जेल से बाहर आते ही आजम खान को ED ने दबोचा, 11 महीने बाद मिली आजादी फिर बनी गिरफ्तारी; जौहर यूनिवर्सिटी केस में बढ़ीं मुश्किलें
जेल से बाहर आते ही आजम खान को ED ने दबोचा, 11 महीने बाद मिली आजादी फिर बनी गिरफ्तारी; जौहर यूनिवर्सिटी केस में बढ़ीं मुश्किलें
Azam Khan Arrested: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। करीब 11 महीने बाद रामपुर जेल से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईडी की टीम पैरामिलिट्री फोर्स के साथ पहले से ही जेल के बाहर मौजूद थी। जैसे ही आजम खान जेल से बाहर आए, जांच एजेंसी ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से रामपुर की राजनीति में हलचल मच गई है। वहीं, जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में अब आजम खान की मुश्किलें और बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के लिए 31 अक्टूबर का दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। एक तरफ करीब 11 महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ हुआ, तो दूसरी तरफ जेल के दरवाजे पर ही ईडी की कार्रवाई ने उनके लिए नई कानूनी चुनौती खड़ी कर दी। जिस समय उनके समर्थक उनकी रिहाई का इंतजार कर रहे थे, उसी समय जांच एजेंसी की टीम अपनी अगली कार्रवाई की तैयारी में जुटी थी।
जेल से निकलते ही ED की कार्रवाई, तीन गाड़ियों के साथ पहुंची टीम
रामपुर जिला जेल के बाहर शनिवार शाम से ही काफी गहमागहमी थी। आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की रिहाई की खबर मिलने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक जेल के बाहर जमा हो गए थे। सभी को उम्मीद थी कि लंबे समय बाद दोनों पिता-पुत्र अपने घर पहुंचेंगे।
इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय की टीम भी जेल के बाहर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की करीब तीन गाड़ियां मौके पर खड़ी थीं। टीम के साथ पैरामिलिट्री फोर्स और सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी थी। बताया गया कि आजम खान की रिहाई से कुछ समय पहले ही ईडी की टीम जेल पहुंच गई थी।
जैसे ही आजम खान जेल से बाहर निकले, ईडी के अधिकारियों ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया। इस दौरान वहां मौजूद समर्थकों के बीच हलचल बढ़ गई। आजम खान ने गाड़ी में बैठने से पहले समर्थकों की तरफ हाथ हिलाकर अभिवादन भी किया। इसके बाद जांच एजेंसी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई।
‘कानून खत्म हो गया है’, गिरफ्तारी से पहले आजम खान का बयान
जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अब कहने के लिए बचा ही क्या है और कानून जैसे खत्म हो गया है।
उन्होंने अपनी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मुसलमान होने की यही सजा है? आजम खान ने यह भी कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई और बच्चों के लिए स्कूल बनवाए।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। आजम खान लंबे समय से जौहर यूनिवर्सिटी को अपनी एक बड़ी उपलब्धि बताते रहे हैं। ऐसे में इसी संस्थान और उससे जुड़े ट्रस्ट की जांच के बीच उनकी गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।
क्या है जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट का पूरा मामला?
आजम खान से जुड़ी ईडी की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित है। ईडी इस मामले में ट्रस्ट को मिले चंदे, पैसों के स्रोत और उनके इस्तेमाल की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को मिलने वाली बड़ी रकम कहां से आई और अलग-अलग संस्थाओं के माध्यम से उसका लेन-देन किस तरह हुआ। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के निर्माण पर खर्च की गई रकम और उससे जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।
इस मामले में ईडी पहले भी कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े पदाधिकारी, आजम खान के करीबी और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं।
19 अगस्त को ईडी ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान से जुड़े करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान जांच एजेंसी ने चंदे, निर्माण कार्य और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की थी।
अक्टूबर में भी ईडी ने रामपुर जेल पहुंचकर आजम खान से कई घंटे तक पूछताछ की थी। एजेंसी की जांच का मुख्य फोकस ट्रस्ट को मिले करोड़ों रुपये के चंदे और उनके इस्तेमाल पर रहा है।
हालांकि, जांच में लगाए गए आरोपों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सवालों पर अंतिम फैसला अदालत की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से मिली थी बड़ी राहत
आजम खान की रिहाई का रास्ता दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद साफ हुआ था। इस मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को राहत मिली थी।
29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने दोनों की सजा पर रोक लगाते हुए जमानत का रास्ता साफ किया था। इसके बाद जमानत की आवश्यक शर्तें पूरी करने और अदालत से रिहाई के परवाने जारी होने के बाद दोनों के जेल से बाहर आने की प्रक्रिया पूरी हुई।
आजम खान और अब्दुल्ला आजम नवंबर 2025 से रामपुर जेल में बंद थे। दोनों को करीब 11 महीने बाद जेल से बाहर आने का मौका मिला।
लेकिन आजम खान के लिए यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। जेल से बाहर आते ही ईडी की कार्रवाई ने उन्हें एक नए कानूनी मामले में घेर लिया। दूसरी तरफ उनके बेटे अब्दुल्ला आजम जेल से बाहर आने के बाद अपने घर चले गए।
अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद चर्चा में थी आजम खान की रिहाई
आजम खान की रिहाई को उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 22 अक्टूबर को रामपुर जेल जाकर उनसे मुलाकात की थी।
इस मुलाकात के बाद आजम खान की रिहाई और पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। आजम खान समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से रहा है।
ऐसे समय में उनकी रिहाई के तुरंत बाद ईडी की कार्रवाई ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया और अदालत में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।
अब आगे क्या होगा? अदालत में पेशी पर टिकी निगाहें
आजम खान की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनकी आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर है। जांच एजेंसी उनसे संबंधित मामले में पूछताछ और आगे की कार्रवाई के लिए अदालत के सामने पेश करने की प्रक्रिया अपना सकती है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें अगले दिन सुबह करीब 10 बजे अदालत में पेश किया जाना है। इसके बाद अदालत तय करेगी कि जांच एजेंसी को पूछताछ के लिए कितनी अवधि की हिरासत दी जाए या आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी।
फिलहाल जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा बनी हुई है।
कुल मिलाकर, आजम खान के लिए जेल से रिहाई की खुशी कुछ ही देर में एक नई कानूनी चुनौती में बदल गई। अब देखना होगा कि ईडी की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है।