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केजरीवाल को नहीं मिली कोर्ट से जमानत, तो 150 वकीलों ने डी वाई चंद्रचूड़ को लिखा पत्र

By Khabar Bite · Published 05 Jul 2024, 13:03 · Updated 05 Jul 2024, 13:03

रीवाल को नहीं मिली कोर्ट से जमानत, तो 150 वकीलों ने डी वाई चंद्रचूड़ को लिखा पत्र

दिल्ली उच्च न्यायालय और जिला अदालतों में “ अभूतपूर्व प्रक्रियाओं ” पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए, 150 वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 4 जुलाई, 2024 को भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखा है।

पत्र में मुख्य रूप से न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन के खिलाफ हितों के टकराव का मुद्दा उठाया गया, जिन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत पर स्थगन आदेश जारी किया था । वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने अपने पत्र में जस्टिस सुधीर कुमार जैन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने बताया कि जस्टिस जैन के भाई अनुराग जैन प्रवर्तन निदेशालय( ईडी) के वकील हैं । पत्र में लिखा है, जस्टिस सुधीर कुमार जैन को इस मामले से खुद को अलग कर लेना चाहिए था, क्योंकि उनके अपने भाई ईडी के वकील हैं । यह स्पष्ट रूप से हितों का टकराव है, जिसके बारे में जस्टिस जैन ने कभी नहीं कहा ।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी दावा किया कि न्यायमूर्ति जैन ने केजरीवाल की जमानत के खिलाफ ईडी की चुनौती को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी और मूल जमानत आदेश को आधिकारिक रूप से अपलोड किए बिना ही जमानत बांड के निष्पादन पर स्थगन आदेश जारी कर दिया ।वकीलों ने कहा की भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया ।

प्रतिनिधिमंडल ने राउज़ एवेन्यू कोर्ट के जिला न्यायाधीश द्वारा जारी एक आंतरिक प्रशासनिक आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें गर्मी की छुट्टियों के दौरान संचालित अवकाश अदालतों को अंतिम आदेश जारी करना बंद करने और केवल नियमित अदालतों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया था ।

यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश न्याय बिंदु द्वारा श्री केजरीवाल को अवकाश अदालत से जमानत दिए जाने के बाद आया था । वकीलों ने इस आदेश को अवकाश अदालतों के उद्देश्य को कमज़ोर करने वाला बताया ।

ऐसा आदेश न केवल प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक रूप से अनियमित है, बल्कि न्याय का भी मखौल है । वकीलों ने कहा कि अवकाश अदालतों का पूरा उद्देश्य गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा करना है ।

प्रतिनिधिमंडल ने आदेश के समय पर भी सवाल उठाए । पत्र में लिखा गया है, अगर ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी किया जाता है, तो यह अवकाश पीठों के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देता है।

आदेश के समय पर भी सवाल उठते हैं कि क्या यह आदेश राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत दिए जाने के बाद जारी किया गया था ।

वकीलों ने यह भी कहा कि अवकाश अदालतों को निर्णय लेने से रोकना न्यायिक प्रक्रिया को धीमा करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है । वकीलों ने कहा, इसका नतीजा यह हुआ है कि जिन वकीलों के मामले अवकाश के दौरान सूचीबद्ध थे, उन्हें उनके मामलों का अंतिम निपटारा नहीं मिल पाया।

कांग्रेस ने इस प्रशासनिक आदेश के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है । वकीलों ने लिखा है, हम वकील समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर इस प्रशासनिक आदेश के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराना चाहते हैं।

यह मामला भारतीय न्यायपालिका में हितों के टकराव, प्रशासनिक अनियमितताओं और न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुचित उपयोग की गंभीरता को उजागर करता है।

वकीलों का यह पत्र न केवल एक विशिष्ट मामले की ओर इशारा करता है, बल्कि न्यायपालिका की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में समय पर और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता होती है, ताकि जनता का विश्वास कायम रखा जा सके ।