की ज्यादातर दुकानें खुली नहीं थीं। इससे लोगों के बीच बड़ी भगदड़ जैसी स्थिति बनने से बच गई।
हालांकि कुछ लोगों को धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी हुई, लेकिन किसी बड़ी चोट या मौत की खबर सामने नहीं आई है।
हादसा दे गया बड़ी सीख
जयपुर के इस अग्निकांड ने एक बार फिर पुराने बाजारों में फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संकरी गलियां, पुरानी इमारतें और दुकानों में बड़ी मात्रा में रखा ज्वलनशील सामान आग को तेजी से फैलाने का कारण बन सकता है।
ऐसे बाजारों में नियमित रूप से फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच, आपातकालीन रास्तों को खाली रखना और बिजली की वायरिंग की जांच बेहद जरूरी है। इसके अलावा दुकानदारों को भी ज्वलनशील सामान को सुरक्षित तरीके से रखने और आग लगने की स्थिति में तुरंत बाहर निकलने की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।
जयपुर की यह घटना बताती है कि आग छोटी जगह से शुरू होकर कुछ ही मिनटों में बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले सकती है। समय पर पुलिस और दमकल विभाग के पहुंचने तथा पांच LPG सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकालने से बड़ा खतरा टल गया।
फिलहाल जांच जारी
फिलहाल आग पर काबू पाया जा चुका है और प्रशासन की ओर से घटना की जांच की जा रही है। आग लगने की वास्तविक वजह, फायर सेफ्टी व्यवस्था की स्थिति और बिल्डिंग की फायर एनओसी से जुड़े सवालों की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
करीब साढ़े सात घंटे तक चले इस अग्निकांड ने जयपुर के व्यापारिक इलाके को हिलाकर रख दिया। 25 दुकानों और गोदामों को नुकसान, पांच LPG सिलेंडरों का खतरा और घंटों तक धुएं से घिरे इलाके ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि भीड़भाड़ वाले पुराने बाजारों में आग से बचाव की व्यवस्था कितनी मजबूत है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि इस बड़े हादसे में किसी की जान नहीं गई। अब प्रशासन की जांच से यह पता चलेगा कि आग की असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।