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अरब सागर में भारत-पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों की टक्कर, MEA ने पाकिस्तानी राजनयिक को किया तलब

By Aarti Mishra · Published 16 Sep 2026, 19:25 · Updated 16 Sep 2026, 19:32

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों के बीच अरब सागर से जुड़ी एक नई घटना सामने आई है। 15 सितंबर 2026 की शाम अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में भारतीय नौसेना और पाकिस्तानी नौसेना की इकाइयों के बीच टक्कर की घटना हुई। इसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 16 सितंबर को नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया और इस घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि, भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के समुद्र में किए गए व्यवहार को “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” बताया है। भारत ने इस घटना को दोनों देशों के बीच अप्रैल 1991 में हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के प्रावधानों के संदर्भ में भी उठाया है।

उत्तर अरब सागर में हुआ टकराव

रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटना 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई। उस समय भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था। भारतीय अधिकारियों से जुड़ी रिपोर्टों में कहा गया है कि एक पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज भारतीय पोत के करीब आया और तेज गति से किए गए उसके मूवमेंट के बाद दोनों जहाजों के बीच टक्कर हुई।

हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में जहाजों के नाम और टक्कर की पूरी तकनीकी परिस्थितियों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए घटना के सभी परिचालन पहलुओं को लेकर उपलब्ध जानकारी अभी सीमित है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि घटना अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई और इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इसके बावजूद समुद्र में दो देशों की सैन्य इकाइयों के बीच इस तरह की घटना को गंभीरता से लिया गया है।

पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स को किया गया तलब

घटना के बाद भारत ने राजनयिक स्तर पर तत्काल प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।

भारत ने पाकिस्तानी राजनयिक से कहा कि संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक यह बात पहुंचाई जाए कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयां समुद्र में संचालन के दौरान पर्याप्त सावधानी बरतें और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करें।

भारत का कहना है कि ऐसे कदम भविष्य में इस तरह की घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी हैं।

1991 के समझौते का दिया गया हवाला

भारत ने इस मामले में अप्रैल 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते का हवाला दिया है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों के संबंध में अग्रिम सूचना और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के जरिए गलतफहमी तथा आकस्मिक घटनाओं की संभावना को कम करना है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण इस समझौते के अनुच्छेद 10 के सीधे विपरीत था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रावधान में अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने से संबंधित व्यवस्था है।

इस प्रावधान का उद्देश्य सैन्य जहाजों के बीच अनावश्यक रूप से खतरनाक स्थिति बनने से रोकना है। समुद्र में बड़े युद्धपोतों की गति, दिशा और संचालन को देखते हुए कुछ ही मिनटों की गलतफहमी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

इस्लामाबाद में भी दर्ज कराया जाएगा विरोध

भारत ने केवल नई दिल्ली में पाकिस्तानी राजनयिक को तलब करके ही मामला नहीं छोड़ा है। विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय चार्ज डी’अफेयर्स को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

इसका मतलब है कि इस घटना को भारत ने औपचारिक राजनयिक चैनल के जरिए दोनों राजधानियों में उठाया है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं दी गई है।

2011 की घटना की भी आई याद

भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में टकराव या खतरनाक नजदीकी की घटना पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले 2011 में INS Godavari और पाकिस्तान नौसेना के PNS Babur से जुड़ी घटना को लेकर भी भारत ने आपत्ति जताई थी।

उस समय दोनों जहाज अदन की खाड़ी में एक हाईजैक किए गए व्यापारिक जहाज से संबंधित अभियान के दौरान क्षेत्र में मौजूद थे। भारत ने उस घटना में पाकिस्तानी पोत की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई थी। मौजूदा मामले में भी 1991 के समझौते का संदर्भ सामने आया है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?

भारत और पाकिस्तान के संबंध लंबे समय से कई सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों के कारण तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे माहौल में दोनों देशों की सैन्य इकाइयों के बीच समुद्र में होने वाली कोई भी अप्रत्याशित घटना अतिरिक्त सावधानी की मांग करती है।

नौसैनिक गतिविधियों में युद्धपोतों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों, परिचालन प्रक्रियाओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होता है। खासकर तब, जब दो अलग-अलग देशों की सैन्य इकाइयां एक ही समुद्री क्षेत्र में सक्रिय हों।

मौजूदा घटना में बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन भारत की ओर से राजनयिक विरोध दर्ज कराने से यह साफ है कि नई दिल्ली ने समुद्र में सैन्य जहाजों की सुरक्षा और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद समझौतों के पालन को महत्वपूर्ण मुद्दा माना है।

अभी पाकिस्तान की ओर से क्या प्रतिक्रिया?

घटना पर भारत ने अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट कर दिया है और पाकिस्तान के राजनयिक को विरोध दर्ज कराया है। उपलब्ध रिपोर्टों में पाकिस्तान की ओर से इस घटना के संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।

ऐसे मामलों में घटना की परिस्थितियों, जहाजों की गतिविधियों और संबंधित नौसैनिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि टक्कर के पीछे अंतिम रूप से किस स्तर की परिचालन गलती या परिस्थिति जिम्मेदार थी।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि टक्कर के बावजूद किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है और भारत ने मामले को राजनयिक माध्यम से उठाया है। दोनों देशों के अधिकारी यदि समुद्री सुरक्षा से जुड़े मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करते हैं, तो ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

भारत की ओर से पाकिस्तानी राजनयिक को यह संदेश दिया गया है कि समुद्र में सैन्य इकाइयों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और संबंधित द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करना चाहिए।

कुल मिलाकर, उत्तर अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के बीच हुई यह टक्कर फिलहाल बड़े नुकसान में नहीं बदली है, लेकिन इसने दोनों देशों के बीच सैन्य संचालन और समुद्री सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल को लेकर एक नया राजनयिक मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है। अब निगाहें पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और दोनों पक्षों की आगे की कार्रवाई पर रहेंगी।