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मुस्कान की दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे अनामिका जैन अंबर और सौरभ सुमन, जेल में मुलाकात के बाद लिया बड़ा फैसला

By Aarti Mishra · Published 22 Oct 2026, 22:56 · Updated 22 Oct 2026, 22:56

Anamika Jain Amber and Saurabh Suman to support Muskan daughters education

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में एक नया मोड़ सामने आया है। इस मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत से मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद अब मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच मशहूर कवयित्री डॉ. अनामिका जैन अंबर और कवि सौरभ जैन सुमन ने एक अहम पहल की है। दोनों ने मुस्कान की बेटियों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। इसके लिए कवि दंपती ने जेल में मुस्कान से मुलाकात भी की।

इस पहल के पीछे मुख्य उद्देश्य उन बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित बनाना है, जिनका अपने पिता की हत्या के मामले से कोई लेना-देना नहीं है। कवि दंपती का मानना है कि किसी व्यक्ति के अपराध का असर उसके बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। ऐसे में बच्चियों को अच्छी शिक्षा और बेहतर जीवन के अवसर मिलना जरूरी है।

जेल में मुस्कान से मिले कवि सौरभ सुमन और अनामिका जैन अंबर

सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद कवि सौरभ जैन सुमन और डॉ. अनामिका जैन अंबर ने मेरठ जेल में मुस्कान से मुलाकात की। इस मुलाकात का उद्देश्य उसकी दोनों बेटियों की शिक्षा और भविष्य को लेकर अपनी योजना बताना था।

मुलाकात के बाद कवि दंपती ने बच्चियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाने का ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम मुस्कान के अपराध का समर्थन करना नहीं है, बल्कि उन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता है, जो अपने माता-पिता के फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

अनामिका जैन अंबर के मुताबिक, मुस्कान को मृत्युदंड दिए जाने की खबर सामने आने के बाद उनके मन में उसकी छोटी बेटी की शिक्षा और भविष्य को लेकर विचार आया। इसी के बाद उन्होंने बच्चियों की मदद करने का निर्णय लिया।

दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च आजीवन उठाने का ऐलान

कवि सौरभ जैन सुमन और अनामिका जैन अंबर ने मुस्कान की दोनों बेटियों की शिक्षा का खर्च उठाने की घोषणा की है। सौरभ सुमन ने कहा कि बच्चियों की पढ़ाई पर जितना भी खर्च आएगा, वह उसे वहन करने के लिए तैयार हैं।

इस फैसले को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि परिवार में हुई इस त्रासदी का असर अब बच्चों के भविष्य पर भी पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में शिक्षा बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा होने और बेहतर जीवन बनाने का अवसर देती है।

कवि दंपती की इस पहल से बच्चियों की पढ़ाई को लेकर आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि, उनकी शिक्षा, देखभाल और अभिभावकत्व से जुड़े दूसरे फैसले संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और परिस्थितियों के अनुसार ही तय होंगे।

अनामिका जैन अंबर ने कहा- बच्चियों का क्या दोष?

अनामिका जैन अंबर ने इस मामले में बच्चियों के भविष्य को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि मुस्कान ने जो किया, वह गंभीर अपराध है और उसे लेकर किसी तरह की माफी की मांग नहीं की जा रही है। लेकिन इस घटना में दोनों बच्चियों की कोई भूमिका नहीं है।

उनके मुताबिक, बच्चों को उनके माता-पिता के अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए।

अनामिका जैन अंबर ने यह भी अपील की कि मामले में सजा से संबंधित पहलुओं पर विचार करते समय बच्चियों के भविष्य को भी ध्यान में रखा जाए। उनकी चिंता का केंद्र मुस्कान के अपराध को सही ठहराना नहीं, बल्कि उन बच्चों की जिंदगी है, जिन्हें आगे चलकर अपने भविष्य की जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी।

मुस्कान की छोटी बेटी का जन्म जेल में हुआ था

इस मामले में मुस्कान की दोनों बेटियों का भविष्य अलग-अलग कारणों से चर्चा में है। उसकी बड़ी बेटी पहले से अपने नाना-नानी के पास रह रही है, जबकि छोटी बेटी का जन्म जेल में हुआ था और वह अपनी मां के साथ जेल में रह रही है।

मुस्कान और साहिल को सजा सुनाए जाने के बाद बच्चियों की देखभाल और उनके भविष्य को लेकर कई सवाल उठे हैं। ऐसे में शिक्षा का खर्च उठाने की घोषणा उनके लिए मददगार साबित हो सकती है।

हालांकि, आर्थिक सहायता और बच्चों की कानूनी अभिरक्षा दो अलग-अलग विषय हैं। बच्चियों को कहां रखा जाएगा, उनकी देखभाल कौन करेगा और भविष्य में उनके अभिभावकत्व से जुड़े फैसले किस तरह लिए जाएंगे, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगा।

सौरभ राजपूत हत्याकांड में क्या हुआ था?

मेरठ का सौरभ राजपूत हत्याकांड वर्ष 2025 में सामने आया था और इसने पूरे देश का ध्यान खींचा था। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया था।

पुलिस जांच और मुकदमे के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को हत्या के मामले में दोषी ठहराया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

यह मामला अपने तरीके और साक्ष्य छिपाने के आरोपों के कारण व्यापक चर्चा में रहा। सौरभ के परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया था। वहीं, दोषियों की ओर से फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की बात भी सामने आई है। इसलिए मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

सौरभ के परिवार का दर्द और बच्चियों के भविष्य की चिंता

इस पूरे मामले में एक तरफ सौरभ राजपूत के परिवार का दर्द है, जिसने अपने बेटे को खोया है। दूसरी तरफ मुस्कान की दोनों बेटियां हैं, जिनके सामने भविष्य में कई चुनौतियां आ सकती हैं।

सौरभ के परिवार की अपनी पीड़ा और न्याय को लेकर भावनाएं हैं। वहीं, बच्चियों के लिए शिक्षा, सुरक्षित माहौल और भावनात्मक सहयोग की जरूरत भी अपनी जगह महत्वपूर्ण है। इन दोनों पहलुओं को समझना जरूरी है, क्योंकि किसी भी गंभीर अपराध का प्रभाव केवल पीड़ित और दोषियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों और बच्चों का जीवन भी प्रभावित होता है।

कवि दंपती की पहल इसी मानवीय पहलू पर ध्यान आकर्षित करती है। शिक्षा का खर्च उठाने की घोषणा से बच्चियों को आगे पढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सकता है।

चर्चा में आई कवि दंपती की पहल

सौरभ जैन सुमन और अनामिका जैन अंबर के इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि गंभीर अपराधों के मामलों में बच्चों के हितों की रक्षा कैसे की जाए। बच्चों को उनके माता-पिता के कृत्यों के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। उनका भविष्य सुरक्षित रखना समाज और संबंधित संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

कवि दंपती ने बच्चियों की शिक्षा का खर्च उठाने की घोषणा करके उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी शिक्षा और देखभाल की व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ती है।

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद कवि सौरभ सुमन और अनामिका जैन अंबर की पहल ने बच्चियों के भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया है। दोनों ने उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने का फैसला किया है। यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि किसी अपराध के लिए जिम्मेदार व्यक्ति और उसके बच्चों की जिम्मेदारी अलग-अलग होती है। बच्चियों को शिक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर मिलना उनकी जिंदगी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।