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CM योगी का बड़ा ऐलान! अब अधिकारियों की ACR और प्रमोशन में दिखेगा कामकाज, सही पद पर होगी सही व्यक्ति की तैनाती

By Aarti Mishra · Published 23 Oct 2026, 19:05 · Updated 23 Oct 2026, 19:05

CM Yogi Adityanath मिशन कर्मयोगी कार्यशाला में प्रशासनिक सुधारों पर संबोधन देते हुए

उत्तर प्रदेश में सरकारी कामकाज को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा संदेश दिया है। अब अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता, उपलब्धियों और काम के नतीजों को उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) और पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन में केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी कितनी प्रभावी तरीके से निभा रहा है।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ के लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तीन प्रमुख पहलों पर जोर दिया। इनमें सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करना, उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करना और पंचायतों व नगर निकायों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना शामिल है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकारी व्यवस्था का असली उद्देश्य आम नागरिक की समस्याओं का समय पर समाधान करना होना चाहिए। प्रशिक्षण का लाभ तभी है, जब उसका असर सरकारी कामकाज और जनता को मिलने वाली सेवाओं में दिखाई दे।

CM योगी का फोकस: सही पद पर सही अधिकारी, काम के आधार पर मूल्यांकन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही भूमिका के लिए सही व्यक्ति की अवधारणा को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। इसके तहत अधिकारियों और कर्मचारियों की योग्यता, क्षमता, अनुभव और कार्य प्रदर्शन के अनुरूप जिम्मेदारियां तय करने की व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई।

अक्सर सरकारी विभागों में कर्मचारियों के प्रशिक्षण और नियुक्ति की प्रक्रिया तो होती है, लेकिन उनके काम की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन एक बड़ी चुनौती बना रहता है। ऐसे में कार्य प्रदर्शन को ACR और पदोन्नति से जोड़ने की पहल प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, बेहतर कार्यों और सफल प्रयासों को उनके मूल्यांकन में महत्व देने के लिए उपाम के साथ मिलकर काम किया जाए।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासन में अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान हो और उनकी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, इस दिशा में व्यवस्था किस तरह लागू होगी और उसके विस्तृत नियम क्या होंगे, यह आगे तय होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा उपाम, आधुनिक तकनीक पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में सहयोग का आग्रह किया। बदलते समय में सरकारी अधिकारियों के लिए केवल पारंपरिक प्रशासनिक जानकारी पर्याप्त नहीं है। उन्हें डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक कार्यप्रणालियों की समझ भी होनी चाहिए।

AI और डेटा आधारित तकनीक का इस्तेमाल सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाने, सूचनाओं का विश्लेषण करने और निर्णय लेने में सहायता कर सकता है। इससे सरकारी विभागों के कामकाज में तेजी लाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने प्रशासन में मानवीय संवेदनशीलता के महत्व को भी रेखांकित किया। तकनीक सरकारी सेवाओं को तेज बना सकती है, लेकिन जनता की समस्याओं को समझने और उनके प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए अधिकारियों में सेवा भावना होना भी जरूरी है।

पंचायतों और नगर निकायों के कर्मचारियों की भी बढ़ेगी क्षमता

योगी आदित्यनाथ ने केवल बड़े सरकारी विभागों तक सुधार सीमित रखने के बजाय ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद और नगर निगम आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं। साफ-सफाई, स्थानीय विकास, बुनियादी सुविधाएं, प्रमाणपत्र, शिकायतों का समाधान और विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन जैसे कार्यों में इन संस्थाओं की भूमिका अहम होती है।

अगर इन निकायों में काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण और स्पष्ट जिम्मेदारियां मिलती हैं, तो योजनाओं को जमीन पर लागू करने में मदद मिल सकती है। मुख्यमंत्री की पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक क्षमता बढ़ाना और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

‘ऑफिस-ऑफिस’ जैसी परेशानी खत्म करना प्रशासन की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को अपने छोटे से काम के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकना पड़े, तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

कई बार बुजुर्गों को पेंशन, किसानों को सरकारी योजनाओं, युवाओं को प्रमाणपत्रों और महिलाओं को जरूरी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में नागरिकों का समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकसेवकों के काम का मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि आम नागरिक को कितनी सुविधा मिली और उसकी समस्या का समाधान कितनी जल्दी हुआ। नागरिक संतुष्टि को प्रशासन की सफलता का महत्वपूर्ण पैमाना बताते हुए उन्होंने समयबद्ध समाधान और संवेदनशील व्यवहार की जरूरत पर जोर दिया।

उनके मुताबिक, प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं होना चाहिए। इसका वास्तविक लाभ सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, काम की गुणवत्ता सुधारने और जनता की शिकायतों का प्रभावी समाधान करने में दिखाई देना चाहिए।

मिशन कर्मयोगी से बदलने की कोशिश सरकारी कार्यसंस्कृति

मिशन कर्मयोगी केंद्र सरकार की क्षमता विकास से जुड़ी पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को उनकी भूमिका के अनुसार अधिक सक्षम बनाना और लोकसेवा की गुणवत्ता सुधारना है। इसी के तहत ‘साधना श्रृंखला’ की क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

लखनऊ में आयोजित इस कार्यशाला में उत्तर भारत के आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को अधिक आधुनिक, सक्षम और जरूरत के अनुरूप बनाने पर विचार किया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को बदलती तकनीक और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुसार अपनी कार्यक्षमता विकसित करनी होगी। प्रशासनिक सुधार तभी प्रभावी होंगे, जब प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का इस्तेमाल वास्तविक परिस्थितियों में किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर 19.26 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों के पंजीकरण और लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे होने का उल्लेख भी किया गया। ये आंकड़े प्रशिक्षण के व्यापक दायरे को दिखाते हैं, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि सेवाओं की गुणवत्ता और नागरिकों के अनुभव में कितना सुधार होता है।

गोरखपुर की सड़क का उदाहरण देकर समझाई कार्यक्षमता की अहमियत

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गोरखपुर में सड़क निर्माण से जुड़ा एक उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक सड़क को दो लेन से चार लेन बनाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्माण के दौरान सड़क को जमीन से काफी ऊंचा उठा दिया गया। इससे आसपास रहने वाले लोगों के आवागमन में परेशानी पैदा हो गई।

शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने मौके पर जाकर स्थिति देखी और सड़क को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप बनाने के निर्देश दिए। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने समझाया कि किसी पद पर नियुक्त होना या डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। काम की व्यावहारिक समझ, स्थानीय परिस्थितियों का आकलन और नागरिकों की जरूरतों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

यह उदाहरण प्रशासनिक प्रशिक्षण के उस पहलू को सामने लाता है, जिसमें अधिकारियों को नियमों के साथ-साथ उनके फैसलों के वास्तविक प्रभाव को समझने की जरूरत होती है।

CM योगी का संदेश: नतीजों से साबित हो प्रशासनिक दक्षता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रशासनिक सुधारों को उत्तर प्रदेश के विकास से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि बेहतर नीतियों के साथ उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने वाला सक्षम प्रशासन भी जरूरी है।

सरकारी व्यवस्था में सुधार का फायदा तभी आम जनता तक पहुंचेगा, जब अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं, विभागों के बीच बेहतर समन्वय हो और शिकायतों का समाधान समय पर किया जाए।

ACR और प्रमोशन को कार्य प्रदर्शन से जोड़ने की दिशा में पहल, उपाम को AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का प्रस्ताव और स्थानीय निकायों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर इसी व्यापक सोच का हिस्सा हैं।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश साफ है कि सरकारी पद जिम्मेदारी के साथ आते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की सफलता केवल उनकी नियुक्ति या सेवा अवधि से नहीं, बल्कि उनके काम, व्यवहार और जनता को मिलने वाले परिणामों से भी आंकी जानी चाहिए। यदि इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।