Shardiya Navratri 2026: महाष्टमी व्रत से महानवमी हवन तक, जानें पूजा और पारण का शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी और महानवमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इन दोनों दिनों में मां दुर्गा की पूजा, कन्या पूजन, हवन और व्रत की पूर्णाहुति की जाती है। भक्त पूरे साल इस पर्व का इंतजार करते हैं और इन शुभ अवसरों पर परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं।साल 2026 में महाष्टमी व्रत, महानवमी पूजा और नवरात्रि पारण को लेकर श्रद्धालु सही तारीख और शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं। एक प्रचलित पंचांग गणना के अनुसार, 18 अक्टूबर को महाष्टमी व्रत, 19 अक्टूबर को महानवमी पूजन और 20 अक्टूबर को सुबह 9:34 बजे के बाद पारण किया जा सकता है। हालांकि, कुछ पंचांगों में अष्टमी और नवमी की तिथियों को लेकर अंतर है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना जरूरी है।
महाष्टमी व्रत 2026: 18 अक्टूबर को होगी मां महागौरी की पूजा
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी शांति, पवित्रता और सौभाग्य की प्रतीक हैं। भक्त इस दिन व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं और अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।प्रचलित गणना के अनुसार, महाष्टमी व्रत 18 अक्टूबर 2026, रविवार को रखा जाएगा। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की सफाई की जाती है। फिर मां दुर्गा के सामने दीपक जलाकर फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।महाष्टमी पर कई श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं, जबकि अन्य फलाहार के साथ व्रत पूरा करते हैं। पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती की जाती है और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटा जाता है।इस दिन कन्या पूजन करने की भी परंपरा है। हालांकि, कई परिवार महानवमी पर कन्या पूजन करते हैं। दोनों ही परंपराओं में अपने परिवार की धार्मिक मान्यता और स्थानीय पंचांग को ध्यान में रखना चाहिए।
महानवमी 2026: मां सिद्धिदात्री की पूजा से पूरी होगी नवरात्रि साधना
नवरात्रि की नवमी तिथि को महानवमी कहा जाता है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि देवी सिद्धिदात्री अपने भक्तों को ज्ञान, शक्ति और सिद्धि का आशीर्वाद देती हैं।बताई गई गणना के अनुसार, महानवमी पूजन 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को किया जाएगा। इस दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और नौ दिनों की साधना की पूर्णाहुति की तैयारी करते हैं।महानवमी पर घरों और मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप और आरती की जाती है। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और भंडारे भी आयोजित होते हैं। भक्त मां सिद्धिदात्री के सामने अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।महानवमी का दिन हवन और कन्या पूजन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इन धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भक्त मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
महानवमी हवन 2026: कैसे करें पूजा की पूर्णाहुति?
नवरात्रि में हवन को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे पूजा-पाठ और साधना की पूर्णाहुति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। महानवमी पर कई परिवार पुरोहित के मार्गदर्शन में हवन करते हैं और मां दुर्गा के मंत्रों के साथ आहुति अर्पित करते हैं।हवन की तैयारी के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को साफ किया जाता है। इसके बाद हवन कुंड और आवश्यक पूजन सामग्री तैयार रखी जाती है। पूजा की विधि परिवार की परंपरा और पुरोहित के निर्देशों के अनुसार अपनाई जाती है।हवन के दौरान मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी जाती है। अनुष्ठान पूरा होने पर मां दुर्गा की आरती की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।महानवमी हवन का सटीक मुहूर्त स्थानीय पंचांग और नवमी तिथि की अवधि के आधार पर तय किया जाना चाहिए। सभी शहरों में एक ही समय लागू नहीं होता। इसलिए हवन करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या पुरोहित से समय की पुष्टि जरूर करें।
कन्या पूजन क्यों है महाष्टमी और महानवमी का खास हिस्सा?
महाष्टमी और महानवमी के दौरान कन्या पूजन की परंपरा विशेष रूप से देखने को मिलती है। इस अनुष्ठान में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है। भक्त कन्याओं के पैर धोते हैं, तिलक लगाते हैं और उन्हें भोजन कराकर उपहार या दक्षिणा देते हैं।कई परिवार कन्या पूजन के साथ एक बालक को भी भोजन कराते हैं। इसे अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से जाना जाता है। इस परंपरा का उद्देश्य देवी शक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और बच्चों का सम्मान करना है
नवरात्रि पारण 2026: कब खोलें नौ दिन का व्रत?
नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण का समय भी महत्वपूर्ण होता है। पारण का अर्थ है विधिपूर्वक उपवास समाप्त करना। कुछ परिवार अष्टमी पर कन्या पूजन के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कई लोग महानवमी की पूजा और हवन के बाद पारण करते हैं।एक प्रचलित गणना के अनुसार, नवमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:34 बजे समाप्त होगी। इस आधार पर दशमी तिथि शुरू होने के बाद सुबह 9:34 बजे के पश्चात पारण का समय बताया गया है।पारण से पहले पूजा, हवन या कन्या पूजन पूरा करने की परंपरा का पालन किया जा सकता है। व्रत खोलते समय हल्का भोजन और पर्याप्त पानी लेना बेहतर रहता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने लंबे समय तक उपवास किया हो।ध्यान रखें कि पारण का समय पंचांग की गणना और स्थानीय धार्मिक परंपरा पर निर्भर करता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने शहर के पंचांग में दिए गए समय को देखना उचित रहेगा।
महाष्टमी और महानवमी पर इन बातों का रखें ध्यान
महाष्टमी और महानवमी के अवसर पर पूजा करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।पूजा और व्रत की तारीख स्थानीय पंचांग से जांच लें।हवन के लिए सही समय और विधि की जानकारी पहले प्राप्त करें।कन्या पूजन में बच्चों का सम्मान करें और उनकी सुविधा का ध्यान रखें।व्रत के दौरान अपनी सेहत के अनुसार भोजन और पानी लें।पारण जल्दबाजी में करने के बजाय निर्धारित तिथि और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
Shardiya Navratri 2026 में महाष्टमी और महानवमी मां दुर्गा की आराधना के महत्वपूर्ण अवसर हैं। महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा की जाती है, जबकि महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना के साथ हवन और कन्या पूजन किया जाता है। नवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त पारण से पहले सही तिथि और मुहूर्त की जानकारी जरूर प्राप्त करें।एक प्रचलित गणना में महाष्टमी व्रत 18 अक्टूबर, महानवमी पूजन 19 अक्टूबर और पारण 20 अक्टूबर को सुबह 9:34 बजे के बाद बताया गया है। हालांकि, पंचांगों में अंतर होने के कारण इन समयों की स्थानीय स्तर पर पुष्टि करना जरूरी है।