ग्रेटर नोएडा में किसानों का बड़ा ऐलान 20 सितंबर तक समाधान नहीं तो 21 को प्राधिकरण पर तालाबंदी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार को आंदोलन के छठे दिन आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। महापंचायत में किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्राधिकरण और जिला प्रशासन को 20 सितंबर तक का समय दिया है। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में मांगों का ठोस समाधान नहीं निकला, तो 21 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तालाबंदी की जाएगी।
20 सितंबर तक समाधान का अल्टीमेटम
किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में किसानों ने कहा है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रशासन और प्राधिकरण को 20 सितंबर तक किसानों की समस्याओं के समाधान का अवसर दिया जाएगा।
किसान नेताओं के अनुसार, यदि तय समय सीमा के भीतर कोई ठोस फैसला नहीं होता है तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। इसके तहत 21 सितंबर को प्राधिकरण के मुख्य गेट पर तालाबंदी करने का ऐलान किया गया है। इसके बाद किसानों के प्राधिकरण परिसर में ही डटे रहने की बात भी कही गई है।
कई दिनों से जारी है धरना
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय के बाहर किसानों का धरना लगातार चल रहा है। आंदोलन के दौरान आयोजित महापंचायत में अलग-अलग क्षेत्रों से किसान पहुंचे। किसान संगठनों का कहना है कि बार-बार अपनी समस्याएं उठाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है।
14 सितंबर को हुई महापंचायत में किसान नेताओं ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की। इसी दौरान 20 सितंबर की समय सीमा तय करते हुए 21 सितंबर को तालाबंदी की घोषणा की गई।
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
किसानों की ओर से उठाए जा रहे प्रमुख मुद्दों में आबादी से जुड़े मामलों का निस्तारण, मुआवजे से संबंधित मांगें, विभिन्न प्रतिशत कोटे के भूखंड, स्थानीय युवाओं को रोजगार और भूमिहीन किसानों के लिए भूखंड जैसे मुद्दे शामिल हैं।
किसान संगठनों की ओर से 10 प्रतिशत आबादी के विकसित भूखंड की मांग को भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि जमीन अधिग्रहण और उससे जुड़े मामलों में प्रभावित किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए लंबित मामलों का समाधान किया जाना चाहिए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसानों की ओर से रखी गई मांगें और प्राधिकरण या सरकार द्वारा स्वीकृत अधिकार अलग-अलग विषय हैं। अंतिम निर्णय संबंधित नीतियों, नियमों और सक्षम प्राधिकरण के फैसलों पर निर्भर करेगा।
आंदोलन को और बड़ा करने की चेतावनी
महापंचायत में किसान नेताओं ने संकेत दिया कि यदि 20 सितंबर तक समाधान नहीं हुआ तो 21 सितंबर की तालाबंदी के बाद आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। रिपोर्टों के मुताबिक किसानों ने प्राधिकरण परिसर में डेरा डालने और समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
किसान नेताओं का कहना है कि अब केवल आश्वासन के बजाय लंबित समस्याओं पर ठोस निर्णय चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि जिन मामलों का समाधान लंबे समय से नहीं हुआ है, उन पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाए।
महापंचायत में नेताओं ने रखी अपनी बात
महापंचायत में किसान संघर्ष मोर्चा से जुड़े कई नेताओं ने किसानों की समस्याओं को उठाया। किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने 10 प्रतिशत आबादी के भूखंड की मांग को प्रमुख मुद्दों में बताया। वहीं किसान सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने आंदोलन को समाधान मिलने तक जारी रखने की बात कही। सुखबीर खलीफा ने भी किसानों की मांगों और प्रशासन की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी।
महापंचायत को कुछ राजनीतिक नेताओं का समर्थन भी मिला। रिपोर्टों के अनुसार समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष सुधीर भाटी और कांग्रेस नेता दुष्यंत नागर ने भी किसानों के आंदोलन का समर्थन किया।
अब प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर
किसानों के ऐलान के बाद अब सबकी नजर प्राधिकरण और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। 20 सितंबर की समय सीमा से पहले यदि किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत होती है और किसी समाधान पर सहमति बनती है, तो 21 सितंबर की प्रस्तावित तालाबंदी की स्थिति बदल सकती है।
वहीं, यदि बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलता है तो किसानों के घोषित कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन और तेज हो सकता है। ऐसे में प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्था, कार्यालय का कामकाज और किसानों के साथ बातचीत महत्वपूर्ण मुद्दे बनेंगे।
फिलहाल किसानों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि 20 सितंबर तक समाधान नहीं हुआ तो 21 सितंबर को प्राधिकरण में तालाबंदी की जाएगी। आने वाले कुछ दिन इस आंदोलन की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे।