वरुणा-गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: अब बनारस में नहीं लगेगा जाम, पटना से बंगाल तक सीधी हाईस्पीड ड्राइव

काशी में अगर आप कभी गाड़ी लेकर निकले हैं तो आपको पता होगा कि यहाँ सफर से ज्यादा समय जाम में बीतता है। कैंट से गोदौलिया, लहुराबीर से काशी स्टेशन – हर रास्ते पर ब्रेक ही ब्रेक। इसी पुरानी परेशानी को जड़ से खत्म करने के लिए अब एक बहुत बड़ा प्लान जमीन पर उतर रहा है, जिसका नाम है वरुणा और गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर।
यह सिर्फ दो फ्लाईओवर या दो सड़कें नहीं हैं। यह आने वाले समय में पूरे पूर्वी भारत की रफ्तार तय करने वाला प्रोजेक्ट है।
पूरा प्रोजेक्ट आखिर है क्या?
सरकार ने वाराणसी के लिए एक साथ दो एलिवेटेड रोड को मंजूरी दी है। दोनों को मिलाकर कुल लंबाई लगभग 89 किलोमीटर बनती है और इस पर करीब 25 हजार 400 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च आएगा। इसे बनाने की जिम्मेदारी NHAI को दी गई है और यह HAM मॉडल पर तैयार होगा, ताकि काम में तेजी रहे।
इसका आइडिया बहुत सीधा है। शहर के अंदर से गुजरने वाली गाड़ियों को शहर के ऊपर से निकाल दो। नदी के किनारे-किनारे खाली जमीन पर एक ऊंचा, 6 लेन का चौड़ा कॉरिडोर बना दो, ताकि बाहर से आने वाली गाड़ियाँ शहर में घुसे ही नहीं।
पहला हिस्सा – गंगा किनारे वाला कॉरिडोर
यह इस पूरे प्लान का सबसे बड़ा हिस्सा है। यह लगभग 46 किलोमीटर लंबा होगा और पूरी तरह से नया, 6 लेन का कंट्रोल्ड रोड होगा।
यह सड़क दिल्ली-कोलकाता वाले नेशनल हाईवे 19 से शुरू होगी और गंगा नदी के साथ-साथ चलती हुई वाराणसी के आउटर रिंग रोड से जाकर मिल जाएगी।
इस रास्ते पर इंजीनियरिंग के दो बड़े नमूने भी दिखेंगे। गंगा पर करीब 900 मीटर लंबा केबल वाला पुल बनेगा, जो देखने में भी शानदार होगा और एक डेढ़ किलोमीटर लंबा फुटओवर ब्रिज भी।
इसका फायदा आम आदमी को कैसे मिलेगा? आज अगर आप हाईवे से रिंग रोड तक जाते हैं तो एक घंटे से ज्यादा लग जाता है। इस कॉरिडोर के बाद यही दूरी 20 मिनट में पूरी हो जाएगी। साथ ही काशी विश्वनाथ धाम, BHU, नमो घाट, रामनगर किला जैसे टॉप जगहों पर जाने के लिए आपको शहर के अंदर की भीड़ में नहीं फंसना पड़ेगा।
दूसरा हिस्सा – वरुणा किनारे वाला कॉरिडोर, जो बिहार को जोड़ेगा
दूसरा कॉरिडोर वरुणा नदी के किनारे बनेगा। इसकी लंबाई करीब 43 किलोमीटर है।
यह सड़क उस हाईवे से शुरू होगी जो पटना, छपरा, गाजीपुर होते हुए वाराणसी आती है, यानी NH-31। वहाँ से यह वरुणा नदी के साथ-साथ होते हुए रिंग रोड तक जाएगी।
यह कॉरिडोर कई छोटे-बड़े गांवों जैसे कोटवा, पश्चिमपुर, काजीसराय से होकर गुजरेगा।
अब इसका बिहार कनेक्शन समझिए। पटना या छपरा की तरफ से आने वाली कोई भी गाड़ी सीधे इसी कॉरिडोर पर चढ़ जाएगी। उसे वाराणसी कैंट या सिटी के जाम में जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। यह कॉरिडोर सीधे काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी स्टेशन, कैंट स्टेशन, मुगलसराय जंक्शन और बाबतपुर एयरपोर्ट को भी जोड़ेगा। जो लोग ट्रेन पकड़ने के लिए बनारस आते हैं, उनके लिए समय आधा हो जाएगा। पहले जहाँ 50 मिनट लगते थे, वहाँ 20 से 25 मिनट में स्टेशन पहुंच जाएंगे।
बिहार-बंगाल तक रफ्तार कैसे खुलेगी? यहीं है असली गेम
अब आते हैं आपके टाइटल वाले सबसे अहम सवाल पर कि इसका बिहार-बंगाल से क्या लेना-देना है।
दरअसल, ये दोनों कॉरिडोर अकेले नहीं हैं। ये वाराणसी रिंग रोड के जरिये देश के तीन बड़े एक्सप्रेसवे से जुड़ रहे हैं।
पहला – गंगा एक्सप्रेसवे। जो अभी मेरठ से प्रयागराज तक है, उसका अगला हिस्सा प्रयागराज से भदोही, बनारस, गाजीपुर, बलिया तक बन रहा है। गंगा वाला एलिवेटेड कॉरिडोर सीधे उसी से जुड़ जाएगा।
दूसरा – पूर्वांचल एक्सप्रेसवे। जो लखनऊ से गाजीपुर तक जाता है। रिंग रोड पर एक लिंक बनने से वरुणा और गंगा कॉरिडोर से उतर कर आप सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर जा सकेंगे। यानी पटना से लखनऊ जाना हो तो बनारस शहर को टच करने की जरूरत ही नहीं।
तीसरा और सबसे बड़ा – वाराणसी से कोलकाता एक्सप्रेसवे। चंदौली से शुरू होने वाला 610 किलोमीटर लंबा यह 6 लेन एक्सप्रेसवे सीधे बंगाल तक जाएगा। यह भी रिंग रोड से जुड़ा है।
अब कल्पना कीजिए। पटना से एक ट्रक कोलकाता जा रहा है। वह NH-31 से वरुणा कॉरिडोर पर आएगा, फिर रिंग रोड लेगा और सीधे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे पर चला जाएगा। न वाराणसी का जाम, न एक घंटा एक्स्ट्रा। यही हाईस्पीड रास्ता है जो यूपी से बिहार और बंगाल तक खुलेगा।
बनारस और पटना के लोगों को क्या फायदा?
हर साल बनारस में डेढ़ करोड़ से ज्यादा टूरिस्ट आते हैं। उनमें बड़ा हिस्सा बिहार और बंगाल से ही आता है। इस कॉरिडोर के बाद लोकल ट्रैफिक और बाहर के ट्रैफिक में बंटवारा हो जाएगा।
रामनगर में जो नया पोर्ट और लॉजिस्टिक हब बन रहा है, उस तक माल पहुंचाना आसान हो जाएगा। इससे व्यापार तेज होगा।
और सबसे बड़ी बात, प्रदूषण और हादसों में कमी आएगी, क्योंकि भारी गाड़ियाँ शहर के बाहर-बाहर ही निकल जाएंगी।
काम की मौजूदा स्थिति
फिलहाल जमीन की नपाई का काम तेजी से चल रहा है। पहले फेज में कोटवा, अयोध्यापुर जैसे इलाकों में सर्वे हो रहा है। वरुणा कॉरिडोर के टेंडर अक्टूबर के आखिर में खुलने वाले हैं। सरकार की कोशिश है कि अगले तीन से चार साल में इस पूरे 89 किलोमीटर के नेटवर्क को पूरा कर दिया जाए।
सीधे शब्दों में कहें तो यह प्रोजेक्ट बनारस को जाम-मुक्त शहर बनाने के साथ-साथ उसे पूर्वी भारत का सबसे बड़ा ट्रैफिक हब बना देगा।