रणवीर सिंह धुरंधर प्रमोशन: 1300 करोड़ की फिल्म का प्रचार क्यों नहीं किया? जानें वजह

बॉलीवुड में जब भी किसी बड़ी फिल्म की रिलीज होती है, तो उसके प्रमोशन में सितारे पूरी ताकत लगा देते हैं। टीवी शो, इंटरव्यू, सोशल मीडिया पोस्ट और बड़े-बड़े इवेंट के जरिए फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है। आमतौर पर माना जाता है कि फिल्म का हीरो जितना ज्यादा प्रमोशन करेगा, दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उतनी ही चर्चा बढ़ेगी। लेकिन रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर सामने आई जानकारी ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिल्म की शानदार सफलता और करीब 1300 करोड़ रुपये की कमाई की चर्चा के बीच सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि आखिर रणवीर सिंह ने फिल्म के प्रमोशन में सक्रिय भूमिका क्यों नहीं निभाई? जिस अभिनेता की एनर्जी और बेबाक अंदाज को उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, वह अपनी ही फिल्म के प्रचार से दूर क्यों नजर आए? अब फिल्म के मार्केटिंग हेड वरुण गुप्ता के बयान के बाद इस सवाल को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है।
‘धुरंधर’ के प्रमोशन से रणवीर सिंह की दूरी ने क्यों खींचा ध्यान?
रणवीर सिंह बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में गिने जाते हैं, जो अपनी फिल्मों के प्रचार के दौरान भी खूब सुर्खियां बटोरते हैं। उनका अलग पहनावा, मजेदार बातचीत और जोशीला अंदाज अक्सर फिल्मों के प्रमोशन को भी चर्चा का विषय बना देता है। ऐसे में ‘धुरंधर’ जैसी बड़ी फिल्म के साथ उनका प्रमोशन में नजर न आना लोगों के लिए हैरानी की बात बन गया।
दर्शकों के मन में स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठा कि क्या इसके पीछे कोई खास रणनीति थी या फिर फिल्म की मार्केटिंग टीम ने जानबूझकर प्रचार का तरीका अलग रखा था? किसी बड़ी फिल्म के प्रचार में मुख्य अभिनेता की भूमिका काफी अहम मानी जाती है। इसलिए रणवीर की गैरमौजूदगी ने फिल्म की मार्केटिंग को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी।
हालांकि, किसी अभिनेता का प्रमोशनल कार्यक्रमों में कम नजर आना अपने आप में किसी विवाद या नाराजगी का सबूत नहीं है। कई बार फिल्मों की मार्केटिंग टीम कहानी, दर्शकों की रुचि और रिलीज की रणनीति को देखते हुए प्रचार का अलग तरीका अपनाती है।
मार्केटिंग हेड वरुण गुप्ता ने क्या बताया?
फिल्म ‘धुरंधर’ के मार्केटिंग हेड वरुण गुप्ता का नाम इस चर्चा के बीच सामने आया है। उनके बयान को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रणवीर सिंह का प्रमोशन से दूर रहना पहले से तय योजना का हिस्सा था?
फिल्म की मार्केटिंग में कई स्तरों पर काम किया जाता है। इसमें पोस्टर और ट्रेलर जारी करने से लेकर सोशल मीडिया कैंपेन, मीडिया कवरेज, दर्शकों के बीच उत्सुकता पैदा करने और फिल्म की पहचान बनाने तक कई गतिविधियां शामिल होती हैं। हर फिल्म के लिए प्रचार का तरीका एक जैसा नहीं होता।
अगर किसी फिल्म की टीम पारंपरिक प्रमोशन के बजाय दूसरे माध्यमों पर ज्यादा भरोसा करती है, तो उसका उद्देश्य दर्शकों के बीच उत्सुकता बनाए रखना भी हो सकता है। लेकिन ‘धुरंधर’ के मामले में रणवीर सिंह को लेकर टीम की वास्तविक रणनीति क्या थी, इसे समझने के लिए वरुण गुप्ता के बयान के सटीक शब्दों और पूरे संदर्भ को देखना जरूरी है।
बिना उनके बयान की पुष्टि किए यह कहना सही नहीं होगा कि रणवीर ने किसी खास वजह से फिल्म का प्रमोशन नहीं किया या इसके पीछे कोई व्यक्तिगत विवाद था।
क्या फिल्म की सफलता के लिए जरूरी है हीरो का प्रमोशन?
बॉलीवुड में लंबे समय से यह धारणा रही है कि किसी बड़े स्टार की मौजूदगी फिल्म के प्रचार को मजबूत बनाती है। जब अभिनेता इंटरव्यू देता है, प्रशंसकों से बातचीत करता है और सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़ी जानकारी साझा करता है, तो फिल्म की चर्चा तेजी से बढ़ सकती है।
लेकिन बदलते दौर में फिल्म की सफलता सिर्फ अभिनेता के प्रमोशन पर निर्भर नहीं करती। कहानी, निर्देशन, अभिनय, संगीत, ट्रेलर, दर्शकों की प्रतिक्रिया और फिल्म को लेकर बनी चर्चा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आज दर्शक किसी फिल्म को देखने का फैसला कई वजहों से लेते हैं। कुछ लोग अपने पसंदीदा अभिनेता के लिए सिनेमाघर जाते हैं, जबकि कई दर्शक कहानी, एक्शन, रहस्य या दूसरे दर्शकों की प्रतिक्रिया से प्रभावित होते हैं। सोशल मीडिया पर फिल्म के दृश्य और चर्चाएं भी दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा सकती हैं।
यही वजह है कि किसी फिल्म की मार्केटिंग का मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि उसका मुख्य अभिनेता कितने इंटरव्यू या प्रमोशनल इवेंट में शामिल हुआ।
‘धुरंधर’ की चर्चा ने क्यों बढ़ाई दर्शकों की उत्सुकता?
‘धुरंधर’ को लेकर हो रही चर्चा यह दिखाती है कि दर्शक केवल फिल्म की कहानी और कलाकारों के प्रदर्शन में ही नहीं, बल्कि उसके पीछे की रणनीति में भी दिलचस्पी रखते हैं। जब कोई फिल्म बड़ी सफलता हासिल करने का दावा करती है या उसके कलेक्शन को लेकर सुर्खियां बनती हैं, तो दर्शक यह जानना चाहते हैं कि उसकी सफलता के पीछे कौन-कौन से कारण रहे।
फिल्म की मार्केटिंग भी इसी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। किसी फिल्म का प्रचार दर्शकों को उसके बारे में जानकारी देता है, लेकिन अंतिम फैसला दर्शक सिनेमाघर में फिल्म देखने के बाद ही करते हैं। अगर कहानी और प्रस्तुति दर्शकों को पसंद आती है, तो सकारात्मक प्रतिक्रिया फिल्म की चर्चा को और आगे बढ़ा सकती है।
हालांकि, करीब 1300 करोड़ रुपये के कलेक्शन का आंकड़ा इस्तेमाल करते समय यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह कमाई भारत में हुई है, दुनियाभर में या किसी अन्य अवधि के आधार पर बताई गई है। बॉक्स ऑफिस के अलग-अलग आंकड़ों में अंतर हो सकता है, इसलिए सही स्रोत और अवधि के साथ जानकारी देना जरूरी है।
क्या बदलेगा फिल्मों के प्रमोशन का तरीका?
आज फिल्म इंडस्ट्री में मार्केटिंग के तरीके लगातार बदल रहे हैं। पहले जहां टीवी इंटरव्यू, अखबारों में विज्ञापन और बड़े प्रमोशनल इवेंट प्रमुख माध्यम हुआ करते थे, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
फिल्म निर्माता दर्शकों की पसंद और ऑनलाइन प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए प्रचार की योजना बनाते हैं। किसी फिल्म के लिए ट्रेलर और टीजर सबसे प्रभावी माध्यम हो सकते हैं, तो किसी दूसरी फिल्म के लिए कलाकारों के इंटरव्यू और दर्शकों से सीधा संवाद ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
ऐसे में भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि बड़ी फिल्मों के निर्माता प्रचार के पारंपरिक तरीकों पर कितना भरोसा करते हैं और कितनी बार नई रणनीतियां अपनाते हैं।
रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ के प्रमोशन को लेकर उठे सवाल ने फिल्म की मार्केटिंग रणनीति पर चर्चा तेज कर दी है। दर्शक जानना चाहते हैं कि रणवीर ने प्रचार में सक्रिय भूमिका क्यों नहीं निभाई और मार्केटिंग हेड वरुण गुप्ता ने इस बारे में क्या खुलासा किया।
फिलहाल इस सवाल का सटीक जवाब वरुण गुप्ता के मूल बयान के संदर्भ से ही स्पष्ट होगा। इतना जरूर है कि किसी फिल्म की सफलता को केवल उसके अभिनेता के प्रमोशन से जोड़कर देखना सही नहीं है। फिल्म की कहानी, निर्देशन, दर्शकों की प्रतिक्रिया और मार्केटिंग की पूरी योजना मिलकर उसकी लोकप्रियता को प्रभावित करते हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि ‘धुरंधर’ के प्रमोशन से जुड़ी पूरी कहानी क्या थी और रणवीर सिंह की भूमिका को लेकर मार्केटिंग टीम ने वास्तव में क्या कहा था।