DMart ने बदली ऑनलाइन रणनीति, Quick Commerce के दौर में अब मुनाफे पर फोकस
भारत में ऑनलाइन किराना बाजार तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक जहां लोग सामान खरीदने के लिए सुपरमार्केट या स्थानीय दुकानों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब मोबाइल पर कुछ क्लिक करते ही घर बैठे सामान पहुंच रहा है। खासकर Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों ने ग्राहकों की…
भारत में ऑनलाइन किराना बाजार तेजी से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक जहां लोग सामान खरीदने के लिए सुपरमार्केट या स्थानीय दुकानों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब मोबाइल पर कुछ क्लिक करते ही घर बैठे सामान पहुंच रहा है। खासकर Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों ने ग्राहकों की खरीदारी की आदतों को काफी हद तक बदल दिया है।
इस बदलते बाजार के बीच देश की बड़ी रिटेल कंपनियों में शामिल DMart ने अपनी ऑनलाइन रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब हर शहर में तेजी से विस्तार करने के बजाय चुनिंदा बाजारों पर ध्यान दे रही है। उसका फोकस तेज डिलीवरी की दौड़ में शामिल होने के बजाय कीमत, बड़े ऑर्डर और कारोबार को लंबे समय में मुनाफे वाला बनाने पर है।
DMart Ready का बदला हुआ प्लान क्या है?
DMart की ऑनलाइन सेवा DMart Ready के लिए कंपनी ने अपनी रणनीति को काफी सीमित और केंद्रित किया है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, DMart Ready अब 11 प्रमुख शहरों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। इससे पहले कंपनी का ऑनलाइन कारोबार ज्यादा शहरों में मौजूद था, लेकिन कमजोर प्रदर्शन वाले बाजारों से बाहर निकलने का फैसला किया गया।
पहली नजर में यह फैसला पीछे हटने जैसा लग सकता है, लेकिन कंपनी की रणनीति कुछ अलग है। DMart का मानना है कि सिर्फ ज्यादा शहरों में मौजूदगी बढ़ाने से कारोबार सफल नहीं होता। अगर हर ऑर्डर पर डिलीवरी और ऑपरेशन की लागत ज्यादा हो रही है, तो बिक्री बढ़ने के बावजूद मुनाफा नहीं बनता।
इसी वजह से कंपनी अब उन बाजारों पर ध्यान देना चाहती है जहां उसके ऑनलाइन कारोबार में बेहतर संभावनाएं दिखाई देती हैं।
Quick Commerce से अलग रास्ता चुन रहा है DMart
भारत में क्विक कॉमर्स का सबसे बड़ा आकर्षण है—तेज डिलीवरी। ग्राहक कुछ ही मिनटों में दूध, ब्रेड, स्नैक्स, फल-सब्जियां या रोजमर्रा की दूसरी चीजें घर मंगाना चाहता है।
लेकिन DMart ने इस दौड़ में सीधे उतरने का फैसला नहीं किया है।
कंपनी का मॉडल थोड़ा अलग है। DMart Ready का फोकस बड़े ऑर्डर और कम कीमत पर है। यानी अगर किसी ग्राहक को महीने भर का राशन या घर का ज्यादा सामान खरीदना है, तो वह कीमत को ज्यादा महत्व दे सकता है। ऐसे ग्राहक के लिए हर सामान 10 मिनट में मिलना जरूरी नहीं है।
यही वह जगह है जहां DMart अपनी ताकत देखता है।
कंपनी का पारंपरिक कारोबार भी कम कीमत और बड़े बास्केट पर आधारित रहा है। इसलिए ऑनलाइन कारोबार में भी वह इसी मॉडल को आगे बढ़ाना चाहती है।
ऑनलाइन कारोबार में बढ़ी बिक्री, लेकिन घाटा भी बढ़ा
DMart Ready के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ऑनलाइन कारोबार बढ़ने के बावजूद इसे मुनाफे में लाना आसान नहीं रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में DMart Ready का राजस्व करीब ₹4,094 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत ज्यादा था। लेकिन इसी दौरान ऑनलाइन कारोबार का घाटा बढ़कर करीब ₹307 करोड़ पहुंच गया।
यानी ग्राहक और बिक्री दोनों बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें संभालने की लागत भी काफी है।
ऑनलाइन किराना कारोबार में केवल सामान बेचना ही खर्चीला नहीं होता। इसके साथ वेयरहाउस, पैकेजिंग, कर्मचारियों, डिलीवरी, टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स की लागत भी जुड़ी होती है। खासकर छोटी कीमत वाले ऑर्डर में डिलीवरी लागत मुनाफे को प्रभावित कर सकती है।
यही वजह है कि DMart अब विस्तार से ज्यादा profitability यानी मुनाफे पर ध्यान दे रहा है।
कंपनी ने ₹500 करोड़ तक निवेश को दी मंजूरी
DMart की पैरेंट कंपनी Avenue Supermarts ने अपने ऑनलाइन किराना कारोबार को मजबूत करने के लिए Avenue E-Commerce में ₹500 करोड़ तक अतिरिक्त निवेश की मंजूरी दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब DMart Ready अपने कारोबार को चुनिंदा शहरों में केंद्रित कर रहा है।
इससे साफ है कि कंपनी ऑनलाइन कारोबार से पूरी तरह पीछे हटने के मूड में नहीं है। बल्कि वह इसे एक नियंत्रित और टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है।
यानी रणनीति यह नहीं है कि ऑनलाइन कारोबार बंद किया जाए, बल्कि यह देखा जाए कि किन बाजारों में DMart Ready वास्तव में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।
क्या 10 मिनट की डिलीवरी से अलग मॉडल काम करेगा?
यह सवाल आने वाले समय में काफी महत्वपूर्ण होगा।
Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी कंपनियों ने लोगों को बहुत तेज डिलीवरी की आदत डाल दी है। अगर किसी ग्राहक को अचानक दूध, दही या कोई छोटा सामान चाहिए तो वह कई घंटे इंतजार करने के बजाय कुछ मिनटों में डिलीवरी लेना पसंद करता है।
लेकिन हर खरीदारी ऐसी नहीं होती।
महीने का राशन, बड़ी grocery shopping या ज्यादा मात्रा में सामान खरीदने वाले ग्राहक कीमत और कुल बिल को ज्यादा महत्व दे सकते हैं। ऐसे ऑर्डर में थोड़ी देर से डिलीवरी भी स्वीकार्य हो सकती है।
यही बाजार DMart के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालिया विश्लेषणों में भी यह बात सामने आई है कि क्विक कॉमर्स और scheduled delivery अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं। छोटे और तुरंत जरूरी सामान के लिए तेज डिलीवरी उपयोगी है, जबकि बड़े और planned orders में scheduled delivery का फायदा हो सकता है।
DMart के लिए चुनौती भी कम नहीं
हालांकि DMart के पास मजबूत ब्रांड और कम कीमत वाली खरीदारी का मॉडल है, लेकिन ऑनलाइन बाजार में मुकाबला आसान नहीं है।
क्विक कॉमर्स कंपनियां लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत convenience और speed है। वहीं ग्राहकों की उम्मीदें भी बदल रही हैं। आज का ग्राहक सिर्फ कम कीमत नहीं देखता, बल्कि यह भी देखता है कि सामान कितनी जल्दी और कितनी आसानी से घर पहुंचेगा।
DMart के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपनी कम कीमत वाली पहचान को बनाए रखते हुए ऑनलाइन ग्राहक को पर्याप्त सुविधा दे पाए।
दूसरी तरफ, कंपनी को अपने ऑनलाइन कारोबार की लागत पर भी नियंत्रण रखना होगा।
क्या DMart की रणनीति सफल होगी?
अभी इसका जवाब देना जल्दबाजी होगी। लेकिन कंपनी का फैसला यह जरूर दिखाता है कि भारत का रिटेल बाजार एक नए दौर में पहुंच चुका है।
एक तरफ क्विक कॉमर्स कंपनियां तेजी और सुविधा के दम पर बाजार बढ़ा रही हैं। दूसरी तरफ DMart जैसे पारंपरिक रिटेल खिलाड़ी कीमत और बड़े ऑर्डर के अपने पुराने मजबूत मॉडल को ऑनलाइन दुनिया में ढालने की कोशिश कर रहे हैं।
DMart का रास्ता शायद सबसे तेज नहीं है, लेकिन कंपनी इसे ज्यादा टिकाऊ बनाने की कोशिश कर रही है।
आने वाले महीनों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि DMart Ready अपने चुने हुए 11 शहरों में बिक्री बढ़ाने के साथ घाटा कितना कम कर पाता है। अगर कंपनी ऑनलाइन कारोबार को धीरे-धीरे मुनाफे के करीब ले आती है, तो यह मॉडल उन ग्राहकों के लिए मजबूत विकल्प बन सकता है जो तेज डिलीवरी से ज्यादा कम कीमत और बड़ी बचत को महत्व देते हैं।
भारत का ऑनलाइन किराना बाजार इसलिए सिर्फ 10 मिनट की डिलीवरी की कहानी नहीं है। असली मुकाबला अब इस बात का है कि कौन कंपनी ग्राहक को बेहतर कीमत, सुविधा और मुनाफे के बीच सही संतुलन दे पाती है। DMart ने फिलहाल अपनी तरफ से साफ कर दिया है कि वह इस दौड़ में सबसे तेज बनने के बजाय लंबी दौड़ के लिए टिकाऊ बिजनेस मॉडल तैयार करना चाहता है।
