Digital Gold पर सरकार की नजर: RBI और SEBI कर सकते हैं निगरानी, हर डिजिटल सोने के पीछे रखना पड़ सकता है असली सोना

आज के समय में सोना खरीदने के लिए न तो ज्वेलरी की दुकान तक जाने की जरूरत है और न ही घर में सोने के सिक्के या बार रखने की। मोबाइल उठाइए, किसी ऐप पर जाइए और कुछ ही रुपये में Digital Gold खरीद लीजिए। यही आसान तरीका पिछले कुछ समय में लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है।
लेकिन अब इसी Digital Gold को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकार इसके नियमों को सख्त करने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, RBI और SEBI की निगरानी में Digital Gold को लाने और हर डिजिटल यूनिट के पीछे Physical Gold यानी असली सोना रखने की व्यवस्था पर चर्चा चल रही है।
अगर आगे चलकर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो Digital Gold खरीदने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए यह बड़ा बदलाव हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर सरकार को Digital Gold के लिए नए नियमों की जरूरत क्यों महसूस हुई? और अगर हर Digital Gold के पीछे असली सोना रखना जरूरी हुआ तो आम ग्राहक पर इसका क्या असर पड़ेगा?
आइए पूरी कहानी आसान भाषा में समझते हैं।
Digital Gold आखिर है क्या?
सबसे पहले समझते हैं कि Digital Gold होता क्या है।
मान लीजिए आपके पास सिर्फ 100 या 200 रुपये हैं और आप सोने में थोड़ी रकम लगाना चाहते हैं। पहले इतनी छोटी रकम में सोना खरीदना आसान नहीं था। लेकिन Digital Gold ने यह काम काफी आसान कर दिया।
आप किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या ऐप के जरिए छोटी रकम का सोना खरीद सकते हैं। आपके खाते में खरीदे गए सोने की मात्रा डिजिटल रूप में दिखाई जाती है। आमतौर पर प्लेटफॉर्म की ओर से दावा किया जाता है कि ग्राहक के खरीदे गए Digital Gold के बराबर Physical Gold सुरक्षित vault में रखा गया है।
यानी सोना आपके मोबाइल में नहीं रखा होता। मोबाइल पर सिर्फ उसका डिजिटल रिकॉर्ड दिखाई देता है, जबकि उसके पीछे असली सोना रखा होने का दावा किया जाता है।
यही वजह है कि Digital Gold धीरे-धीरे छोटे निवेशकों के बीच लोकप्रिय हुआ है।
अब RBI और SEBI की एंट्री क्यों?
यहीं से पूरी खबर महत्वपूर्ण हो जाती है।
Digital Gold की लोकप्रियता बढ़ रही है, लेकिन लंबे समय से इसके regulatory status को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। नवंबर 2025 में SEBI ने खुद लोगों को Digital Gold को लेकर सावधान किया था।
SEBI ने कहा था कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Digital Gold या E-Gold products की पेशकश कर रहे हैं, लेकिन ये SEBI द्वारा regulated gold products से अलग हैं। SEBI के अनुसार ऐसे Digital Gold products उस समय न तो securities के रूप में notified थे और न ही commodity derivatives के तौर पर regulated थे।
इसका मतलब यह हुआ कि Digital Gold में पैसा लगाने वाले लोगों को वही investor-protection framework नहीं मिलता जो SEBI-regulated products में मिलता है।
अब सरकार इसी gap को दूर करने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
हर Digital Gold के पीछे होगा Physical Gold?
इस पूरी खबर का सबसे अहम हिस्सा Physical Gold backing है।
सरकार की चर्चा में यह प्रस्ताव सामने आया है कि Digital Gold की हर unit के पीछे वास्तविक Physical Gold मौजूद होना चाहिए।
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए।
अगर किसी ग्राहक ने 1 ग्राम Digital Gold खरीदा, तो उस 1 ग्राम के पीछे vault में वास्तविक सोना मौजूद होना चाहिए। इसी तरह अगर हजारों या लाखों ग्राहकों ने मिलकर बड़ी मात्रा में Digital Gold खरीदा है, तो platform के पास उसके अनुरूप Physical Gold होना चाहिए।
ऐसी व्यवस्था लागू होने पर Digital Gold बेचने वाली कंपनियों के लिए सिर्फ डिजिटल रिकॉर्ड दिखाना काफी नहीं होगा। उन्हें अपने पास मौजूद Physical Gold और ग्राहकों के नाम पर जारी Digital Gold के बीच उचित backing और records बनाए रखने पड़ सकते हैं।
यही बदलाव इस प्रस्ताव को खास बनाता है।
सरकार क्यों बदलना चाहती है नियम?
Digital Gold का बाजार अब छोटा नहीं रह गया है। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, इस sector में करीब 3 अरब डॉलर के assets बताए जा रहे हैं।
जैसे-जैसे इसमें ज्यादा लोग जुड़ रहे हैं, वैसे-वैसे कुछ सवाल भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
मसलन—
क्या ग्राहक के नाम पर दिखाया गया पूरा सोना वास्तव में मौजूद है?
सोना आखिर किसके पास रखा है?
अगर platform बंद हो जाए तो ग्राहक के पैसे या सोने का क्या होगा?
Physical Gold की जांच कौन करेगा?
ग्राहक और platform के बीच विवाद होने पर शिकायत कहां की जाएगी?
अभी Digital Gold का regulatory framework Gold ETF या दूसरे regulated gold products जैसा नहीं है। ऐसे में सरकार इन सवालों को लेकर एक स्पष्ट व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है।
RBI और SEBI दोनों क्यों?
यह सवाल भी काफी महत्वपूर्ण है कि आखिर इस मामले में RBI और SEBI दोनों का नाम क्यों सामने आ रहा है?
RBI देश की banking और financial system से जुड़ी गतिविधियों का प्रमुख regulator है, जबकि SEBI securities market की निगरानी करता है।
सरकार की मौजूदा चर्चा में Digital Gold को Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत security के रूप में मान्यता देने की संभावना पर भी बात हो रही है। Economic Times के अनुसार, Finance Ministry ने regulators, banks और दूसरे stakeholders से इस विषय पर views मांगे हैं।
अगर Digital Gold को securities के रूप में मान्यता मिलती है, तो SEBI की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं इसके financial और payment-related पहलुओं में RBI की भूमिका पर भी विचार किया जा सकता है।
हालांकि इसका अंतिम regulatory structure क्या होगा, यह अभी तय नहीं हुआ है।
SEBI पहले ही कर चुका है लोगों को सावधान
Digital Gold को लेकर SEBI की चिंता पहली बार सामने नहीं आई है।
8 नवंबर 2025 को SEBI ने Digital Gold को लेकर बाकायदा public caution जारी किया था। इसमें regulator ने कहा था कि Digital Gold/E-Gold products, SEBI-regulated gold products से अलग हैं और ऐसे products SEBI के regulatory framework के बाहर operate करते हैं।
SEBI ने यह भी कहा था कि ऐसे products में counterparty और operational risks हो सकते हैं और securities-market वाले investor protection mechanisms इन products पर उपलब्ध नहीं होते।
यानी Digital Gold को सिर्फ इसलिए SEBI-regulated product नहीं मानना चाहिए क्योंकि इसे किसी बड़े ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदा जा रहा है।
Digital Gold और Gold ETF एक जैसे नहीं
बहुत से लोग Digital Gold और Gold ETF को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं।
Gold ETF SEBI के regulatory framework के तहत आता है। इसे stock exchange के माध्यम से खरीदा और बेचा जा सकता है।
वहीं Digital Gold आमतौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदा जाता है और इसकी व्यवस्था platform तथा उसके bullion/vaulting partners के बीच होती है।
इसके अलावा Electronic Gold Receipts यानी EGRs भी एक अलग regulated व्यवस्था है। SEBI के framework के अनुसार EGR को securities के रूप में notify किया गया है। इसमें physical gold को vault में जमा करने के बाद उसके आधार पर electronic receipt बनाई जाती है, जिसे stock exchange पर trade किया जा सकता है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत physical gold में बदला जा सकता है।
इसलिए तीनों को एक ही चीज समझना सही नहीं होगा।
अगर नया नियम आया तो आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर सरकार आगे चलकर Digital Gold को formal regulatory framework के तहत लाती है, तो इसका सबसे बड़ा असर platforms पर compliance के रूप में देखने को मिल सकता है।
कंपनियों को संभवतः यह साबित करना होगा कि ग्राहकों को जितना Digital Gold बेचा गया है, उसके अनुरूप Physical Gold उपलब्ध है।
इसके अलावा gold की custody, storage, audit, records और redemption जैसी चीजों को लेकर भी ज्यादा स्पष्ट नियम बनाए जा सकते हैं।
आम ग्राहक के लिए इसका मतलब हो सकता है कि उसे अपने Digital Gold को लेकर ज्यादा जानकारी मिल सके—जैसे उसका gold कहां रखा है, किस व्यवस्था के तहत रखा है और उसे बेचने या physical gold में बदलने की प्रक्रिया क्या है।
लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन संभावित नियमों का अंतिम स्वरूप अभी सामने नहीं आया है।
क्या Digital Gold बंद होने वाला है?
इस खबर को पढ़कर कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी आ सकता है कि क्या Digital Gold अब बंद हो जाएगा?
ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा।
मौजूदा रिपोर्टों में Digital Gold को बंद करने की बात नहीं है। चर्चा इसका regulatory framework मजबूत करने को लेकर है। सरकार इस sector को नियमों के दायरे में लाने और investor protection को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
इसलिए अभी ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन Digital Gold को खरीदते समय उसके regulatory status और platform की terms को समझना जरूरी है।
ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बात
Digital Gold खरीदना आसान है, लेकिन आसान होने का मतलब यह नहीं कि इसमें कोई risk नहीं है।
अगर आप Digital Gold खरीदते हैं तो यह जरूर देखें कि—
- Digital Gold किस company या platform के जरिए खरीदा जा रहा है।
- Physical Gold की custody किसके पास है।
- Gold storage और insurance की क्या व्यवस्था है।
- Buy और sell price में कितना अंतर है।
- Physical delivery की सुविधा है या नहीं।
- Delivery और redemption पर कितने charges लगते हैं।
- Platform की terms and conditions क्या हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Digital Gold को Gold ETF या SEBI-regulated investment product समझकर निवेश न करें। SEBI ने इस अंतर को पहले ही स्पष्ट किया है।
आगे की नजर अब किस पर रहेगी?
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार की बातचीत आगे किस दिशा में जाती है।
अगर Digital Gold को security के रूप में मान्यता देने और RBI-SEBI की निगरानी में लाने का प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो इस पूरे sector के लिए नया regulatory framework बन सकता है।
इसके साथ Physical Gold backing की शर्त भी महत्वपूर्ण होगी। इससे Digital Gold platforms को यह सुनिश्चित करना पड़ सकता है कि ग्राहकों को बेचे गए digital units के पीछे पर्याप्त वास्तविक सोना मौजूद हो।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अंतिम नियम बिल्कुल किस तरह होंगे। इसके लिए सरकार और regulators की ओर से आधिकारिक framework या notification का इंतजार करना होगा।
Digital Gold की चमक के पीछे अब असली सोने की जांच!
Digital Gold ने सोना खरीदने का तरीका जरूर बदल दिया है। अब कुछ रुपये से भी मोबाइल के जरिए सोना खरीदा जा सकता है। लेकिन जैसे-जैसे यह बाजार बड़ा हुआ, वैसे-वैसे इसके regulation और customer protection को लेकर सवाल भी सामने आए।
अब सरकार इन सवालों का जवाब एक नए regulatory framework के जरिए देने पर विचार कर रही है।
RBI और SEBI की संभावित निगरानी, हर Digital Gold unit के पीछे Physical Gold की अनिवार्यता और इसे security के रूप में मान्यता देने की चर्चा—ये तीनों बदलाव अगर आगे बढ़ते हैं, तो Digital Gold market की तस्वीर बदल सकती है।
फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि नए नियम अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं। इसलिए Digital Gold खरीदने वालों को किसी भी खबर को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय platform की शर्तों और इसके regulatory status को समझकर ही आगे बढ़ना चाहिए।