डिग्री है, लेकिन नौकरी अपनी पढ़ाई की नहीं: भारत के युवाओं के सामने क्यों बढ़ रही है स्किल और रोजगार की दूरी
भारत में पढ़ाई को हमेशा बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी माना गया है। परिवार अपने बच्चों की शिक्षा पर वर्षों तक पैसा और समय लगाते हैं। उम्मीद रहती है कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद एक अच्छी नौकरी मिलेगी और मेहनत का परिणाम दिखाई देगा। लेकिन आज रोजगार बाजार की तस्वीर कुछ ऐसी…
भारत में पढ़ाई को हमेशा बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी माना गया है। परिवार अपने बच्चों की शिक्षा पर वर्षों तक पैसा और समय लगाते हैं। उम्मीद रहती है कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद एक अच्छी नौकरी मिलेगी और मेहनत का परिणाम दिखाई देगा। लेकिन आज रोजगार बाजार की तस्वीर कुछ ऐसी है जो इस पूरी सोच पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर करती है।
NITI Aayog की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि केवल 8.25 प्रतिशत graduates ही ऐसी नौकरियों में काम कर रहे हैं जो उनकी qualification के अनुरूप हैं। यह आंकड़ा NITI Aayog की Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047 रिपोर्ट में Economic Survey 2024–25 के हवाले से दिया गया है।
पहली नजर में यह सिर्फ एक प्रतिशत दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे भारत की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार बाजार के बीच मौजूद एक बड़ी समस्या छिपी है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि युवाओं को नौकरी मिल रही है या नहीं। सवाल यह भी है कि जिस विषय की पढ़ाई उन्होंने की, क्या उन्हें उसी ज्ञान और योग्यता का इस्तेमाल करने वाला काम मिल रहा है?
यहीं से भारत के सामने मौजूद skill mismatch की असली कहानी शुरू होती है।
8.25 प्रतिशत का आंकड़ा वास्तव में क्या बताता है
सबसे पहले इस आंकड़े को सही तरीके से समझना जरूरी है। 8.25 प्रतिशत का मतलब यह नहीं है कि भारत के सिर्फ 8.25 प्रतिशत graduates के पास नौकरी है।
इसका अर्थ यह है कि इतनी ही हिस्सेदारी ऐसी नौकरियों में है जो उनकी qualification से aligned हैं। यानी कई graduate रोजगार में हो सकते हैं, लेकिन उनका काम उनकी पढ़ाई से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है। NITI Aayog ने इसी gap को higher education और labour market के बीच महत्वपूर्ण disconnect के रूप में रेखांकित किया है।
मान लीजिए किसी छात्र ने तीन साल B.Com की पढ़ाई की और बाद में उसे ऐसी नौकरी करनी पड़ी जहां उसकी Commerce की पढ़ाई का बहुत कम इस्तेमाल होता है। वह व्यक्ति बेरोजगार नहीं है, लेकिन उसकी education और employment के बीच एक mismatch जरूर है।
यही वजह है कि रोजगार की स्थिति को समझने के लिए केवल नौकरी की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। नौकरी की quality और qualification के साथ उसका संबंध भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
क्या सिर्फ डिग्री लेने से नौकरी मिल सकती है
आज का रोजगार बाजार पहले की तुलना में काफी तेजी से बदल रहा है। कंपनियों को ऐसे उम्मीदवार चाहिए जो सिर्फ किसी विषय की theoretical जानकारी न रखते हों, बल्कि उस जानकारी को काम में भी इस्तेमाल कर सकें।
यहीं पर कई graduates को परेशानी होती है।
NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार भारत के higher और technical education system में जो पढ़ाया जाता है और labour market में जिस तरह के skills की जरूरत है, उनके बीच disconnect मौजूद है। रिपोर्ट curriculum को बदलती industry requirements के अनुरूप बनाने और education को employability से जोड़ने की जरूरत पर जोर देती है।
आज किसी graduate से communication, digital tools, problem solving, teamwork और role-specific knowledge जैसी क्षमताओं की अपेक्षा की जा सकती है। केवल परीक्षा पास करके degree हासिल कर लेना इन सभी क्षमताओं की गारंटी नहीं देता।
डिग्री आपकी qualification बता सकती है, लेकिन skill यह साबित करती है कि आप उस qualification का इस्तेमाल कर क्या सकते हैं।
Graduate unemployment भी चिंता का विषय
Qualification mismatch के साथ educated unemployment भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
NITI Aayog की रिपोर्ट में graduates के बीच unemployment rate 13 प्रतिशत बताया गया है। Graduate women के मामले में यह आंकड़ा 20.4 प्रतिशत तक पहुंचता है, जबकि उसी संदर्भ में national unemployment rate 3.2 प्रतिशत बताया गया है।
इन आंकड़ों से एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है।
अगर कोई युवा ज्यादा पढ़ाई करने के बाद भी रोजगार हासिल नहीं कर पा रहा है, तो क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था उसे उस तरह के रोजगार के लिए तैयार कर रही है जिसकी बाजार में मांग है?
इस सवाल का जवाब सिर्फ कॉलेजों को दोष देकर नहीं निकाला जा सकता। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें course selection, practical training, industry exposure, career guidance और रोजगार के बदलते स्वरूप सभी शामिल हैं।
BA, B.Sc और B.Com की पढ़ाई पर भी क्यों हो रही है चर्चा
NITI Aayog ने generic degree programmes को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार undergraduate programmes में लगभग 3.4 करोड़ विद्यार्थी enrolled हैं। इनमें करीब 1.13 करोड़ विद्यार्थी BA में हैं और BA, B.Sc तथा B.Com में combined enrolment 2 करोड़ से ज्यादा है।
इसका मतलब यह नहीं है कि BA, B.Sc या B.Com जैसी degrees बेकार हैं। समस्या degree के नाम में नहीं बल्कि degree और career pathway के बीच connection में है।
अगर विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई के दौरान यह पता ही न हो कि उसके विषय से जुड़े रोजगार कौन से हैं, उन नौकरियों के लिए किन skills की जरूरत है और वह skills कहां से हासिल की जा सकती हैं, तो degree पूरी होने के बाद अचानक job market में उतरना मुश्किल हो जाता है।
युवाओं को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि कौन सा course करना है। उन्हें यह भी समझाना होगा कि उस course के बाद career के कौन कौन से रास्ते खुलते हैं।
कॉलेज की पढ़ाई और असली काम के बीच का अंतर
कई युवाओं की शिकायत होती है कि कॉलेज में जो पढ़ाया गया, वह नौकरी के दौरान सीधे काम नहीं आया। यह अनुभव पूरी तरह असामान्य नहीं है।
Theory और practical work दोनों की अपनी जगह है। समस्या तब पैदा होती है जब विद्यार्थी को दोनों के बीच संबंध समझने का अवसर ही न मिले।
NITI Aayog ने industry exposure, practical learning, apprenticeships और job-linked programmes को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
अगर विद्यार्थी कॉलेज के दौरान किसी कंपनी के project पर काम करता है, internship करता है या apprenticeship के माध्यम से वास्तविक workplace देखता है, तो उसे नौकरी की अपेक्षाओं को समझने में काफी मदद मिल सकती है।
यही experience एक fresh graduate को दूसरे candidates से अलग भी कर सकता है।
सरकारी नौकरी की तरफ युवाओं का झुकाव
भारत में सरकारी नौकरी के प्रति युवाओं का आकर्षण लंबे समय से रहा है। इसकी वजह भी समझ में आती है। नौकरी की stability, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की सुरक्षा इसे आकर्षक बनाती है।
लेकिन समस्या तब दिखाई देती है जब सीमित सरकारी पदों के लिए बहुत बड़ी संख्या में युवा अपनी पढ़ाई और career के कई साल केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगा देते हैं।
NITI Aayog की रिपोर्ट में सरकारी नौकरी की मांग का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच लगभग 55,000 पदों के लिए 1.86 करोड़ applications आए।
यह आंकड़ा बताता है कि सरकारी रोजगार की मांग कितनी बड़ी है।
इसका समाधान युवाओं को सरकारी नौकरी से दूर करना नहीं है। असली जरूरत यह है कि private sector, entrepreneurship, apprenticeship और skill-based employment के रास्ते भी इतने मजबूत हों कि युवा उन्हें भरोसेमंद career option के रूप में देख सकें।
महिलाओं के लिए रोजगार की चुनौती और बड़ी
Graduate women के लिए 20.4 प्रतिशत unemployment का आंकड़ा विशेष ध्यान देने योग्य है।
महिलाओं के लिए employment का सवाल केवल qualification या skill का नहीं है। घर की जिम्मेदारियां, सुरक्षित transport, childcare, training centre की दूरी और काम के समय की flexibility भी उनके employment decisions को प्रभावित कर सकती है।
NITI Aayog की रिपोर्ट में भी महिलाओं के skilling और economic participation के सामने ऐसे access barriers का उल्लेख किया गया है।
इसलिए महिलाओं को सिर्फ training certificate देना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी यह है कि training के बाद उनके लिए वास्तविक और टिकाऊ livelihood opportunities भी उपलब्ध हों।
क्या skill training ही पूरी समस्या का समाधान है
यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि हर graduate को केवल एक skill course करा देने से समस्या खत्म हो जाएगी।
Skill तभी उपयोगी है जब उसका connection किसी वास्तविक opportunity से हो।
अगर किसी व्यक्ति ने training तो पूरी कर ली, लेकिन उसे job market की जानकारी नहीं है, employer तक पहुंच नहीं है या उसकी skill की स्थानीय स्तर पर मांग नहीं है, तो certificate उसके लिए बहुत ज्यादा मददगार साबित नहीं होगा।
इसीलिए NITI Aayog ने skilling programmes को केवल enrolment और course completion के आधार पर देखने के बजाय placement, career progression और income जैसे outcomes पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताई है।
यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है।
किसी programme की सफलता इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि उसमें कितने लोगों ने admission लिया। असली सवाल होना चाहिए कि training के बाद कितने लोगों को बेहतर रोजगार मिला और उनकी income या career prospects में कितना सुधार हुआ।
युवाओं को अब किस तरह की शिक्षा चाहिए
आज के समय में एक मजबूत career के लिए Degree + Skill + Practical Experience का combination ज्यादा महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
कॉलेजों में internships को बढ़ावा देना, industry projects बढ़ाना, apprenticeships के अवसर उपलब्ध कराना और विद्यार्थियों को career counselling देना इस दिशा में मदद कर सकता है।
इसके अलावा students को अपने core subject के साथ कुछ complementary skills भी सीखनी चाहिए।
उदाहरण के लिए Commerce student accounting software, taxation या data tools सीख सकता है। Science student अपने subject के साथ digital या applied skills जोड़ सकता है। Arts student communication, content, research, digital marketing या अन्य रोजगार आधारित skills विकसित कर सकता है।
इसका उद्देश्य degree को बदलना नहीं बल्कि degree की value को practical skills के साथ बढ़ाना होना चाहिए।
सरकार, कॉलेज और कंपनियों को साथ आना होगा
भारत की employment challenge का समाधान किसी एक संस्था के पास नहीं है।
सरकार को ऐसी policies बनानी होंगी जो education और employment के बीच बेहतर connection तैयार करें। Colleges को curriculum और teaching methods को बदलती जरूरतों के साथ update करना होगा। वहीं कंपनियों को भी students को internships, apprenticeships और real-world projects के अवसर देने होंगे।
Education system और industry के बीच जितनी मजबूत partnership होगी, graduates के लिए job transition उतना ही आसान हो सकता है।
NITI Aayog ने भी industry-backed programmes, apprenticeships और flexible learning pathways जैसे उपायों को महत्वपूर्ण माना है। रिपोर्ट में Digital Skills Passport और National Credit Framework जैसे approaches पर भी चर्चा की गई है।
भारत के सामने चुनौती भी है और बड़ा अवसर भी
भारत के पास दुनिया की बड़ी युवा आबादी है। यह देश के लिए चुनौती भी है और बहुत बड़ा अवसर भी।
अगर युवाओं को सही शिक्षा, सही skill और सही समय पर रोजगार का अवसर मिलता है तो यही युवा देश की economic growth को मजबूत कर सकते हैं।
लेकिन अगर लाखों युवा degree पूरी करने के बाद भी अपनी qualification से unrelated jobs करने को मजबूर होते हैं या लंबे समय तक रोजगार की तलाश में रहते हैं, तो उनकी क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता।
इसलिए भारत की अगली बड़ी जरूरत केवल ज्यादा graduates तैयार करना नहीं, बल्कि ज्यादा employable graduates तैयार करना है।
आगे की राह रोजगार से ज्यादा employability की होनी चाहिए
8.25 प्रतिशत का आंकड़ा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम education की सफलता को केवल degrees की संख्या से माप सकते हैं।
शायद अब जवाब बदलने का समय है।
किसी विद्यार्थी ने कितने marks हासिल किए, कितने students ने graduation किया या कितने लोगों ने skill training पूरी की, ये आंकड़े अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इनके साथ यह देखना भी जरूरी है कि कितने युवा अपनी पढ़ाई और skills के अनुरूप सम्मानजनक रोजगार हासिल कर पाए।
भारत अगर विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है तो education, skilling और employment को अलग अलग हिस्सों में नहीं देखा जा सकता। इन तीनों को एक ही career journey के रूप में देखना होगा।
आज की जरूरत ऐसी शिक्षा व्यवस्था की है जो विद्यार्थी को केवल डिग्री न दे, बल्कि उसे यह confidence भी दे कि वह अपनी पढ़ाई को वास्तविक काम, आय और career growth में बदल सकता है।
NITI Aayog की रिपोर्ट का 8.25 प्रतिशत वाला आंकड़ा इसी बड़े सवाल की ओर ध्यान खींचता है। चुनौती सिर्फ नौकरियां पैदा करने की नहीं है। चुनौती यह भी है कि भारत के युवाओं की शिक्षा, उनकी skills और उपलब्ध नौकरियों के बीच सही तालमेल कैसे बनाया जाए।
यही तालमेल आने वाले वर्षों में भारत की युवा शक्ति को वास्तविक आर्थिक ताकत में बदलने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।
