दशहरा 2026: दिल्ली में PM मोदी ने किया रावण दहन, बोले- ‘भारत का कोना-कोना राममय’, देशभर में गूंजे जय श्रीराम के नारे

Dussehra 2026 PM Modi Speech: विजयादशमी के पावन अवसर पर देशभर में दशहरे की धूम देखने को मिली। दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग शहरों तक रामलीलाओं के समापन के साथ रावण दहन किया गया। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में आयोजित दशहरा समारोह में शामिल हुए। यहां उन्होंने भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की और देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत का कोना-कोना राममय है। उनके इस संदेश ने दशहरे के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।
दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित रामलीला समारोह में पहुंचे। इस दौरान कार्यक्रम में भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया गया। इसके बाद बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन हुआ।
दशहरे के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया। रामलीला देखने के लिए पहुंचे लोगों में त्योहार को लेकर उत्साह नजर आया। इस अवसर पर भगवान श्रीराम के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के आदर्शों और विजयादशमी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने देशवासियों को इस पर्व की बधाई देते हुए कहा कि देश के गांव-गांव और शहर-शहर में रामलीला की परंपरा लोगों को श्रीराम के आदर्शों से जोड़ती है।
‘आज भारत का कोना-कोना राममय’, पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत भगवान श्रीराम के जयकारों से की। उन्होंने कहा कि आज भारत का कोना-कोना राममय है। देशभर में रामलीलाओं के आयोजन के जरिए लोग भगवान श्रीराम की कथा और उनके जीवन से जुड़ी शिक्षाओं को याद कर रहे हैं।
पीएम मोदी के संदेश का मुख्य भाव सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर विजय रहा। उन्होंने रामलीला की परंपरा को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विरासत बताते हुए कहा कि यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखती है।
दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह लोगों को अपने जीवन में सही रास्ता चुनने की प्रेरणा भी देता है। भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों से जुड़ा है। यही वजह है कि रामकथा आज भी लोगों के जीवन में विशेष स्थान रखती है।
पीएम मोदी ने बताया, सिर्फ त्योहार नहीं है दशहरा
विजयादशमी को आमतौर पर बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इस पर्व का संदेश केवल रावण के पुतले को जलाने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ उन बुराइयों को पहचानना भी है, जो व्यक्ति और समाज को कमजोर करती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में रामलीला की परंपरा को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़कर देखा। भगवान श्रीराम की कथा लोगों को यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
दशहरे का पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि ताकत और ज्ञान के साथ विनम्रता, विवेक और अच्छे आचरण का होना जरूरी है। रावण को विद्वान और शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन उसका अहंकार और गलत निर्णय उसके पतन का कारण बने। यही कारण है कि रावण दहन को आज भी अहंकार और अन्याय के अंत का प्रतीक माना जाता है।
देशभर में धूमधाम से मनाई गई विजयादशमी
दिल्ली ही नहीं, देश के कई हिस्सों में दशहरे का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। अलग-अलग शहरों में रामलीलाओं का मंचन हुआ और शाम के समय रावण, मेघनाद तथा कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया।
राजधानी दिल्ली में भी अलग-अलग रामलीला मैदानों में बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचे। पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन के अलावा द्वारका और लाल किला मैदान सहित कई स्थानों पर दशहरा समारोह आयोजित किए गए।
इन आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। रामलीला के कलाकारों ने भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोगों ने इन कार्यक्रमों में भाग लिया।
रावण दहन के समय आसमान में उठती आग की लपटें और लोगों के जयकारे दशहरे के उत्साह को और बढ़ा देते हैं। हालांकि, इस त्योहार का असली संदेश पुतले के दहन से आगे बढ़कर अपने भीतर की बुराइयों को दूर करना है।
रावण दहन के पीछे क्या है धार्मिक महत्व?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से जुड़ा है। रामायण की कथा में रावण द्वारा माता सीता का हरण किए जाने के बाद भगवान श्रीराम लंका पहुंचते हैं और युद्ध में रावण का वध करते हैं। इस घटना को अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की जीत के रूप में देखा जाता है।
इसी मान्यता के आधार पर हर साल दशहरे पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। कई स्थानों पर मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी जलाए जाते हैं। यह परंपरा लोगों को याद दिलाती है कि गलत रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसके कर्मों का परिणाम अंततः सामने आता है।
हालांकि, दशहरे का महत्व केवल रामायण की इस घटना तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों में यह पर्व मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जुड़ा हुआ है। इस तरह विजयादशमी भारत की अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में विजय, साहस और धर्म की स्थापना का संदेश देती है।
भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी क्यों हैं प्रासंगिक?
आज के समय में भगवान श्रीराम के आदर्शों को केवल धार्मिक आस्था के नजरिए से ही नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन के संदर्भ में भी देखा जाता है। मर्यादा, जिम्मेदारी, परिवार के प्रति कर्तव्य, वचन का पालन और कठिन समय में धैर्य बनाए रखना उनके चरित्र से जुड़े प्रमुख मूल्य हैं।
इन मूल्यों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। परिवार हो या समाज, आपसी सम्मान, ईमानदारी और जिम्मेदारी की भूमिका हर जगह महत्वपूर्ण है। दशहरा लोगों को यह सोचने का अवसर देता है कि वे अपने व्यवहार में किन बदलावों के जरिए बेहतर समाज बनाने में योगदान दे सकते हैं।
रावण दहन के साथ यदि लोग क्रोध, अहंकार, लालच, अन्याय और नफरत जैसी बुराइयों को छोड़ने का संकल्प लें, तो इस पर्व का संदेश और भी सार्थक हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी के आईपी एक्सटेंशन में दिए गए संबोधन में भी भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का महत्व प्रमुख रूप से सामने आया। उनका ‘कोना-कोना राममय’ वाला संदेश इसी व्यापक धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को दर्शाता है।
दशहरा देता है नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का संदेश
विजयादशमी का पर्व हमें यह समझने का अवसर देता है कि जीवन में जीत केवल किसी प्रतिद्वंद्वी को हराने से नहीं मिलती। कई बार अपने भीतर की कमजोरियों पर विजय पाना भी उतना ही जरूरी होता है।
यदि व्यक्ति अपने अहंकार को नियंत्रित करे, दूसरों के प्रति सम्मान रखे और कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ता चुने, तो वह दशहरे के संदेश को अपने जीवन में उतार सकता है। इसी तरह समाज में नफरत के बजाय सहयोग और अन्याय के बजाय न्याय को महत्व देना इस पर्व की भावना को मजबूत करता है।
देशभर में आयोजित रामलीलाएं और रावण दहन की परंपरा हर साल लोगों को इसी संदेश से जोड़ती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में शामिल होना और विजयादशमी की शुभकामनाएं देना भी इस अवसर की प्रमुख खबरों में शामिल रहा।
कुल मिलाकर, दशहरा केवल रावण के पुतले को जलाने का दिन नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी के ‘भारत का कोना-कोना राममय’ संदेश के बीच देशभर में मनाई गई विजयादशमी ने एक बार फिर सत्य, मर्यादा और अच्छाई की जीत का महत्व सामने रखा।