KHABAR BITE की महत्वपूर्ण खबरों और अपडेट के लिए जुड़े रहें
Bite Size News, Right Size Information
👤
BREAKING NEWS
थलपति विजय की कुर्सी पर बढ़ा सियासी दबाव? लेफ्ट से बढ़ती दूरी ने तमिलनाडु की राजनीति में मचाई हलचलट्रॉफी जीती, लेकिन मोहसिन नकवी से नहीं ली भारतीय महिला टीम के फैसले ने फिर बढ़ाई क्रिकेट और सियासत की चर्चागणेश चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, स्थापना, व्रत, विसर्जन और भगवान गणेश की महिमादिशा सालियान केस में 6 साल बाद बड़ा मोड़, CBI FIR में कई बड़े नाम सुशांत केस से क्या है कनेक्शन?भारत ने रचा इतिहास, श्रीलंका को हराकर 8वीं बार जीता महिला एशिया कपApple iPhone Duo लॉन्च पहली बार फोल्ड हुआ iPhone, कीमत ₹2.99 लाख से शुरू, जानिए क्या है खासBRICS Summit 2026: दिल्ली में स्कूल-दफ्तर बंद, ट्रैफिक से सुरक्षा तक जानिए पूरी तैयारीAI से इंसानों के खत्म होने का कितना खतरा ?आखिर IRCTC पर टिकट बुक क्यों नहीं हो पा रहा? जानिए क्या है असली वजह, इन कारणों से अटक सकती है बुकिंगDMart ने बदली ऑनलाइन रणनीति, Quick Commerce के दौर में अब मुनाफे पर फोकस
ताजा खबर

दिल्ली SIR: हर तीन में से करीब एक नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर, क्या है पूरा मामला?

By Aarti Mishra · Published 01 Sep 2026, 23:43 · Updated 01 Sep 2026, 23:52

दिल्ली की राजनीति में SIR से क्यों मचा बवाल?

दिल्ली की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आने के बाद राजधानी की राजनीति में बहस तेज हो गई है। Special Intensive Revision यानी SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में पुराने रिकॉर्ड की तुलना में 47 लाख से ज्यादा नाम कम दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए हैं और मतदाताओं के बीच भी सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर क्यों हुए।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया से पहले दिल्ली की मतदाता सूची में 1,45,10,299 मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट सूची में 97,53,577 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। दोनों आंकड़ों के बीच 47,56,722 का अंतर है। यह करीब 32.79 फीसदी बैठता है।

हालांकि एक जरूरी बात समझना जरूरी है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अंतिम मतदाता सूची नहीं होती। पात्र मतदाताओं को दावा और आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया जाता है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि बाहर हुए सभी नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से हट गए हैं।

SIR आखिर है क्या?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची को अपडेट और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड की पहचान करना और सूची को अधिक सटीक बनाना है।

दिल्ली में इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया गया। जिन मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी या मतदाता संबंधित पते पर नहीं मिला, उनका नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं किया गया। इसी वजह से पुरानी और नई सूची के आंकड़ों में बड़ा अंतर नजर आ रहा है।

47 लाख से ज्यादा नामों का क्या हुआ?

चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 47,56,722 नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा उन मतदाताओं का है जिन्हें स्थानांतरित या सत्यापन के दौरान अनुपलब्ध पाया गया।

आंकड़ों के अनुसार 43,32,775 मतदाता ऐसे पाए गए जो दूसरी जगह चले गए थे या सत्यापन के दौरान उपलब्ध नहीं मिले। 2,82,412 मतदाताओं को मृत पाया गया, जबकि 1,41,535 नाम एक से अधिक जगह दर्ज या डुप्लीकेट प्रविष्टियों से जुड़े बताए गए हैं।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए सभी 47 लाख से ज्यादा नाम फर्जी मतदाताओं के थे। इन आंकड़ों में अलग-अलग कारणों से बाहर हुए मतदाता शामिल हैं।

क्या नाम हटने का मतलब वोट देने का अधिकार खत्म हो गया?

जरूरी नहीं। ड्राफ्ट सूची अंतिम सूची नहीं है। जिन पात्र मतदाताओं का नाम इसमें नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकते हैं।

दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित मामलों की जांच की जाएगी और उसके आधार पर अंतिम मतदाता सूची तैयार होगी। इसलिए अगर किसी वास्तविक मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं दिख रहा है, तो उसे घबराने के बजाय आधिकारिक प्रक्रिया के तहत अपना दावा करना चाहिए।

केजरीवाल ने क्यों साधा निशाना?

ड्राफ्ट सूची सामने आने के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने करीब 47 लाख नामों के ड्राफ्ट सूची में नहीं होने का हवाला देते हुए तंज किया कि अगर इसी तरह नाम कम होते रहे तो देश की आबादी भी कम हो जाएगी।

यह केजरीवाल की राजनीतिक टिप्पणी है। इसे चुनाव आयोग की ओर से जारी कोई आधिकारिक तथ्य या नीति नहीं माना जाना चाहिए। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

विपक्ष की चिंता है कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम भी छूट सकते हैं। वहीं मतदाता सूची को अपडेट करने और डुप्लीकेट या स्थानांतरित रिकॉर्ड की पहचान को SIR की प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।

दिल्ली में मतदान केंद्र भी बढ़े

SIR के दौरान सिर्फ मतदाता सूची में बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में मतदान केंद्रों का rationalisation भी किया गया है।

एक मतदान केंद्र पर अधिकतम मतदाताओं की संख्या 1,500 से घटाकर 1,200 की गई है। इसके बाद दिल्ली में मतदान केंद्रों की संख्या 13,033 से बढ़कर 14,947 हो गई। यानी 1,914 मतदान केंद्रों की बढ़ोतरी हुई है। वहीं मतदान केंद्रों की लोकेशन 2,696 से बढ़कर 2,856 हुई है।

इस बदलाव का उद्देश्य मतदान केंद्रों पर भीड़ कम करना और मतदाताओं के लिए मतदान प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना है।

अगर आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो क्या करें?

सबसे पहले अपना नाम आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल पर जांचें। अगर नाम नहीं मिलता और आप मतदान के लिए पात्र हैं, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा दाखिल करें।

नाम, पता और अन्य विवरण सही हैं या नहीं, यह भी जांचना जरूरी है। किसी अनजान वेबसाइट या सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय Election Commission of India और Chief Electoral Officer, Delhi की आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता दें। जरूरत पड़ने पर अपने BLO या संबंधित निर्वाचन अधिकारी से भी संपर्क किया जा सकता है।

SIR पर सबसे बड़ा सवाल क्या है?

SIR को लेकर बहस केवल इस बात पर नहीं है कि कितने नाम हटे। असली सवाल यह है कि बाहर हुए नामों में कितने ऐसे लोग हैं जो वास्तव में दिल्ली में नहीं रहते और कितने पात्र मतदाता सत्यापन प्रक्रिया में छूट गए।

गलत या डुप्लीकेट नाम हटाना मतदाता सूची को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हो सकता है। दूसरी तरफ किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से हटना भी गंभीर विषय है। इसलिए दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया इस पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण है।

मतदाताओं के लिए अभी सबसे जरूरी काम

आम मतदाताओं को राजनीतिक बहस से अलग अपने स्तर पर अपना नाम और विवरण जांचना चाहिए। अगर नाम मौजूद है तो जानकारी की पुष्टि करें। अगर नाम गायब है तो अंतिम सूची का इंतजार किए बिना निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा दाखिल करें।

पुराने वोटर कार्ड को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि वर्तमान ड्राफ्ट सूची में नाम भी मौजूद है। ताजा स्थिति आधिकारिक मतदाता सेवा के माध्यम से जांचना सबसे सुरक्षित तरीका है।

दिल्ली SIR ने मतदाता सूची को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर दी है। 1,45,10,299 पुराने मतदाताओं के मुकाबले ड्राफ्ट सूची में 97,53,577 नाम शामिल हैं, जबकि 47,56,722 नाम फिलहाल बाहर हैं। करीब 32.79 फीसदी का यह अंतर निश्चित रूप से बड़ा है, लेकिन इसे अंतिम स्थिति मानना अभी जल्दबाजी होगी।

ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया होती है। इसलिए वास्तविक मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपना नाम जांचें और जरूरत पड़ने पर समय सीमा के भीतर दावा दाखिल करें।

केजरीवाल का ‘आबादी घट जाएगी’ वाला बयान इस मुद्दे की राजनीतिक बहस को सामने लाता है, लेकिन SIR की प्रशासनिक प्रक्रिया और उसके अंतिम परिणाम को राजनीतिक बयान से अलग रखकर देखना जरूरी है। आखिरकार मतदाता सूची में अपना नाम सही रखना हर पात्र मतदाता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है।

Editorial Note: यह लेख स्वतंत्र भाषा और संरचना में तैयार किया गया है। किसी समाचार वेबसाइट के लेख को शब्दशः या paragraph-by-paragraph कॉपी नहीं किया गया है। आंकड़ों और तारीखों को प्रकाशित करने से पहले संबंधित आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड से अंतिम बार मिलाना उचित रहेगा।