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इटली में क्यों सुलगी विरोध की आग?

By Aarti Mishra · Published 31 Oct 2026, 15:18 · Updated 31 Oct 2026, 15:18

Italy protest 2026 against rising prices, expensive housing and military spending as police confront demonstrators.

यूरोप के खूबसूरत देशों में गिने जाने वाले इटली में इन दिनों सड़कों पर गुस्सा दिखाई दे रहा है। महंगाई, महंगे किराये, शिक्षा का बढ़ता खर्च और सैन्य बजट में बढ़ोतरी जैसे मुद्दों ने आम लोगों की नाराजगी बढ़ा दी है। हालात ऐसे हो गए कि छात्र, मजदूर, किसान और ट्रेड यूनियन के सदस्य बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। 30 अक्टूबर को इटली के कई शहरों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव भी देखने को मिला।

राजधानी रोम से लेकर मिलान, ट्यूरिन, नेपल्स और जेनोआ तक लोगों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब आम परिवारों के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है, तब सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनता की नाराजगी दूर करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

आखिर इटली की जनता क्यों कर रही है विरोध?

इटली में विरोध प्रदर्शन के पीछे कई वजहें हैं। सबसे बड़ी परेशानी लगातार बढ़ती महंगाई और आम जरूरतों पर होने वाला खर्च है। खाने-पीने की चीजों से लेकर बिजली, गैस और ईंधन तक की कीमतों ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हैं, लेकिन आम कर्मचारियों की कमाई उस हिसाब से नहीं बढ़ रही। ऐसे में नौकरी करने वाले लोगों के लिए भी परिवार का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है।

दूसरी बड़ी समस्या मकानों का महंगा किराया है। खासकर रोम जैसे बड़े शहरों में छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए रहने की जगह ढूंढना आसान नहीं है। एक कमरे का किराया भी इतना ज्यादा हो सकता है कि परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

छात्रों का कहना है कि पढ़ाई की फीस और रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उच्च शिक्षा हासिल करना हर परिवार के लिए आसान नहीं रह गया है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी नाराज हैं छात्र

इटली के विरोध प्रदर्शनों में छात्रों की भागीदारी काफी महत्वपूर्ण रही। छात्रों ने केवल महंगी फीस का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि स्कूलों और कॉलेजों की खराब सुविधाओं पर भी सवाल खड़े किए।

उनका आरोप है कि कई शिक्षण संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। स्कूलों की इमारतों की हालत ठीक नहीं है और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त पैसा खर्च नहीं किया जा रहा।

छात्र चाहते हैं कि सरकार शिक्षा के बजट में बढ़ोतरी करे, स्कूलों की मरम्मत कराए और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता दे।

रोम की एक विश्वविद्यालय छात्रा ने एएफपी से बातचीत में कहा कि छात्र अब अपनी समस्याओं को लेकर एक मुश्किल स्थिति में पहुंच चुके हैं। महंगी फीस और किराये का बोझ उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है।

युवाओं का मानना है कि अगर शिक्षा और रोजगार के अवसर बेहतर नहीं हुए तो उनका भविष्य और मुश्किल हो सकता है।

सैन्य बजट बढ़ाने पर क्यों भड़के लोग?

इटली में विरोध का एक बड़ा मुद्दा सरकार की सैन्य खर्च से जुड़ी नीतियां भी हैं। प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि जब देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार जैसी समस्याएं मौजूद हैं, तब सैन्य खर्च बढ़ाने पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है?

मजदूर संगठनों और छात्र समूहों का कहना है कि सरकार को हथियारों और सैन्य तैयारियों के बजाय आम लोगों की जरूरतों पर ज्यादा पैसा खर्च करना चाहिए।

रोम में प्रदर्शन के दौरान कुछ समूहों ने ‘हमें बम नहीं, घर चाहिए’ जैसे नारे भी लगाए। इससे साफ है कि विरोध केवल महंगाई तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।

इसी बीच कई बंदरगाहों पर काम करने वाले मजदूरों ने भी हथियारों की सप्लाई और युद्ध से जुड़े सैन्य अभियानों में बंदरगाहों के इस्तेमाल के खिलाफ आवाज उठाई।

पुलिस ने कैसे संभाले हालात? कई शहरों में हुआ टकराव

30 अक्टूबर को इटली के 40 से ज्यादा शहरों में आम हड़ताल और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। इस दौरान पुलिस की बड़ी संख्या में तैनाती की गई थी, क्योंकि इससे पहले भी कई प्रदर्शनों में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं।

ट्यूरिन में प्रदर्शनकारियों और दंगा नियंत्रण पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। यहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और कुछ जगहों पर लाठियां भी चलाई गईं।

राजधानी रोम में प्रदर्शनकारियों ने टर्मिनी रेलवे स्टेशन से मार्च शुरू किया और कोलोसियम के रास्ते आगे बढ़े। प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने कूड़ेदानों को पलट दिया और एक कूड़ेदान में आग भी लगा दी।

बाद में कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान आठ लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।

मिलान में भी प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर मार्च निकाला और कुछ जगहों पर आगजनी की घटनाएं हुईं। हालांकि, देश के कई अन्य हिस्सों में प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे।

ट्रेड यूनियन की हड़ताल में कितने लोग शामिल हुए?

इटली में 30 अक्टूबर को 24 घंटे की आम हड़ताल का आह्वान ट्रेड यूनियन संगठन USB (Unione Sindacale di Base) ने किया था।

इसमें छात्र, ट्रक ड्राइवर, टैक्सी चालक, किसान, बंदरगाह कर्मचारी और दूसरे क्षेत्रों के मजदूर शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि वेतन बढ़ाया जाए, जरूरी सामानों की कीमतों को नियंत्रित किया जाए और सार्वजनिक सेवाओं में निवेश बढ़ाया जाए।

USB ट्रेड यूनियन ने दावा किया कि देशभर में इस हड़ताल और प्रदर्शनों में 10 लाख से लेकर 15 लाख तक लोग शामिल हुए। हालांकि, सरकार की ओर से भाग लेने वालों का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया।

PM जॉर्जिया मेलोनी ने क्या दिया जवाब?

लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने भी अपनी तरफ से जवाब दिया है। मेलोनी ने युवाओं और परिवारों की समस्याओं को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार की ओर से कुछ ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिनका फायदा लोगों को मिल सकता है।

सरकार ने ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान ट्रक ड्राइवरों, किसानों और मछुआरों के लिए 17.52 करोड़ यूरो के सहायता पैकेज पर सहमति जताई है।

इसके अलावा 2027 के प्रस्तावित बजट में युवाओं और परिवारों के लिए कुछ आर्थिक राहत के उपाय भी शामिल किए जा रहे हैं। इनमें 30 साल से कम उम्र के कर्मचारियों के लिए सालाना 2,500 यूरो के बोनस का प्रस्ताव भी शामिल है।

मेलोनी ने पत्रकारों से बातचीत में उम्मीद जताई कि इन कदमों से उन युवाओं को राहत मिलेगी, जिन्हें लगता है कि सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी सहायता उन लोगों के लिए नहीं है जो प्रदर्शन के नाम पर दुकानों के शीशे तोड़ते हैं और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं।

क्या इटली में आगे भी जारी रहेंगे प्रदर्शन?

इटली में हुए विरोध प्रदर्शन अब सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं। लोगों की मांग केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि सरकार महंगाई, महंगे किराये, कम वेतन और शिक्षा की खराब स्थिति जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले।

छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, जबकि मजदूर बेहतर वेतन और काम करने की सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। वहीं, ट्रेड यूनियन सैन्य खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं।

फिलहाल प्रधानमंत्री मेलोनी की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता का भरोसा वापस जीतने की है। अगर सरकार इन समस्याओं का समाधान नहीं कर पाती है तो आने वाले दिनों में विरोध की आवाज और तेज हो सकती है।

इटली की सड़कों पर उठ रही यह आवाज एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर किसी देश के विकास में प्राथमिकता किसे मिलनी चाहिए? हथियारों और सैन्य ताकत को या फिर आम जनता की शिक्षा, रोजगार, घर और बेहतर जिंदगी को?