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छोटी दिवाली 2026: क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी? जानें अभ्यंग स्नान, यम दीपदान और भगवान कृष्ण की पूजा का महत्व

By Aarti Mishra · Published 07 Nov 2026, 08:39 · Updated 07 Nov 2026, 08:39

छोटी दिवाली 2026 पर नरक चतुर्दशी की पूजा करते हुए श्रद्धालु और जलते हुए मिट्टी के दीपक।

दीपावली का त्योहार आने से पहले ही घरों में रौनक शुरू हो जाती है। लोग घरों की सफाई करते हैं, बाजारों से मिठाइयां और सजावट का सामान खरीदते हैं। दीपावली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है, जिसे नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन का हिंदू धर्म में खास महत्व है।

नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है और शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और अकाल मृत्यु का डर दूर होता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी क्यों कहा जाता है? इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा क्यों की जाती है और यम दीपदान करने के पीछे क्या कहानी है? आइए इन सभी बातों को आसान भाषा में जानते हैं।

क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?

पौराणिक कथा के अनुसार, पुराने समय में नरकासुर नाम का एक बहुत ही शक्तिशाली राक्षस था। वह अपनी ताकत के घमंड में लोगों को परेशान करता था। उसने देवताओं और आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था। इतना ही नहीं, उसने हजारों महिलाओं को बंदी बनाकर रखा था।

नरकासुर के बढ़ते अत्याचारों से सभी परेशान थे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उसका अंत करने का फैसला किया। इस युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा ने भी उनका साथ दिया। दोनों ने मिलकर नरकासुर का वध किया और उसकी कैद में रखी गई महिलाओं को आजाद कराया।

कहा जाता है कि नरकासुर के अंत के बाद लोगों ने खुशी में दीप जलाए और इस जीत का जश्न मनाया। इसी घटना की याद में हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।

इस दिन का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, आखिर में जीत अच्छाई की ही होती है।

छोटी दिवाली क्यों कहा जाता है?

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली कहने की एक खास वजह है। यह त्योहार मुख्य दीपावली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन भी लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं और घर को सुंदर तरीके से सजाते हैं।

कई घरों में शाम के समय मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा है। लोग घर के दरवाजे, आंगन और पूजा वाली जगह पर दीपक रखते हैं। बाजारों में भी इस दिन काफी रौनक रहती है।

छोटी दिवाली के दिन लोग दीपावली की आखिरी तैयारियां भी पूरी करते हैं। घरों में मिठाइयां बनाई जाती हैं और परिवार के लोग मिलकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं।

रूप चौदस क्यों कहते हैं इस दिन को?

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। इसके पीछे इस दिन सुबह होने वाले स्नान की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन सूरज निकलने से पहले उठकर शरीर पर तेल लगाना और फिर स्नान करना बहुत शुभ होता है।

इस परंपरा को अभ्यंग स्नान कहा जाता है। कई जगहों पर लोग स्नान से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाते हैं। इसके बाद उबटन लगाकर नहाते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर स्वस्थ रहता है और सुंदरता बढ़ती है। इसी वजह से इस दिन को रूप चौदस कहा जाता है।

हालांकि, इस दिन का मतलब सिर्फ सुंदर दिखना नहीं है। यह हमें अपने शरीर की सफाई के साथ-साथ मन को भी साफ रखने का संदेश देता है।

नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान क्यों करते हैं?

छोटी दिवाली के दिन अभ्यंग स्नान की परंपरा काफी पुरानी है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को भगवान का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में खुशियां आती हैं।

इस दिन स्नान करने से पहले शरीर पर तेल लगाया जाता है। इसके बाद नहाकर साफ कपड़े पहने जाते हैं। फिर भगवान की पूजा की जाती है।

कई परिवारों में स्नान के बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। लोग उनसे परिवार की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान करने से नरक के डर से मुक्ति मिलती है। इसलिए इस दिन सुबह के स्नान को खास माना जाता है।

यम दीपदान का क्या है महत्व?

नरक चतुर्दशी के दिन यम दीपदान करना भी बहुत जरूरी माना जाता है। इस दिन शाम को घर के बाहर यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि यमराज मृत्यु के देवता हैं। उनकी पूजा और दीपदान करने से परिवार के लोगों की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है। साथ ही घर के लोगों को अकाल मृत्यु का डर नहीं रहता।

परंपरा के अनुसार, शाम के समय मिट्टी के दीपक में तेल या घी डालकर बाती जलाई जाती है। इसके बाद दीपक घर के बाहर रखा जाता है। कई जगहों पर इसे दक्षिण दिशा की ओर रखने की परंपरा है।

कुछ परिवारों में इस दिन 14 दीपक जलाए जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग जगहों पर इसे मनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है।

छोटी दिवाली पर कैसे करें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा?

इस दिन सुबह स्नान करने के बाद घर के मंदिर की सफाई करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।

  • सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को फूल चढ़ाएं।
  • इसके बाद धूप और दीपक जलाएं।
  • भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें।
  • अंत में भगवान की आरती करें और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।

शाम के समय घर में दीपक जलाएं और अपनी परंपरा के अनुसार यम दीपदान करें।

छोटी दिवाली 2026 कब मनाई जाएगी?

साल 2026 में नरक चतुर्दशी की तारीख को लेकर तिथि और मुहूर्त को समझना जरूरी है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह के बाद शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी।

ऐसे में 7 नवंबर की शाम को छोटी दिवाली से जुड़ी दीप जलाने की परंपराएं निभाई जा सकती हैं। वहीं, 8 नवंबर की सुबह सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान का समय रहेगा। पूजा और स्नान का सही समय अपने शहर के पंचांग के अनुसार देखना चाहिए।

नरक चतुर्दशी हमें क्या सिखाती है?

छोटी दिवाली सिर्फ दीप जलाने और पूजा करने का त्योहार नहीं है। यह हमें याद दिलाती है कि हमें हमेशा अच्छे काम करने चाहिए और किसी को परेशान नहीं करना चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत करके यह संदेश दिया था कि गलत काम करने वाले का अंत जरूर होता है। वहीं, अभ्यंग स्नान हमें साफ-सफाई का महत्व समझाता है और यम दीपदान परिवार की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ा है।

यही वजह है कि नरक चतुर्दशी का त्योहार दीपावली से पहले खास उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर में दीप जलाकर लोग अपने जीवन से दुख और परेशानियों को दूर करने और खुशियों का स्वागत करने की प्रार्थना करते हैं।