निठारी केस में बरी होने के 10 महीने बाद सुरेंद्र कोली की मौत, हरिद्वार में मिला शव

हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत के बाद एक बार फिर उसकी जेल की जिंदगी चर्चा में है। करीब 19 साल तक जेल में रहने वाले कोली ने अपनी जिंदगी का आखिरी जेल समय लक्सर जेल में बिताया था। यहां वह दूसरे कैदियों के साथ एक बैरक में रहता था, कुछ कैदियों से उसकी दोस्ती भी हो गई थी, लेकिन निठारी कांड का जिक्र होते ही वह इस मुद्दे पर चुप हो जाता था।
11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कोली लक्सर जेल से बाहर आया था। निठारी से जुड़े सभी 13 मामलों में उसे अदालतों से बरी किया जा चुका था। जेल से निकलने के करीब 10 महीने बाद 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में उसकी मौत की खबर सामने आई। पुलिस ने शुरुआती तौर पर आत्महत्या की आशंका जताई है, जबकि एक पीड़ित परिवार ने उसकी मौत पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
लक्सर जेल में 14 महीने कैसी थी कोली की जिंदगी?
सुरेंद्र कोली सितंबर 2024 में लक्सर जेल पहुंचा था और 11 नवंबर 2025 तक वहीं रहा। यानी रिहाई से पहले करीब 14 महीने उसने इसी जेल में बिताए।
लक्सर जेल के अधीक्षक ब्रजेश सिंह के मुताबिक, जेल में उसका व्यवहार सामान्य था। जेल प्रशासन को उसके व्यवहार में ऐसी कोई बात नजर नहीं आई थी, जिससे किसी बड़ी परेशानी का संकेत मिले। रिहाई की खबर मिलने पर भी उसके व्यवहार में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया।
35 कैदियों के साथ एक ही बैरक में रहता था
लक्सर जेल में सुरेंद्र कोली को एक ऐसी बैरक में रखा गया था, जहां उसके साथ करीब 35 दूसरे कैदी भी रहते थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, वह जेल में बिल्कुल अकेला नहीं रहता था। दूसरे कैदियों से सामान्य बातचीत करता था और उनमें से कुछ के साथ उसकी अच्छी दोस्ती भी हो गई थी। करीब आठ कैदियों के साथ उसकी ज्यादा उठना-बैठना बताया गया है।
इन कैदियों के साथ वह खाना खाता, बातचीत करता और रोजमर्रा का समय बिताता था। बाहर की दुनिया में जिस व्यक्ति का नाम निठारी कांड के कारण लगातार चर्चा में रहा, जेल के अंदर उसकी दिनचर्या काफी सामान्य बताई गई।
सुबह जल्दी उठता, रात को जल्दी सो जाता था
लक्सर जेल में कोली की दिनचर्या भी काफी तय थी। रिपोर्ट के मुताबिक वह सुबह करीब 5:30 बजे उठता था। इसके बाद जेल की सामान्य दिनचर्या के अनुसार समय बिताता था।
दोपहर का खाना करीब 11:30 बजे होता था। इसके बाद वह दूसरे कैदियों के साथ बैरक की सफाई में भी हाथ बंटाता था। शाम को करीब 5:30 बजे खाना मिलता था और रात लगभग 8:30 बजे तक वह सो जाता था।
जेल में उसे कोई नियमित औपचारिक काम नहीं सौंपा गया था। यानी लक्सर जेल में उसका ज्यादातर समय सामान्य जेल दिनचर्या के बीच ही बीता।
निठारी कांड का नाम आते ही साध लेता था चुप्पी
सुरेंद्र कोली की जेल जिंदगी की सबसे खास बात यही बताई जाती है कि वह निठारी कांड के बारे में दूसरे कैदियों से बात नहीं करता था।
कैदी साथी इस मामले को लेकर उससे सवाल करते थे और जानना चाहते थे कि आखिर उस मामले की सच्चाई क्या थी। लेकिन जैसे ही बातचीत निठारी कांड की तरफ जाती, कोली चुप हो जाता था।
रिपोर्टों के अनुसार इस मामले को लेकर वह केवल अपने वकील से बात करता था। बाकी कैदियों के साथ वह दूसरी सामान्य बातें करता था, लेकिन निठारी कांड पर चर्चा करने से बचता था।
हालांकि उसकी चुप्पी को किसी अपराध या निर्दोषता का सबूत नहीं माना जा सकता। किसी आपराधिक मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही निकाला जाता है।
जेल में परिवार से भी होती थी मुलाकात
करीब 19 साल जेल में बिताने के दौरान परिवार के लोगों का उससे मिलना भी जारी रहा।
लक्सर जेल में रहने के दौरान उसके बेटे, पत्नी और भाई उससे मिलने आते थे। रिपोर्टों के मुताबिक परिवार की मुलाकात बहुत बार नहीं होती थी और पत्नी तथा बेटा करीब तीन-चार महीने में एक बार उससे मिलने आते थे।
उसके वकील भी उससे मिलते थे और कानूनी मामलों पर बातचीत करते थे। उस समय भी निठारी केस से जुड़ी कानूनी लड़ाई उसके जीवन का बड़ा हिस्सा थी।
कभी फांसी की सजा तक पहुंच गया था मामला
सुरेंद्र कोली का नाम 2006 में निठारी मामले के सामने आने के बाद देशभर में चर्चा में आया था। उस समय उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हुए और अलग-अलग मामलों में उसे दोषी ठहराया गया।
एक समय उसे मौत की सजा भी सुनाई गई थी। लेकिन इसके बाद लंबे समय तक अदालतों में कानूनी लड़ाई चलती रही।
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में उसे बरी कर दिया। इसके बाद इन फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कार्यवाही हुई। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में भी उसे बरी कर दिया। इसके साथ ही निठारी से जुड़े सभी 13 मामलों में उसकी दोषसिद्धि कायम नहीं रही।
11 नवंबर 2025 को खुला जेल का दरवाजा
करीब 19 साल जेल में रहने के बाद 11 नवंबर 2025 को सुरेंद्र कोली लक्सर जेल से बाहर आया।
उस समय वह अपने वकीलों के साथ जेल से निकला था। जेल के बाहर पत्रकार मौजूद थे, लेकिन उसने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। उसके वकीलों ने भी उस समय यह साफ नहीं किया कि वह आगे कहां जाएगा।
जेल अधिकारियों के मुताबिक रिहाई की खबर मिलने पर भी उसका व्यवहार सामान्य था। वह अचानक किसी तरह का उत्साह या घबराहट दिखाता नजर नहीं आया।
हरिद्वार में बदली पहचान, शुरू की नई जिंदगी
जेल से बाहर आने के बाद कोली हरिद्वार पहुंचा। वहां उसने अपनी पहचान ‘सदा राम’ के नाम से बताई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हरिद्वार में उसे रहने के लिए कमरा और काम ढूंढने में स्थानीय लोगों से मदद मिली। उसने काम करना शुरू किया और बाद में चाय की दुकान भी चलाने लगा।
यानी जेल से बाहर आने के बाद वह एक नई पहचान के साथ आम जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहा था। वहां रहने वाले कई लोगों को उसकी असली पहचान के बारे में जानकारी नहीं थी। उसकी मौत के बाद उसकी पहचान सामने आई।
फिर सामने आई सुरेंद्र कोली की मौत की खबर
18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत की खबर सामने आई। वह एक चाय की दुकान पर मृत मिला।
पुलिस ने शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई है। हालांकि मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा पोस्टमार्टम जैसी प्रक्रियाओं के बाद ही सामने आएगा।
उसकी मौत के बाद एक पीड़ित परिवार ने इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए और हत्या की आशंका जताते हुए जांच की मांग की। यह परिवार की ओर से लगाया गया आरोप है और अभी इसे जांच में साबित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
अदालत में बदल गई थी निठारी केस की पूरी तस्वीर
सुरेंद्र कोली की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस व्यक्ति को कभी निठारी मामलों में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा तक सुनाई गई, वही व्यक्ति बाद में सभी 13 मामलों में अदालतों से बरी हुआ।
बाद की न्यायिक प्रक्रिया में जांच और सबूतों को लेकर कई सवाल सामने आए। अदालतों ने अभियोजन के मामलों को कानूनी कसौटी पर परखा और अंततः कोली को सभी 13 मामलों में बरी कर दिया।
इसलिए उसकी मौत की खबर लिखते समय उसे अब ‘निठारी कांड का दोषी’ कहना सही नहीं होगा। वह निठारी मामलों में आरोपी रहा था, लेकिन अदालतों से सभी 13 मामलों में बरी हो चुका था।
19 साल जेल, फिर सिर्फ 10 महीने की आजादी
सुरेंद्र कोली की जिंदगी का आखिरी अध्याय काफी अलग रहा। करीब 19 साल तक जेल में रहने के बाद उसे नवंबर 2025 में रिहाई मिली। इसके बाद उसने हरिद्वार में एक नई पहचान के साथ जिंदगी शुरू की।
लेकिन जेल से बाहर आने के करीब 10 महीने बाद उसकी मौत हो गई।
अब उसकी मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच सबसे अहम है। पुलिस की शुरुआती आशंका क्या अंतिम निष्कर्ष में बदलती है या जांच में कोई दूसरी तस्वीर सामने आती है, यह आगे की जांच से स्पष्ट होगा।
एक लंबी जेल यात्रा के बाद सुरेंद्र कोली की कहानी का यह अध्याय भले ही उसकी मौत के साथ खत्म हो गया हो, लेकिन निठारी मामले से जुड़े कई सवाल आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।