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योगी सरकार की बड़ी पहल! मेरठ में ₹200 करोड़ की रेयर अर्थ रिफाइनरी, 1,300 लोगों को रोजगार की उम्मीद

By Aarti Mishra · Published 20 Oct 2026, 22:23 · Updated 20 Oct 2026, 22:23

योगी सरकार मेरठ रिफाइनरी परियोजना 200 करोड़ निवेश और रोजगार

उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसरों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार औद्योगिक विकास पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में मेरठ में करीब 200 करोड़ रुपये के निवेश से क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ रिफाइनरी स्थापित करने की योजना सामने आई है। इस परियोजना से लगभग 300 लोगों को सीधे और 1,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। अगर यह योजना निर्धारित तरीके से आगे बढ़ती है, तो मेरठ के औद्योगिक विकास के साथ-साथ प्रदेश की तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल सकती है।

इस परियोजना के लिए डीप-टेक स्टार्टअप Circulogy Cleantech Private Limited ने उत्तर प्रदेश की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी Invest UP के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। प्रस्तावित रिफाइनरी में इस्तेमाल हो चुकी लीथियम-आयन बैटरियों और अन्य स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा प्राप्त करने पर जोर रहेगा। इससे एक तरफ औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ संसाधनों के पुनः उपयोग और कचरा प्रबंधन को भी मदद मिलेगी।

योगी आदित्यनाथ की सरकार में निवेश और रोजगार पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक राज्य बनाने और औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने पर जोर देती रही है। मेरठ में प्रस्तावित रेयर अर्थ रिफाइनरी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना बन सकती है।

इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि आज उद्योग केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक तथा महत्वपूर्ण खनिजों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में इन खनिजों की प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग से जुड़ी इकाइयां प्रदेश में नए औद्योगिक अवसर पैदा कर सकती हैं।

हालांकि, परियोजना की घोषणा और उसका वास्तविक संचालन अलग-अलग चरण हैं। निवेश, निर्माण, आवश्यक मंजूरियों और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े अगले कदम पूरे होने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

मेरठ में 200 करोड़ रुपये का निवेश क्यों है खास?

मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और कारोबारी केंद्र है। यहां प्रस्तावित 200 करोड़ रुपये की परियोजना से आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों के विकास की संभावना बन सकती है।

रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल से जुड़ी रिफाइनरी का काम महत्वपूर्ण खनिजों को उपयोगी रूप में प्राप्त करना और उनका प्रसंस्करण करना होगा। कंपनी की योजना इस्तेमाल हो चुकी लीथियम-आयन बैटरियों से लीथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे खनिजों को रिकवर करने पर केंद्रित है।

इन खनिजों का उपयोग बैटरी और ऊर्जा भंडारण से जुड़े उद्योगों में किया जाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य आधुनिक उपकरणों का बाजार बढ़ने के साथ इनकी उपयोगिता भी बढ़ रही है।

योगी सरकार के लिए ऐसी परियोजनाएं इसलिए अहम हो सकती हैं, क्योंकि इनसे प्रदेश में निवेश के नए रास्ते खुलने और औद्योगिक क्षेत्र में विविधता आने की संभावना रहती है। साथ ही, तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं।

1,300 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद

मेरठ की इस प्रस्तावित रिफाइनरी से रोजगार को लेकर बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं। अनुमान के अनुसार, परियोजना से करीब 300 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और 1,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है।

प्रत्यक्ष रोजगार में रिफाइनरी के संचालन, तकनीकी कामकाज, गुणवत्ता जांच, मशीनों के रखरखाव, प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े पद शामिल हो सकते हैं।

अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर परिवहन, लॉजिस्टिक्स, मशीनों की मरम्मत, सुरक्षा, कच्चे माल की आपूर्ति और अन्य सहायक सेवाओं में बन सकते हैं। किसी औद्योगिक इकाई के आसपास कई छोटे कारोबारी और सेवा प्रदाता भी काम से जुड़ते हैं।

इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलने की संभावना है। हालांकि, भर्ती कब शुरू होगी, किन पदों पर नियुक्तियां होंगी और उम्मीदवारों की योग्यता क्या होगी, इसकी जानकारी संबंधित कंपनी की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी।

पुरानी बैटरियों से निकाले जाएंगे जरूरी खनिज

इस परियोजना की एक अहम विशेषता बैटरी रीसाइक्लिंग है। मोबाइल फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लीथियम-आयन बैटरियां एक निश्चित अवधि के बाद बदलनी पड़ती हैं। पुरानी बैटरियों का सही तरीके से प्रसंस्करण करने पर उनमें मौजूद कुछ उपयोगी खनिजों को दोबारा प्राप्त किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया से प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव होता है और इस्तेमाल के बाद फेंकी जाने वाली बैटरियों का सुरक्षित प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।

भारत के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति वैश्विक बाजार और दूसरे देशों पर निर्भर हो सकती है। घरेलू स्तर पर रीसाइक्लिंग की क्षमता बढ़ने से उद्योगों को कुछ अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध हो सकती है। हालांकि, इससे आयात पर निर्भरता कितनी कम होगी, यह उत्पादन क्षमता और वास्तविक परिणामों पर निर्भर करेगा।

योगी सरकार की निवेश नीति को मिल सकता है बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में नई औद्योगिक परियोजनाओं के आने से निवेश के साथ तकनीकी कौशल और सहायक उद्योगों के विकास की संभावनाएं भी बनती हैं। मेरठ की प्रस्तावित रिफाइनरी इसी तरह की आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर सकती है।

Invest UP जैसी एजेंसियां निवेशकों को राज्य में परियोजनाएं स्थापित करने की प्रक्रिया में सहायता देने का काम करती हैं। इस तरह की सहायता में लागू नियमों के अनुसार आवश्यक मंजूरियों और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है।

अगर परियोजना समय पर आगे बढ़ती है, तो इससे मेरठ में तकनीक आधारित उद्योगों की मौजूदगी मजबूत हो सकती है। स्थानीय युवाओं को भी औद्योगिक प्रशिक्षण, मशीन संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यावरण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिल सकता है।

क्या मेरठ को मिलेगी नई औद्योगिक पहचान?

मेरठ को पारंपरिक उद्योगों के लिए जाना जाता है। रेयर अर्थ रिफाइनरी जैसी परियोजना शहर को आधुनिक खनिज प्रसंस्करण और बैटरी रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की क्षमता रखती है।

लेकिन इसके लिए परियोजना का सफलतापूर्वक स्थापित होना, पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता और कच्चे माल की नियमित आपूर्ति जरूरी होगी।

इसलिए फिलहाल इसे रोजगार और औद्योगिक विकास की संभावनाओं वाली प्रस्तावित परियोजना के रूप में देखना चाहिए। आने वाले समय में निर्माण, संचालन और भर्ती को लेकर होने वाली घोषणाएं इसकी वास्तविक प्रगति का संकेत देंगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के औद्योगिक विकास और निवेश संबंधी प्रयासों के बीच मेरठ में प्रस्तावित 200 करोड़ रुपये की रेयर अर्थ रिफाइनरी महत्वपूर्ण परियोजना साबित हो सकती है। इससे करीब 300 प्रत्यक्ष और 1,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।

बैटरी रीसाइक्लिंग और क्रिटिकल मिनरल के प्रसंस्करण से जुड़ी यह परियोजना उत्तर प्रदेश में आधुनिक उद्योगों के विस्तार की संभावना भी पैदा करती है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि योजना कब धरातल पर उतरती है और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर कब उपलब्ध होते हैं।