TTE या कोई और… ट्रेन के गेट पर लगी ये सीट किसकी होती है? जानिए रेलवे का नियम

ट्रेन में सफर करते समय आपने कोच के दरवाजे के पास एक छोटी-सी सीट या फोल्डिंग सीट जरूर देखी होगी। कई यात्रियों के मन में इसे देखकर सवाल आता है कि आखिर गेट के पास लगी ये सीट किसकी होती है? क्या इसे TTE इस्तेमाल करता है या कोई यात्री भी यहां बैठ सकता है? सोशल मीडिया पर भी इस तरह की सीट को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है।
दरअसल, ट्रेन के हर हिस्से की अपनी उपयोगिता होती है और दरवाजे के पास मौजूद सीट को सामान्य यात्री की रिजर्व सीट समझना सही नहीं है। खासकर आरक्षित कोचों में इस तरह की सीट का इस्तेमाल रेलवे स्टाफ या कोच अटेंडेंट की जरूरत के हिसाब से किया जा सकता है। कुछ कोचों में इसकी डिजाइन और उपयोग अलग हो सकता है।
गेट के पास वाली सीट आम यात्री के लिए होती है?
गेट के पास दिखाई देने वाली फोल्डिंग या डोर सीट को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम यही है कि शायद यह किसी यात्री के लिए रिजर्व होती है। लेकिन ऐसी सीट सामान्य तौर पर टिकट बुकिंग में अलग से यात्री की बर्थ के रूप में उपलब्ध नहीं होती।
एक रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व कोचों में दरवाजे के पास मौजूद ऐसी सीटें मुख्य रूप से ट्रेन अटेंडेंट के इस्तेमाल के लिए डिजाइन की जाती हैं। इनका स्थान अक्सर कोच के अंतिम हिस्से और वॉशरूम के आसपास होता है।
यानी अगर आपको गेट के पास ऐसी सीट दिखाई देती है, तो उसे अपनी टिकट वाली सीट समझकर बैठ जाना उचित नहीं है।
क्या यह TTE की सीट होती है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। हर गेट के पास लगी सीट को TTE की सीट कहना सही नहीं होगा। अलग-अलग कोच के डिजाइन और स्टाफ की व्यवस्था के आधार पर सीट का उपयोग अलग हो सकता है।
हालांकि, ट्रेन में TTE के लिए निर्धारित सीट/बर्थ की व्यवस्था भी होती है। The Indian Express की एक रिपोर्ट में स्लीपर कोच में TTE के लिए निर्धारित सीट का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में एक TTE के अपनी निर्धारित सीट पर बैठने और एक यात्री के वहां बैठे मिलने का जिक्र है।
इसलिए TTE की निर्धारित सीट और दरवाजे के पास मौजूद फोल्डिंग डोर सीट को एक ही चीज नहीं मानना चाहिए।
TTE की सीट पर यात्री बैठ सकता है?
अगर किसी सीट या बर्थ का इस्तेमाल ड्यूटी पर मौजूद रेलवे कर्मचारी के लिए निर्धारित है, तो यात्री को वहां अपनी मर्जी से कब्जा नहीं करना चाहिए।
TTE का काम सिर्फ टिकट चेक करना नहीं है। उसे यात्रियों की टिकट जांच, सीट/बर्थ से संबंधित व्यवस्था और अनधिकृत यात्रियों को रोकने जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं। रेलवे से जुड़े दस्तावेजों और न्यायिक रिकॉर्ड में भी TTE की इन जिम्मेदारियों का उल्लेख मिलता है।
इसलिए स्टाफ के लिए निर्धारित स्थान पर बैठने से पहले रेलवे कर्मचारी से पूछना बेहतर है।
क्या गेट के पास वाली सीट टिकट में बुक होती है?
सामान्य तौर पर जिस तरह आपको सीट या बर्थ नंबर टिकट पर मिलता है, उसी तरह डोर के पास मौजूद फोल्डिंग सीट आम यात्री की नियमित बुकिंग वाली सीट नहीं होती।
यही वजह है कि टिकट बुक करते समय ऐसी सीट आम तौर पर उपलब्ध विकल्प के तौर पर नजर नहीं आती। वहीं सामान्य रिजर्व सीटों का आवंटन रेलवे के रिजर्वेशन सिस्टम के जरिए होता है।
कई बार यात्री गेट के पास मौजूद नियमित बर्थ को इस छोटी सीट के साथ मिला देते हैं। दोनों में अंतर समझना जरूरी है।
फिर गेट के पास बैठने वाले यात्री कौन होते हैं?
कुछ ट्रेनों में दरवाजे के आसपास यात्रियों की नियमित सीट या बर्थ भी होती है। ऐसी सीट अगर आपके टिकट पर आवंटित है, तो आप वहां बैठ सकते हैं।
लेकिन अगर बात छोटी फोल्डिंग सीट की हो, जो दरवाजे के पास लगी है और टिकट पर उसका कोई बर्थ नंबर नहीं है, तो उसे आम यात्री के लिए नियमित सीट नहीं माना जाना चाहिए।
किसी खाली जगह को देखकर यह मान लेना कि वह किसी की नहीं है, सही तरीका नहीं है। रेलवे के नियमों के अनुसार आरक्षित आवास का इस्तेमाल आवंटन के आधार पर किया जाता है।
खाली सीट दिखे तो क्या करें?
ट्रेन में कोई सीट खाली दिखाई दे तो उसे तुरंत अपनी सीट मानकर बैठने से बचें। खासकर अगर वह आपकी टिकट पर आवंटित सीट नहीं है।
यदि आपको लगता है कि कोई सीट खाली है और आप वहां बैठ सकते हैं, तो TTE से पूछना सबसे सुरक्षित तरीका है। TTE अपने रिकॉर्ड और उपलब्ध बर्थ की स्थिति देखकर बता सकता है कि वह सीट वास्तव में खाली है या अगले स्टेशन से किसी यात्री को आवंटित है।
रेलवे की व्यवस्था में TTE को खाली बर्थ को नियमों के अनुसार आवंटित करने की भूमिका भी दी गई है। रेलवे बोर्ड के TTE से जुड़े निर्देशों में खाली आवास को पात्र यात्रियों को आवंटित करने की प्रक्रिया का उल्लेख है।
गेट के पास बैठना खतरनाक भी हो सकता है
दरवाजे के पास मौजूद जगह को सामान्य सीट समझकर बैठना केवल नियमों का मामला नहीं है, बल्कि सुरक्षा से भी जुड़ा है।
चलती ट्रेन में कोच के दरवाजे के पास अनावश्यक रूप से बैठना या खड़े रहना जोखिम पैदा कर सकता है। रेलवे के निर्देशों में TTE की जिम्मेदारियों में ट्रेन चलने के दौरान कोच के दरवाजों को सुरक्षित रखने का भी उल्लेख है।
यात्रियों को चलती ट्रेन के खुले दरवाजे के पास बैठने या खड़े होने से बचना चाहिए।
गेट के पास वाली सीट को लेकर सबसे बड़ा भ्रम
इस पूरी बात को आसान भाषा में समझें तो हर गेट वाली सीट TTE की नहीं होती और हर गेट के पास की सीट यात्री के लिए भी नहीं होती।
अगर सीट आपके टिकट पर बर्थ/सीट नंबर के रूप में आवंटित है, तो वह आपकी यात्री सीट है। अगर वह छोटी फोल्डिंग सीट है, जिसका कोई यात्री बर्थ नंबर नहीं है और जो कोच के दरवाजे के पास स्टाफ की सुविधा के लिए लगी है, तो उसे अपनी सीट समझकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
ट्रेन के गेट के पास लगी छोटी सीट देखकर अक्सर यात्रियों के मन में सवाल आता है कि आखिर यह TTE की सीट है या किसी यात्री की? इसका जवाब यह है कि ऐसी फोल्डिंग डोर सीट को सामान्य यात्री की आरक्षित सीट नहीं माना जाना चाहिए। कुछ कोचों में इसका इस्तेमाल अटेंडेंट या रेलवे स्टाफ की जरूरत के लिए होता है, जबकि TTE की अपनी निर्धारित सीट/बर्थ अलग व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है।
इसलिए अगली बार ट्रेन में ऐसी सीट दिखे तो बिना पूछे वहां बैठने के बजाय TTE या कोच अटेंडेंट से जानकारी लेना बेहतर है। और अगर आपको कोई खाली यात्री बर्थ चाहिए, तो उसका आवंटन रेलवे के नियमों के अनुसार TTE से ही करवाना चाहिए।