अमित शाह ने देहरादून से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- उत्तराखंड में 10 साल में बदली विकास की तस्वीर

काफी हद तक दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोगों की ओर से भेजे जाने वाले पैसों पर निर्भर थी। इसे मनीऑर्डर इकोनॉमी कहा जाता था। अब सरकार उद्योग और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देकर औद्योगिक अर्थव्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
शाह ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड को करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इनमें से एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के उद्योग जमीन पर उतर चुके हैं और काम शुरू कर चुके हैं। उन्होंने इसे छोटे पहाड़ी राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
35 हजार युवाओं को नौकरी देने की बात कही
रोजगार के मुद्दे पर भी अमित शाह ने धामी सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में 35 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। शाह ने खास तौर पर नकल विरोधी कानून का जिक्र किया और कहा कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने सख्त कानून बनाया है।
उनके मुताबिक, पहले पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं से मेहनत करने वाले युवाओं का भरोसा कमजोर होता था। अब नकल कराने वालों और पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा साफ और भरोसेमंद बनाने में मदद मिली है।
हालांकि, रोजगार और भर्ती परीक्षाओं को लेकर विपक्ष समय-समय पर सरकार से सवाल भी करता रहा है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।
सड़क और सीमावर्ती गांवों के विकास पर भी बोले शाह
अमित शाह ने अपने भाषण में सड़क और सीमा सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पहले की सरकारें सीमा के पास सड़क बनाने से बचती थीं। उनका कहना था कि उस समय यह तर्क दिया जाता था कि सड़क बनने से दुश्मन देश के सैनिकों को अंदर आने का रास्ता मिल सकता है।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमा तक सड़क और दूसरी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। अब देश की सुरक्षा व्यवस्था पहले से मजबूत हुई है। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने में सक्षम है।
उन्होंने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का भी जिक्र किया। शाह के अनुसार, सीमावर्ती गांवों में विकास के काम होने से वहां रहने वाले लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य के 51 सीमावर्ती गांवों में युवा वापस लौटने लगे हैं। सरकार का मानना है कि गांवों में सड़क, बिजली, पानी और रोजगार की सुविधा बढ़ने से पलायन की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
UCC और धर्मांतरण विरोधी कानून को बताया बड़ी उपलब्धि
अमित शाह ने उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता यानी UCC को भी सरकार का बड़ा फैसला बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने आजादी के बाद समान नागरिक संहिता को लागू किया। शाह ने कहा कि उनकी पार्टी की सरकार वाले दूसरे राज्यों में भी इसे लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस कानून को जमीन पर उतारा है। शाह ने नकल विरोधी कानून और महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे फैसलों को भी सरकार की उपलब्धियों में गिनाया।
उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और तीन लाख से ज्यादा महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की दिशा में भी काम हुआ है। उनके मुताबिक, इन योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है।
राहुल गांधी की यात्रा पर भी किया हमला
अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने विपक्ष की वोट बचाओ यात्रा पर टिप्पणी करते हुए इसे घुसपैठियों को बचाने की यात्रा बताया। शाह ने कहा कि देश की मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटने चाहिए या नहीं, यह जनता को तय करना होगा।
उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। शाह ने राम मंदिर के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा और कहा कि विपक्ष ने मंदिर निर्माण का विरोध किया था। उनके भाषण का यह हिस्सा राजनीतिक रूप से काफी अहम रहा, क्योंकि इसमें उत्तराखंड के विकास के साथ राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दे भी शामिल रहे।
हरीश रावत पर सवाल, कांग्रेस के पुराने शासन को घेरा
अमित शाह ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि उस समय सचिवालय में कमीशन और लेन-देन की चर्चा होती थी। उन्होंने छात्रवृत्ति घोटाले, शराब नीति से जुड़े स्टिंग और कुमाऊं के खाद्य आपूर्ति मामले का भी जिक्र किया।
शाह ने सवाल उठाया कि हरीश रावत ने ऐसा कौन सा काम किया है, जिसके लिए उन्हें याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता को तय करना है कि उसे विकास करने वाली सरकार चाहिए या फिर कांग्रेस की पुरानी व्यवस्था।
यह बयान राज्य की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल जनता के बीच अपनी बात रखने में जुटे हैं। ऐसे में शाह का यह भाषण सिर्फ स्थापना दिवस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आने वाले चुनाव की राजनीतिक झलक भी दिखाई दी।
2047 तक विकसित उत्तराखंड बनाने का लक्ष्य
राज्योत्सव समारोह में अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे जैसी परियोजनाओं का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से राज्य में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। पहाड़ी इलाकों में सड़क और दूसरी सुविधाएं पहुंचने से स्थानीय लोगों को अपने घर के पास ही रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के मौके पर अमित शाह का भाषण विकास के दावों और कांग्रेस पर राजनीतिक हमलों के इर्द-गिर्द रहा। एक तरफ उन्होंने धामी सरकार के कामकाज की तारीफ की, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी और हरीश रावत को निशाने पर लिया। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से गिनाई गई उपलब्धियों का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है और विपक्ष इन दावों का जवाब किस तरह देता है।