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राष्ट्रीय समाचार

ऑरलैंडो के आसमान में दिखी रहस्यमयी ‘स्पेस जेलीफ़िश’, रंग-बिरंगी चमक ने लोगों को चौंकाया; जानिए इसके पीछे का विज्ञान

By Aarti Mishra · Published 15 Oct 2026, 09:58 · Updated 15 Oct 2026, 09:58

ऑरलैंडो के आसमान में स्पेस जेलीफ़िश जैसी चमकदार आकृति

आसमान में अचानक दिखाई देने वाली एक चमकदार आकृति किसी को भी हैरान कर सकती है। अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब आसमान में नीले, सफेद और नारंगी रंगों से बनी एक विशाल आकृति दिखाई दी। दूर से देखने पर यह किसी जेलीफ़िश जैसी लग रही थी। इस अनोखे दृश्य की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए।पहली नज़र में यह दृश्य किसी आग के गोले, विस्फोट या आसमान में तैरती किसी रहस्यमयी वस्तु जैसा दिखाई देता है। लेकिन इसके पीछे अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी एक दिलचस्प घटना है, जिसे ‘स्पेस जेलीफ़िश इफेक्ट’ कहा जाता है।

क्या है पूरा मामला?

13 अक्टूबर 2026 की सुबह स्पेसएक्स ने फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से अपना फाल्कन 9 रॉकेट लॉन्च किया। यह नासा के लिए CRS-35 मिशन था, जिसके तहत ड्रैगन अंतरिक्ष यान के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक वैज्ञानिक प्रयोग, आवश्यक सामान और उपकरण भेजे गए।स्थानीय समय के अनुसार सुबह लगभग 6:33 बजे हुए इस प्रक्षेपण के दौरान रॉकेट से निकलने वाली गैसें ऊपरी वायुमंडल में फैल गईं। उस समय जमीन पर अँधेरा और आसमान में सुबह की रोशनी का अंतर होने के कारण गैसों का फैलाव चमकदार दिखाई दिया।नासा ने 14 अक्टूबर को इस घटना की तस्वीर और वैज्ञानिक व्याख्या साझा की। रिपोर्ट के अनुसार, रॉकेट के निकास से बनी चमकदार आकृति अमेरिका के पूर्वी हिस्से में भी दिखाई दी।

आखिर क्यों दिखाई देती है जेलीफ़िश जैसी आकृति?

इस घटना को समझने के लिए रॉकेट के प्रक्षेपण और सूर्य की रोशनी के बीच संबंध को समझना जरूरी है।जब कोई रॉकेट पृथ्वी से ऊपर की ओर जाता है, तो उसके इंजन से निकलने वाली गैसें आसपास के वातावरण में फैलती हैं। अधिक ऊँचाई पर वायुदाब कम होने के कारण ये गैसें तेजी से फैल सकती हैं और एक बड़ा, धुँधला आकार बना सकती हैं।अब इसमें सूर्य की रोशनी की भूमिका समझिए। पृथ्वी की सतह पर उस समय अँधेरा हो सकता है, लेकिन ऊँचाई पर मौजूद रॉकेट के निकास पर सूर्य की किरणें पड़ सकती हैं। जब सूर्य की रोशनी इन गैसों और उनसे बने कणों को प्रकाशित करती है, तो आसमान में एक चमकदार बादल जैसा दृश्य बन जाता है।इस आकृति का ऊपरी हिस्सा जेलीफ़िश के सिर जैसा और पीछे फैलती हुई गैसों की लकीरें उसके स्पर्शकों जैसी दिखाई देती हैं। इसी समानता के कारण इसे ‘स्पेस जेलीफ़िश’ नाम दिया गया है।

क्या यह कोई एलियन या UFO था?

आसमान में कुछ असामान्य दिखाई देने पर लोगों के मन में कई सवाल उठना स्वाभाविक है। सोशल मीडिया पर ऐसे दृश्यों को कभी-कभी एलियन, UFO या किसी अज्ञात घटना से जोड़ दिया जाता है।हालाँकि, केवल किसी वस्तु का अजीब दिखाई देना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह पृथ्वी से बाहर की किसी सभ्यता से जुड़ी है। इस मामले में रॉकेट लॉन्च और उससे बनने वाले प्रकाशमान निकास की वैज्ञानिक व्याख्या उपलब्ध है।फिर भी, एक जरूरी अंतर समझना चाहिए: किसी घटना का वैज्ञानिक कारण पता होना और किसी विशेष वायरल वीडियो की पहचान की पुष्टि होना दो अलग बातें हैं। वीडियो की तारीख, मूल स्रोत और स्थान का मिलान किए बिना यह दावा नहीं करना चाहिए कि उसमें दिखाई देने वाला दृश्य निश्चित रूप से उसी लॉन्च का है।

अंतरिक्ष विज्ञान, जो आम लोगों को भी कर देता है हैरान

अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में कई ऐसी घटनाएँ होती हैं, जिन्हें सही समय और सही जगह से देखने पर वे किसी अद्भुत प्राकृतिक नज़ारे जैसी लगती हैं। रॉकेट लॉन्च के दौरान बनने वाला ‘स्पेस जेलीफ़िश इफेक्ट’ भी ऐसा ही एक उदाहरण है।यह घटना दिखाती है कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं और किताबों तक सीमित नहीं है। कभी-कभी उसकी झलक हमारे सिर के ऊपर आसमान में भी दिखाई देती है।

फ्लोरिडा में 13 अक्टूबर 2026 को स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के प्रक्षेपण के दौरान दिखाई दिया जेलीफ़िश जैसा दृश्य सूर्य की रोशनी से प्रकाशित रॉकेट के निकास के कारण बना था। यह एक वास्तविक वैज्ञानिक घटना है, न कि अपने आप में किसी एलियन या अलौकिक गतिविधि का प्रमाण।