KHABAR BITE की महत्वपूर्ण खबरों और अपडेट के लिए जुड़े रहें
Bite Size News, Right Size Information
👤
BREAKING NEWS
मुकेश अंबानी की दौलत में एक दिन में ₹52 हजार करोड़ का उछाल, बने दुनिया के सबसे बड़े वेल्थ गेनरयूपी में नवंबर की शुरुआत में ही छाया घना कोहरा, बनारस में बदला मौसम का मिजाज, 3 विमानों को करना पड़ा डायवर्टविदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में भारतीय बाजार से निकाले ₹34,843 करोड़, 2026 में अब तक ₹2.95 लाख करोड़ की निकासी, शेयर बाजार में 13% की गिरावटदिवाली पर दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों को मिली मंजूरी, सुप्रीम कोर्ट ने तय की टाइम लिमिट, जानें कब और कितनी देर कर सकेंगे आतिशबाजीBigg Boss 20: इस हफ्ते कुल 6 खिलाड़ी हुए नॉमिनेट, इन 2 के बाहर होने का सबसे ज्यादा चांस?आज अहोई अष्टमी पर कितने बजे निकलेंगे तारे? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और तारों को अर्घ्य देने का सही तरीकाजेल से बाहर आते ही आजम खान को ED ने दबोचा, 11 महीने बाद मिली आजादी फिर बनी गिरफ्तारी; जौहर यूनिवर्सिटी केस में बढ़ीं मुश्किलेंसरदार पटेल की पर गुजरात में एकता का महाकुंभ, PM मोदी ने संभाली समारोह की कमानमुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (CM-YUVA): युवाओं को मिलेगा अपना व्यवसाय शुरू करने का सुनहरा अवसर, ₹5 लाख तक ब्याज-मुक्त एवं बिना गारंटी ऋणइटली में क्यों सुलगी विरोध की आग?
फाइनेंस & मार्केट

विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में भारतीय बाजार से निकाले ₹34,843 करोड़, 2026 में अब तक ₹2.95 लाख करोड़ की निकासी, शेयर बाजार में 13% की गिरावट

By Aarti Mishra · Published 02 Nov 2026, 18:20 · Updated 02 Nov 2026, 18:20

अक्टूबर 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से ₹34,843 करोड़ निकाले, सालाना FPI आउटफ्लो ₹2.95 लाख करोड़ पहुंचा।

भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 काफी उतार-चढ़ाव भरा साबित हो रहा है। एक तरफ घरेलू निवेशक बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अक्टूबर महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹34,843 करोड़ निकाल लिए। इसके साथ ही साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी बढ़कर लगभग ₹2.95 लाख करोड़ पहुंच गई है।

खास बात यह है कि अक्टूबर लगातार दूसरा महीना रहा, जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में बड़ी बिकवाली की। इससे पहले सितंबर में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से ₹35,861 करोड़ निकाले थे। लगातार हो रही इस बिकवाली का असर शेयर बाजार के प्रदर्शन पर भी देखने को मिला है। साल के दौरान निफ्टी में करीब 13 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बाजार में कुछ सुधार भी देखने को मिला।

विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली के पीछे बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती और भारतीय कंपनियों की कमाई को लेकर बनी चिंताएं प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।

अक्टूबर में विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹34,843 करोड़

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर 2026 में भारतीय शेयर बाजार से कुल ₹34,843 करोड़ की शुद्ध निकासी की।

सितंबर में भी विदेशी निवेशकों ने ₹35,861 करोड़ के शेयर बेचे थे। हालांकि, जुलाई और अगस्त में उनका रुख सकारात्मक रहा था। जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹29,631 करोड़ का निवेश किया था।

लेकिन सितंबर से निवेशकों का रुख अचानक बदल गया और उन्होंने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया। अक्टूबर में भी यह सिलसिला जारी रहा।

इन दोनों महीनों की भारी बिकवाली के कारण विदेशी निवेशकों की सालाना निकासी का आंकड़ा ₹2.95 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली का बाजार की दिशा पर काफी प्रभाव पड़ता है।

आखिरी सप्ताह में विदेशी निवेशकों ने फिर की खरीदारी

हालांकि अक्टूबर का पूरा महीना विदेशी बिकवाली के नाम रहा, लेकिन महीने के आखिरी सप्ताह में निवेशकों के रुख में कुछ बदलाव दिखाई दिया।

26 से 30 अक्टूबर के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹6,300 करोड़ का निवेश किया। इससे पहले 23 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में उन्होंने करीब ₹2,700 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की थी।

यह बदलाव बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। इससे पता चलता है कि कुछ विदेशी निवेशक मौजूदा स्तरों पर भारतीय शेयरों में दोबारा अवसर तलाश रहे हैं।

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक सप्ताह की खरीदारी को विदेशी निवेशकों की वापसी नहीं माना जा सकता। जब तक लगातार कई सप्ताह तक निवेश का सकारात्मक रुझान नहीं दिखता, तब तक यह कहना मुश्किल होगा कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में दोबारा भरोसा जताना शुरू कर दिया है।

विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा क्यों निकाल रहे हैं?

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों को माना जा रहा है।

1. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

जब कच्चा तेल महंगा होता है तो भारत का आयात बिल बढ़ जाता है। इससे चालू खाते के घाटे पर दबाव पड़ सकता है और रुपये की कीमत भी प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा पेट्रोल, डीजल, परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ता है। विदेशी निवेशक इन जोखिमों को देखते हुए भारतीय शेयरों में निवेश कम कर सकते हैं।

2. अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें

अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला बेहतर रिटर्न भी भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी की एक बड़ी वजह है।

जब अमेरिकी बॉन्ड पर आकर्षक ब्याज मिलता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों में जोखिम लेने की जरूरत कम हो जाती है। वे भारतीय शेयरों से पैसा निकालकर अमेरिका जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।

इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी का प्रवाह प्रभावित होता है।

3. डॉलर की मजबूती और रुपये पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होने पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है। भारतीय रुपये में कमजोरी आने से विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर के लिहाज से मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है।

इस कारण भी विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकालने का फैसला कर सकते हैं।

4. कंपनियों की कमाई को लेकर चिंता

शेयर बाजार में निवेश का फैसला केवल मौजूदा कीमतों के आधार पर नहीं होता, बल्कि कंपनियों के भविष्य के मुनाफे को भी ध्यान में रखा जाता है।

अगर कंपनियों की बिक्री, मुनाफे और कारोबार की वृद्धि उम्मीद से कमजोर रहती है, तो निवेशक शेयरों का मूल्यांकन दोबारा करने लगते हैं।

भारतीय कंपनियों की कमाई को लेकर बनी अनिश्चितता भी विदेशी निवेशकों की सतर्कता बढ़ा रही है।

2026 में शेयर बाजार में करीब 13% की गिरावट

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। 2026 में निफ्टी 50 में सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली है। यह गिरावट भारतीय बाजार के लिए पिछले कई वर्षों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन का संकेत है।

इस गिरावट के पीछे केवल विदेशी निवेशकों की बिकवाली जिम्मेदार नहीं है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में तनाव, महंगा कच्चा तेल, रुपये की कमजोरी और कंपनियों के मुनाफे को लेकर चिंताएं भी बाजार पर दबाव बना रही हैं।

हालांकि, अक्टूबर के अंतिम दिनों में बाजार में कुछ सुधार देखने को मिला। 2 नवंबर को भी सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी तेजी दर्ज की गई। इससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली।

यहां ध्यान देना जरूरी है कि 13 प्रतिशत की गिरावट का आंकड़ा बाजार के संबंधित समय के प्रदर्शन को दर्शाता है। बाजार में रोजाना बदलाव होने के कारण वास्तविक सालाना गिरावट या तेजी की गणना ताजा क्लोजिंग के आधार पर बदल सकती है।

घरेलू निवेशकों ने संभाला भारतीय शेयर बाजार

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है।

घरेलू म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और अन्य संस्थागत निवेशक लगातार बाजार में निवेश कर रहे हैं। इनके निवेश से विदेशी निवेशकों की बिकवाली का कुछ असर कम करने में मदद मिली है।

खासतौर पर म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला पैसा बाजार को सहारा देता है। खुदरा निवेशकों की नियमित निवेश करने की आदत ने घरेलू बाजार में पूंजी का एक स्थिर स्रोत तैयार किया है।

जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तब घरेलू संस्थागत निवेशक उन शेयरों को खरीदकर बाजार में संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं।

यही वजह है कि विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में कई बार बड़ी गिरावट को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

क्या भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी होगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले महीनों में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में दोबारा निवेश शुरू करेंगे?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की वापसी काफी हद तक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। अगर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता कम होती है और डॉलर में मजबूती घटती है, तो भारतीय बाजार में विदेशी निवेश बढ़ सकता है।

इसके अलावा भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। अगर कंपनियों की कमाई उम्मीद के मुताबिक रहती है और आर्थिक विकास की गति मजबूत बनी रहती है, तो विदेशी निवेशकों का भरोसा दोबारा बढ़ सकता है।

अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में करीब ₹6,300 करोड़ की विदेशी खरीदारी को सकारात्मक संकेत जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसे अभी स्थायी बदलाव कहना जल्दबाजी होगी।

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच खुदरा निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। केवल विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखकर अपने सभी शेयर बेच देना सही रणनीति नहीं हो सकती।

लंबी अवधि के निवेशकों को कंपनियों के फंडामेंटल, कमाई, कर्ज और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

वहीं, नए निवेशकों को बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।

म्यूचुअल फंड में SIP करने वाले निवेशकों को भी बाजार की गिरावट के दौरान अपने वित्तीय लक्ष्यों और निवेश योजना की समीक्षा करनी चाहिए। किसी भी निवेश का फैसला केवल बाजार की एक खबर के आधार पर नहीं लेना चाहिए।

आगे बाजार की दिशा पर रहेगी सबकी नजर

कुल मिलाकर, अक्टूबर में विदेशी निवेशकों की ओर से ₹34,843 करोड़ की निकासी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय है। साल 2026 में अब तक ₹2.95 लाख करोड़ की निकासी यह दिखाती है कि वैश्विक परिस्थितियों और भारतीय कंपनियों की कमाई को लेकर विदेशी निवेशक अभी सतर्क हैं।

हालांकि, महीने के आखिरी सप्ताह में विदेशी निवेशकों की खरीदारी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का समर्थन बाजार के लिए राहत की खबर है।

आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की चाल और कंपनियों के वित्तीय नतीजे भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हुई विदेशी खरीदारी नवंबर में भी जारी रहती है या नहीं।