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राजनीति

अनंत सिंह पर JDU का बड़ा एक्शन, 6 साल के लिए पार्टी से निकाला; नीरज कुमार से टकराव बना वजह?

By Aarti Mishra · Published 24 Oct 2026, 18:47 · Updated 24 Oct 2026, 18:47

अनंत सिंह JDU से निष्कासित, पत्नी नीलम देवी पर भी कार्रवाई की खबर

बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उनकी प्राथमिक सदस्यता भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। यह कार्रवाई बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव के दौरान पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ काम करने को लेकर की गई है।

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहा राजनीतिक विवाद पिछले कुछ समय से चर्चा में था। पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन के बजाय अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह का साथ दिया था। इसके बाद जेडीयू के भीतर अनुशासन और पार्टी लाइन का पालन करने को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब निष्कासन की कार्रवाई को पार्टी की ओर से अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर सामने आए थे अनंत सिंह

जेडीयू के अंदर विवाद की मुख्य वजह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद चुनाव बना। पार्टी ने इस सीट से नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था, लेकिन मोकामा विधायक अनंत सिंह ने उनके समर्थन में प्रचार करने के बजाय जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन किया।

अनंत सिंह ने अपने रुख को लेकर यह भी कहा था कि नीरज कुमार ने पहले उनके खिलाफ काम किया था। इसी राजनीतिक नाराजगी के कारण उन्होंने नीरज कुमार के समर्थन से दूरी बना ली। पार्टी के लिए यह स्थिति असहज थी, क्योंकि एक तरफ आधिकारिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में था, तो दूसरी तरफ पार्टी का ही विधायक उसके विरोध में खड़ा दिखाई दे रहा था।

एमएलसी चुनाव के बाद जेडीयू ने लिया फैसला

विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेडीयू ने अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की। पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित करने के साथ उनकी प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी।

इस कार्रवाई को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका संदेश साफ है कि पार्टी अपने आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करने वाले नेताओं को लेकर सख्त रुख अपना सकती है। हालांकि, इस कदम का असर अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य और मोकामा क्षेत्र में उनकी स्थिति पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

जेडीयू के लिए यह फैसला पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिहाज से भी अहम है। चुनाव के दौरान अगर पार्टी के नेता ही आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करते हैं, तो इससे कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा हो सकता है और चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है।

नीरज कुमार ने भी दिए थे सख्त संकेत

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद केवल उम्मीदवार के समर्थन तक सीमित नहीं रहा। दोनों नेताओं के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद की बात सामने आती रही है।

चुनाव के बाद नीरज कुमार ने पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं पर कार्रवाई के संकेत दिए थे। उन्होंने राजनीतिक विरोधियों को लेकर सख्त टिप्पणी भी की थी। उनके बयानों को अनंत सिंह के साथ चल रहे विवाद से जोड़कर देखा गया।

नीरज कुमार ने राजनीति में अपराधीकरण और बाहुबल के प्रभाव पर भी सवाल उठाए। इन टिप्पणियों ने जेडीयू के अंदर चल रहे मतभेदों को और चर्चा में ला दिया।

क्या अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी पर भी हुई कार्रवाई?

अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी का नाम भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा में है। हालांकि, 24 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों में अनंत सिंह के छह साल के निष्कासन और उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द किए जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है।

इसलिए नीलम देवी पर कार्रवाई को फिलहाल पुष्ट खबर के रूप में लिखना उचित नहीं होगा। अगर पार्टी की ओर से उनके संबंध में अलग आदेश जारी होता है, तो उस आधार पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

मोकामा की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

मोकामा बिहार की उन विधानसभा सीटों में शामिल है, जहां स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में अनंत सिंह की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। क्षेत्र में उनका प्रभाव और समर्थकों का नेटवर्क उनकी राजनीतिक ताकत का हिस्सा माना जाता है।

जेडीयू से निष्कासन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि अनंत सिंह आगे किस राजनीतिक दिशा में कदम बढ़ाते हैं। क्या वह किसी दूसरे दल के करीब जाते हैं, अपनी अलग राजनीतिक रणनीति बनाते हैं या क्षेत्रीय राजनीति में स्वतंत्र भूमिका निभाते हैं, इन सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं।

दूसरी तरफ, जेडीयू को भी मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी के लिए यह जरूरी होगा कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच अपना राजनीतिक संपर्क बनाए रखे।

जेडीयू के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?

राजनीतिक दलों में आंतरिक मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन जब कोई नेता सार्वजनिक रूप से पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ खड़ा हो जाता है, तो मामला अनुशासन से जुड़ जाता है।

जेडीयू की कार्रवाई को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि चुनाव के दौरान संगठन के फैसलों और आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

यह फैसला दूसरे नेताओं के लिए भी एक संकेत हो सकता है कि पार्टी के भीतर असहमति रखने और पार्टी के खिलाफ चुनावी गतिविधियों में शामिल होने के बीच अंतर है। किसी नेता के व्यक्तिगत मतभेदों से पार्टी की चुनावी रणनीति प्रभावित होती है, तो नेतृत्व उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठा सकता है।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि अनंत सिंह आगे क्या राजनीतिक कदम उठाते हैं और मोकामा में उनकी रणनीति किस दिशा में जाती है। साथ ही, जेडीयू के लिए यह कार्रवाई अपने संगठन में अनुशासन बनाए रखने की परीक्षा भी होगी।

नीलम देवी को लेकर किसी अलग कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि होने पर ही उस पहलू को खबर में शामिल करना सही होगा। फिलहाल, पुष्ट घटनाक्रम अनंत सिंह के निष्कासन और उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द किए जाने से जुड़ा है।