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‘दायरा’ में करीना कपूर का दमदार अवतार, महिला पुलिस की छवि को तोड़ा रूढ़ियों से बाहर

By Aarti Mishra · Published 20 Sep 2026, 02:16 · Updated 20 Sep 2026, 02:23

नई दिल्ली। बॉलीवुड में पुलिस अधिकारी का किरदार कोई नया नहीं है, लेकिन जब पुलिस की वर्दी में करीना कपूर खान जैसी अभिनेत्री नजर आती हैं और उसके पीछे निर्देशन मेघना गुलजार का हो, तो कहानी को लेकर उत्सुकता बढ़ना स्वाभाविक है। फिल्म ‘दायरा’ इसी वजह से रिलीज से पहले ही चर्चा में रही। करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन पहली बार स्क्रीन पर साथ नजर आ रहे हैं, जबकि फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया है। फिल्म 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई।

फिल्म की खास बात सिर्फ इसका क्राइम और पुलिस वाला विषय नहीं है। ‘दायरा’ में पुलिस व्यवस्था, कानून, न्याय और इंसानी भावनाओं के बीच मौजूद उस उलझन को सामने लाने की कोशिश की गई है, जहां हर सवाल का जवाब सिर्फ सही या गलत में देना आसान नहीं होता। इसी दुनिया में करीना कपूर डीसीपी अजूनी कोहली का किरदार निभा रही हैं, जबकि पृथ्वीराज सुकुमारन डीसीपी रमन कुमार की भूमिका में हैं। दोनों अधिकारियों का न्याय को देखने का नजरिया अलग है और यही फिल्म के ड्रामा का अहम हिस्सा बनता है।

करीना की अजूनी कोहली क्यों है खास?

करीना कपूर के लिए ‘दायरा’ का किरदार इसलिए भी अलग है क्योंकि इसमें उन्हें एक ऐसी महिला पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है जो अपनी पहचान साबित करने के लिए हर वक्त गुस्से, मारधाड़ या बंदूक का सहारा नहीं लेती।

करीना ने फिल्म के प्रमोशन के दौरान खुद इस बात पर जोर दिया कि भारतीय फिल्मों में महिला पुलिस अधिकारियों को अक्सर एक खास तरह के ढांचे में दिखाया जाता है। उन्हें बहुत सख्त, मर्दाना अंदाज वाली, तेज-तर्रार चाल और लगातार एक्शन करने वाली पुलिस अधिकारी के तौर पर पेश किया जाता रहा है। लेकिन अजूनी कोहली इस तय इमेज से अलग है।

करीना के मुताबिक मेघना गुलजार चाहती थीं कि अजूनी एक ऐसी महिला हो जो अपनी femininity को छिपाए नहीं। वह लिपस्टिक लगाती है, मुस्कुराती है, शांत रहती है, लेकिन जब फैसले लेने की बात आती है तो अपने काम और सिद्धांतों पर मजबूती से खड़ी रहती है। यानी फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि किसी महिला को मजबूत पुलिस अधिकारी दिखाने के लिए उसे पुरुषों जैसी बॉडी लैंग्वेज या व्यवहार देना जरूरी नहीं है।

वर्दी के पीछे भी एक महिला है

‘दायरा’ का यह पहलू आज के समय में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिल्मों में मजबूत महिला किरदार को अक्सर दो ही तरीकों से दिखाया जाता है। या तो उसे बेहद ग्लैमरस बनाया जाता है या फिर उसकी मजबूती दिखाने के लिए उसे पूरी तरह सख्त और पुरुषों जैसे अंदाज में पेश किया जाता है।

अजूनी कोहली इन दोनों छवियों के बीच एक अलग रास्ता बनाती है। वह पुलिस अधिकारी है, इसलिए उसके फैसलों में दृढ़ता है, लेकिन वह अपनी महिला पहचान को छोड़कर मजबूत नहीं बनती।

यही बात करीना के किरदार को बाकी कई पुलिस भूमिकाओं से अलग करती है। वह सिर्फ बंदूक चलाने वाली या अपराधियों का पीछा करने वाली पुलिस ऑफिसर नहीं है। उसके किरदार में जांच, सोच, संवेदनशीलता और कानून के प्रति जिम्मेदारी को भी जगह दी गई है।

‘दायरा’ की कहानी में क्या है?

फिल्म को एक पुलिस प्रोसीजरल क्राइम थ्रिलर के तौर पर पेश किया गया है। यह कई सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताई गई है और अपराध, न्याय तथा सजा के सवालों को केंद्र में रखती है। फिल्म की कहानी एक गंभीर अपराध की जांच और उसके बाद सामने आने वाले कानूनी तथा नैतिक सवालों के आसपास घूमती है।

कहानी में डीसीपी अजूनी कोहली और डीसीपी रमन कुमार एक ही मामले को लेकर अलग-अलग नजरिया रखते हैं। जहां एक तरफ कानून की प्रक्रिया और जांच के नियम महत्वपूर्ण हैं, वहीं दूसरी तरफ अपराध के बाद न्याय मिलने की बेचैनी और पीड़ित पक्ष की भावनाएं भी कहानी का हिस्सा बनती हैं।

यही वजह है कि फिल्म सिर्फ यह सवाल नहीं पूछती कि अपराधी कौन है। वह यह भी सवाल सामने रखती है कि न्याय का रास्ता क्या होना चाहिए?

क्या कानून की तय प्रक्रिया के बाहर जाकर न्याय किया जा सकता है? क्या किसी गंभीर अपराध के बाद भावनाओं में लिया गया फैसला सही हो सकता है? और पुलिस अधिकारी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कानून के प्रति है या तत्काल न्याय दिलाने की कोशिश के प्रति?

फिल्म इन्हीं सवालों के बीच अपने किरदारों को खड़ा करती है।

पृथ्वीराज सुकुमारन के किरदार से बढ़ता है टकराव

करीना कपूर के सामने फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन हैं। वह डीसीपी रमन कुमार का किरदार निभा रहे हैं। दोनों कलाकार पहली बार किसी फिल्म में साथ नजर आ रहे हैं।

रमन और अजूनी की सोच एक जैसी नहीं है। यही अंतर फिल्म में तनाव पैदा करता है। कहानी में दर्शक को दोनों पक्षों को समझने का मौका मिलता है, जिससे फिल्म को केवल एक पुलिस अधिकारी की कहानी बनकर रह जाने से बचाया गया है।

पृथ्वीराज ने भी फिल्म की इसी जटिलता को लेकर बात की है। उनके मुताबिक ‘दायरा’ की दुनिया में दर्शकों के लिए सिर्फ एक पक्ष चुनना आसान नहीं है। फिल्म जानबूझकर उस ग्रे एरिया में जाती है जहां कानून और न्याय के बीच कई सवाल खड़े होते हैं।

मेघना गुलजार के सिनेमा की झलक

मेघना गुलजार का नाम उन निर्देशकों में लिया जाता है जिन्होंने फिल्मों में संवेदनशील और वास्तविक मुद्दों को अलग तरीके से पेश किया है। ‘तलवार’, ‘राजी’, ‘छपाक’ और ‘सैम बहादुर’ जैसी फिल्मों के बाद ‘दायरा’ में भी वह गंभीर विषय लेकर आई हैं।

हालांकि मेघना ने खुद इस बात को किसी तय पैटर्न का हिस्सा मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि कानून, अपराध और न्याय जैसे विषय उनकी फिल्मों में बार-बार आ सकते हैं, लेकिन उनके लिए कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसमें मौजूद human quotient यानी इंसानी पहलू है।

यही वजह है कि ‘दायरा’ को सिर्फ एक पुलिस थ्रिलर के तौर पर देखना कहानी के बड़े हिस्से को नजरअंदाज करना होगा। फिल्म में अपराध के साथ-साथ उन लोगों की भावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं जो किसी घटना के बाद उसके असर से गुजरते हैं।

करीना के लिए दो साल बाद बड़ा पर्दे पर कमबैक

‘दायरा’ करीना कपूर के करियर के लिहाज से भी खास है। वह करीब दो साल बाद बड़े पर्दे पर वापस आई हैं। उनकी पिछली रिलीज 2024 की ‘सिंघम अगेन’ थी।

इस बार उन्होंने ऐसा किरदार चुना है जो ग्लैमर से ज्यादा कहानी और चरित्र की मजबूती पर निर्भर करता है। करीना पहले भी अलग-अलग तरह की भूमिकाओं में नजर आ चुकी हैं, लेकिन अजूनी कोहली का किरदार उनकी स्क्रीन इमेज में एक और बदलाव दिखाता है।

फिल्म के प्रमोशन के दौरान अभिनेत्री ने यह भी कहा कि वह लगातार अलग-अलग तरह के किरदार तलाशती रहती हैं और अभिनय को ही अपना मुख्य फोकस मानती हैं।

पहली बार करीना और पृथ्वीराज की जोड़ी

‘दायरा’ की एक बड़ी खासियत करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन की जोड़ी भी है। दोनों की स्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर रिलीज से पहले काफी उत्सुकता रही।

पृथ्वीराज मुख्य रूप से मलयालम सिनेमा में अपने काम के लिए पहचाने जाते हैं और हिंदी दर्शकों के बीच भी उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। वहीं करीना कपूर लंबे समय से हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं।

दो अलग फिल्मी पृष्ठभूमि वाले कलाकारों को एक गंभीर पुलिस ड्रामा में आमने-सामने रखना फिल्म को दिलचस्प बनाता है। खासकर तब जब दोनों के किरदारों के सोचने और न्याय को देखने के तरीके अलग हों।

फिल्म का सबसे बड़ा सवाल क्या है?

‘दायरा’ का असली सवाल सिर्फ अपराध और अपराधी तक सीमित नहीं है। फिल्म दर्शकों को यह सोचने के लिए मजबूर करती है कि कानून और न्याय के बीच अंतर आने लगे तो सही रास्ता कौन सा है?

कई बार किसी अपराध के बाद लोगों की भावनाएं तुरंत न्याय चाहती हैं। लेकिन कानूनी व्यवस्था सबूत, प्रक्रिया और नियमों के आधार पर आगे बढ़ती है। इसी अंतर से कहानी में तनाव पैदा होता है।

अजूनी कोहली का किरदार इसी व्यवस्था के भीतर खड़ा नजर आता है। वह भावनाओं को समझती है, लेकिन एक अधिकारी के तौर पर प्रक्रिया और जिम्मेदारी को भी महत्व देती है। दूसरी तरफ रमन कुमार का नजरिया कहानी को दूसरी दिशा में ले जाता है।

इस तरह दोनों किरदारों के बीच का संघर्ष ही फिल्म का मुख्य ड्राइविंग फोर्स बनता है।

रिलीज के बाद कैसी रही शुरुआत?

‘दायरा’ 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म को लेकर रिलीज से पहले करीना कपूर, पृथ्वीराज सुकुमारन और मेघना गुलजार की वजह से काफी चर्चा थी।

हालांकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की शुरुआती कमाई उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रही। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार फिल्म ने पहले दिन लगभग 90 लाख रुपये की नेट कमाई की।

लेकिन किसी गंभीर विषय वाली फिल्म की सफलता को केवल शुरुआती कमाई से समझना पूरी तस्वीर नहीं देता। दर्शकों की प्रतिक्रिया, वीकेंड कलेक्शन और आने वाले दिनों में फिल्म का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहेगा।

क्यों चर्चा में है ‘दायरा’?

‘दायरा’ की सबसे बड़ी चर्चा उसके विषय और करीना कपूर के अजूनी कोहली वाले किरदार को लेकर है। एक तरफ फिल्म अपराध और न्याय जैसे गंभीर मुद्दे पर सवाल उठाती है, वहीं दूसरी तरफ महिला पुलिस अधिकारी की पारंपरिक फिल्मी छवि को अलग तरीके से पेश करने की कोशिश करती है।

करीना ने जिस तरह अजूनी को एक feminine लेकिन मजबूत पुलिस अधिकारी के रूप में पेश करने की बात कही है, वह फिल्म के किरदार की सबसे अलग पहचान बनती है। यहां मजबूती का मतलब सिर्फ एक्शन नहीं बल्कि सही फैसले लेने, दबाव में टिके रहने और संवेदनशील बने रहने से भी है।

आखिर में

कुल मिलाकर ‘दायरा’ सिर्फ करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन की क्राइम थ्रिलर नहीं है। यह कानून, न्याय, पुलिस की जिम्मेदारी और इंसानी भावनाओं के बीच मौजूद जटिल रिश्ते को सामने रखने की कोशिश करती है।

करीना कपूर का डीसीपी अजूनी कोहली वाला किरदार इस फिल्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। खास बात यह है कि उसे मजबूत दिखाने के लिए उसकी femininity को हटाया नहीं गया है। वह अपनी पसंद, अपने अंदाज और अपनी पहचान के साथ एक सख्त पुलिस अधिकारी बनी रहती है।

यही वजह है कि ‘दायरा’ में करीना का यह अवतार उनके अब तक के पुलिस किरदारों से अलग नजर आता है। मेघना गुलजार की संवेदनशील कहानी, करीना की अजूनी और पृथ्वीराज के रमन के बीच का वैचारिक टकराव फिल्म को एक ऐसा विषय देता है, जिस पर फिल्म देखने के बाद भी चर्चा जारी रह सकती है।