जितिया व्रत में मां जितिया और सूर्यदेव की आरती से पूरी करें पूजा, संतान के लिए करें ये खास प्रार्थना

हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और पर्व हैं, जिनके पीछे मां और संतान के बीच के गहरे प्रेम और विश्वास की भावना जुड़ी होती है। जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे आम बोलचाल में जितिया या जिउतिया व्रत भी कहा जाता है, ऐसा ही एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कठिन व्रत रखती हैं।
जितिया व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मां के उस भाव को भी दर्शाता है जिसमें वह अपनी संतान के सुख के लिए हर कठिनाई सहने को तैयार रहती है। व्रत के दौरान पूजा-पाठ, कथा श्रवण और भगवान सूर्यदेव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
पूजा के समय मां जितिया और सूर्यदेव की आरती करने से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से संतान के जीवन में सुख-शांति और दीर्घायु की कामना पूर्ण होती है।
जितिया व्रत में क्यों की जाती है मां जितिया की पूजा?
जीवित्पुत्रिका व्रत से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में मां जितिया को संतान की रक्षा और उसके मंगल से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन माताएं पूरे श्रद्धाभाव से पूजा करती हैं और अपनी संतान के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं।
जितिया व्रत की कथा में भी संतान की रक्षा, मातृत्व और त्याग की भावना को प्रमुखता दी गई है। यही वजह है कि इस व्रत को माताओं के लिए विशेष माना जाता है।
पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए आराध्य देव का ध्यान करना और आरती करना इस पर्व की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सूर्यदेव की पूजा का भी है खास महत्व
जीवित्पुत्रिका व्रत में सूर्यदेव की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। सूर्य को जीवन, ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत माना गया है। भारतीय धार्मिक परंपरा में सूर्यदेव को स्वास्थ्य और जीवन शक्ति से भी जोड़ा जाता है।
व्रत के दौरान माताएं सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं और अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य तथा लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। पूजा के अंत में सूर्यदेव की आरती करने से श्रद्धालु अपनी मनोकामना और प्रार्थना भगवान के सामने रखते हैं।
सुबह या पूजा के निर्धारित समय पर सूर्यदेव को जल अर्पित करते हुए मन में संतान के लिए मंगलकामना करना इस व्रत की भावनात्मक खूबसूरती को और बढ़ा देता है।
पूजा में पढ़ें मां जितिया की आरती
मां जितिया की पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ आरती की जाती है। आरती करते समय परिवार की सुख-शांति और संतान के मंगल की कामना की जाती है। आरती के शब्दों से अधिक महत्वपूर्ण इसमें जुड़ी श्रद्धा और भावना मानी जाती है।
पूजा के दौरान आप अपने घर में प्रचलित मां जितिया की आरती का पाठ कर सकते हैं। यदि आपके परिवार में किसी विशेष आरती या परंपरा का पालन होता है, तो उसी के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है।
आरती के समय दीपक जलाकर मां जितिया का ध्यान करें और संतान के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा सुखी जीवन की प्रार्थना करें।
सूर्यदेव की आरती से करें पूजा का समापन
मां जितिया की पूजा के बाद सूर्यदेव को नमन कर उनकी आरती करना भी शुभ माना जाता है। सूर्यदेव के सामने दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक आरती करें।
आरती के दौरान मन में यह भावना रखें कि सूर्यदेव की कृपा से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे और संतान स्वस्थ, प्रसन्न और सुरक्षित रहे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद कुछ समय शांत मन से प्रार्थना करना भी अच्छा माना जाता है। इस दौरान किसी प्रकार की जल्दबाजी न करें और पूरे मन से पूजा में ध्यान लगाएं।
जितिया व्रत में पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
जितिया व्रत कठिन व्रतों में गिना जाता है, इसलिए पूजा के दौरान अपनी परंपरा और परिवार की मान्यताओं का ध्यान रखना जरूरी है। पूजा के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके वहां भगवान और व्रत से जुड़े पूजन सामग्री को व्यवस्थित रखें।
पूजा के दौरान मन में नकारात्मक विचार न लाएं और जितना संभव हो शांत भाव से पूजा करें। संतान के लिए प्रार्थना करते समय केवल लंबी उम्र ही नहीं, बल्कि उसके अच्छे स्वास्थ्य, संस्कार, शिक्षा, सफलता और सुखी जीवन की भी कामना की जा सकती है।
अगर आपके परिवार में जितिया व्रत की कोई विशेष पूजा विधि या परंपरा चली आ रही है, तो उसे प्राथमिकता देना बेहतर होता है।
मां के त्याग और प्रेम का पर्व है जितिया
जितिया व्रत की सबसे खूबसूरत बात यही है कि इसके केंद्र में मां और संतान का रिश्ता है। मां अपनी संतान की खुशहाली के लिए कठिन व्रत रखती है और भगवान से उसके सुरक्षित भविष्य की प्रार्थना करती है।
आज के समय में जब जीवन की भागदौड़ बढ़ गई है, ऐसे पर्व परिवार को एक साथ बैठने, अपनी परंपराओं को याद करने और रिश्तों की अहमियत समझने का अवसर भी देते हैं।
इसलिए जितिया व्रत को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान के तौर पर देखने के बजाय मां की ममता, त्याग और संतान के प्रति उसके अटूट विश्वास के पर्व के रूप में भी समझा जा सकता है।
आरती के बाद संतान के लिए करें ये प्रार्थना
पूजा और आरती पूरी होने के बाद कुछ क्षण आंखें बंद करके भगवान का ध्यान करें। अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु, सुख, शांति और सफलता की कामना करें।
आप मन ही मन प्रार्थना कर सकती हैं कि आपका बच्चा जीवन में हमेशा स्वस्थ रहे, सही रास्ते पर चले, परिवार का नाम रोशन करे और उसके जीवन में खुशियां बनी रहें।
यही भावना जीवित्पुत्रिका व्रत को विशेष बनाती है। व्रत की कठिनाई से ज्यादा महत्वपूर्ण मां की वह श्रद्धा है, जिसके साथ वह अपनी संतान के लिए भगवान से आशीर्वाद मांगती है।
जीवित्पुत्रिका व्रत यानी जितिया मातृत्व की भावना और संतान के प्रति मां के प्रेम का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ मां जितिया और सूर्यदेव की आरती करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। श्रद्धा से की गई पूजा में माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।
धार्मिक मान्यताओं में आस्था व्यक्तिगत होती है, इसलिए पूजा और आरती अपने परिवार की परंपरा तथा स्थानीय रीति-रिवाज के अनुसार करना सबसे उचित माना जाता है।