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Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा की रात करें ये 5 खास उपाय, चंद्र दोष से राहत पाने के लिए जानें पूजा विधि और महत्व

By Aarti Mishra · Published 24 Oct 2026, 16:25 · Updated 24 Oct 2026, 16:25

Sharad Purnima 2026 पर चंद्रमा की पूजा और चंद्र दोष के पारंपरिक उपाय

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन महीने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है और चांदनी को विशेष शुभ माना जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मकता की प्राप्ति होती है।

साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस अवसर पर बहुत से लोग व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन को चंद्रमा से जुड़े उपायों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसी मान्यता है कि कुछ सरल धार्मिक उपाय करने से कुंडली में चंद्र दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

अगर आप भी शरद पूर्णिमा के अवसर पर पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं चंद्र दोष से राहत पाने के लिए किए जाने वाले पांच पारंपरिक उपाय, पूजा का महत्व और इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

शरद पूर्णिमा 2026 का धार्मिक महत्व क्या है?

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को अलग-अलग परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है। कुछ क्षेत्रों में इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जबकि कई जगह भगवान कृष्ण की रासलीला से इसका संबंध माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें विशेष गुणों से युक्त होती हैं। इसी विश्वास के चलते कई परिवारों में खीर बनाकर रात में खुले आसमान के नीचे रखी जाती है। अगले दिन इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, मानसिक स्थिरता और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। इसलिए चंद्रमा से जुड़े दोषों की शांति के लिए पूर्णिमा के दिन पूजा, दान और मंत्र जाप करने की परंपरा है।

हालांकि, ये सभी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। इन उपायों से चंद्र दोष समाप्त होने या जीवन की समस्याएं निश्चित रूप से दूर होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें श्रद्धा और व्यक्तिगत आस्था के रूप में अपनाया जा सकता है।

चंद्र दोष क्या होता है और इसका क्या महत्व है?

ज्योतिष शास्त्र में कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को व्यक्ति के स्वभाव, मन और भावनात्मक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। जब चंद्रमा को कुंडली में कमजोर या प्रतिकूल स्थिति में माना जाता है, तो इसे कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में चंद्र दोष या चंद्रमा की पीड़ित स्थिति कहा जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति को मानसिक बेचैनी, अस्थिरता, आत्मविश्वास में कमी या पारिवारिक तनाव से जोड़ा जाता है। हालांकि, जीवन में इन समस्याओं के कई व्यावहारिक कारण भी हो सकते हैं। केवल किसी परेशानी के आधार पर कुंडली में चंद्र दोष होने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

शरद पूर्णिमा पर चंद्र देव की पूजा, सफेद वस्तुओं का दान, मंत्र जाप और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे उपाय परंपरागत रूप से किए जाते हैं। इनका उद्देश्य श्रद्धा के साथ मन को शांत करना और जीवन में सकारात्मकता को बढ़ावा देना है।

शरद पूर्णिमा की रात करें ये 5 खास उपाय

1. चंद्रमा को अर्घ्य देकर करें प्रार्थना

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देना एक प्रमुख धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि इससे चंद्र देव की कृपा प्राप्त होती है और चंद्रमा से जुड़ी ज्योतिषीय परेशानियों को शांत करने में सहायता मिलती है।

इसके लिए रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर एक साफ पात्र में जल लें। अपनी श्रद्धा के अनुसार उसमें थोड़ा कच्चा दूध या सफेद फूल डाल सकते हैं। इसके बाद चंद्रमा की ओर मुख करके धीरे-धीरे अर्घ्य दें और मन की शांति तथा परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

पूजा करते समय मन में सकारात्मक विचार रखें। यदि आप किसी कारण से चंद्रमा के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं, तो घर में ही चंद्र देव का स्मरण करके प्रार्थना कर सकते हैं।

2. ‘ॐ सोम सोमाय नमः’ मंत्र का करें जाप

ज्योतिषीय मान्यताओं में चंद्रमा को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जाप को उपयोगी माना जाता है। शरद पूर्णिमा की रात शांत वातावरण में बैठकर चंद्र देव के मंत्र का जाप किया जा सकता है।

आप ‘ॐ सोम सोमाय नमः’ मंत्र का अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। मंत्र जाप करते समय जल्दबाजी न करें और अपना ध्यान प्रार्थना पर केंद्रित रखें।

ऐसा माना जाता है कि नियमित पूजा और मंत्र जाप से व्यक्ति को मानसिक शांति का अनुभव हो सकता है। मंत्र जाप को किसी चमत्कारी उपाय के बजाय ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में भी देखा जा सकता है।

3. सफेद वस्तुओं का करें दान

चंद्रमा का संबंध ज्योतिष में सफेद रंग और सफेद वस्तुओं से जोड़ा जाता है। इसी वजह से चंद्र दोष की शांति के लिए चावल, दूध, चीनी, सफेद कपड़े और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है।

शरद पूर्णिमा के अवसर पर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, चावल, दूध या कपड़े दान कर सकते हैं। यदि संभव हो तो किसी जरूरतमंद परिवार को राशन उपलब्ध कराना भी अच्छा विकल्प है।

दान करते समय दिखावे से बचें और अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखें। धार्मिक मान्यताओं में निस्वार्थ भाव से किया गया दान विशेष महत्व रखता है। किसी की मदद करना केवल पर्व तक सीमित रखने के बजाय जीवन का हिस्सा बनाना भी सकारात्मक कदम है।

4. माता लक्ष्मी की पूजा करें

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।

पूजा के लिए शाम को घर की सफाई करें और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। माता लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।

धार्मिक परंपरा में पूजा के साथ मेहनत, ईमानदारी और जिम्मेदारी को भी महत्व दिया जाता है। इसलिए आर्थिक समृद्धि की कामना के साथ धन का सही उपयोग, बचत और जरूरतमंदों की मदद जैसे व्यवहारिक कदम भी जरूरी हैं।

5. शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर लगाएं भोग

शरद पूर्णिमा की सबसे लोकप्रिय परंपराओं में रात के समय खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा शामिल है। कई परिवार इसे अमृत वर्षा से जुड़ी धार्मिक मान्यता के रूप में देखते हैं।

इस दिन दूध, चावल और चीनी से खीर बनाएं। पूजा के समय भगवान को इसका भोग लगाएं और अपनी परंपरा के अनुसार खीर को रात में ढककर सुरक्षित स्थान पर रख सकते हैं। अगले दिन इसे परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है।

खीर को खुले स्थान पर रखने पर धूल, कीड़े-मकोड़े और अन्य दूषित पदार्थ गिरने का खतरा रहता है। इसलिए इसे साफ, ढके हुए बर्तन में रखें। लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखे दूध से बने खाद्य पदार्थ खराब हो सकते हैं। खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ही इसका सेवन करें।

इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य परिवार के साथ पर्व मनाना, प्रसाद बांटना और धार्मिक आस्था को बनाए रखना है।

शरद पूर्णिमा की पूजा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

शरद पूर्णिमा पर पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

  • पूजा स्थल और घर को साफ रखें।
  • अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखें, लेकिन स्वास्थ्य और जरूरतों को प्राथमिकता दें।
  • पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री साफ रखें।
  • किसी भी धार्मिक उपाय को लेकर अनावश्यक डर या चिंता न पालें।
  • महंगे अनुष्ठानों या रत्नों पर पैसा खर्च करने से पहले सोच-विचार करें।
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और परिवार के साथ समय बिताएं।

यदि आप मानसिक तनाव, बेचैनी या नींद से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो केवल ज्योतिषीय कारण मानकर न चलें। जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

क्या शरद पूर्णिमा पर किए गए उपाय चंद्र दोष दूर कर सकते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर चंद्र देव की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। ज्योतिष में इन उपायों को चंद्रमा से जुड़ी प्रतिकूलता को शांत करने के पारंपरिक तरीकों में शामिल किया जाता है।

हालांकि, किसी विशेष उपाय से चंद्र दोष पूरी तरह समाप्त हो जाएगा या जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती। व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति, आर्थिक स्थिरता और पारिवारिक खुशहाली के लिए सकारात्मक सोच, उचित निर्णय, नियमित दिनचर्या और आपसी सहयोग भी महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए शरद पूर्णिमा को केवल दोष दूर करने का दिन मानने के बजाय आत्मचिंतन, प्रार्थना, दान और परिवार के साथ समय बिताने के अवसर के रूप में भी देख सकते हैं।

शरद पूर्णिमा 2026 का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रमा की पूजा, मंत्र जाप, सफेद वस्तुओं का दान, माता लक्ष्मी की आराधना और खीर का भोग लगाने जैसी परंपराएं निभाई जा सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन उपायों को शुभ माना जाता है और इन्हें श्रद्धा के साथ करने की परंपरा रही है।

अगर आप भी इस शरद पूर्णिमा पर पूजा करने वाले हैं, तो अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इन उपायों को अपना सकते हैं। याद रखें कि पूजा का उद्देश्य मन में शांति, सकारात्मकता और दूसरों के प्रति सद्भाव बढ़ाना भी है। बिना किसी डर के, सच्ची श्रद्धा और विवेक के साथ पर्व मनाएं।