धनतेरस पर किसकी पूजा करें? 13 दीपक जलाने से पहले जान लें सही विधि, शुभ समय और यम दीपक का महत्व

Dhanteras 2026: दिवाली से पहले आने वाला धनतेरस हिंदू धर्म में बेहद शुभ दिन माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। साथ ही घर के मुख्य द्वार पर यम दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन विधि-विधान से पूजा और दीपदान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। वहीं धन-संपत्ति के लिए माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना की जाती है।
धनतेरस पर किसकी पूजा करनी चाहिए?
धनतेरस के दिन मुख्य रूप से भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की जाती है।
माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान कुबेर को धन के भंडार का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस की पूजा में इन तीनों का विशेष स्थान होता है।
कई घरों में इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, नए बर्तन, वाहन या अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना भी शुभ माना जाता है।
धनतेरस पर पूजा की सही विधि क्या है?
धनतेरस के दिन सुबह घर की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। शाम के समय पूजा के स्थान को साफ करके वहां भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
इसके बाद पूजा की जगह पर दीपक जलाएं और भगवान को फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। माता लक्ष्मी को कमल का फूल और भगवान धन्वंतरि को पीले रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।
पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य भगवान से घर में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की प्रार्थना करें। इसके बाद लक्ष्मी और कुबेर की आरती करें।
धनतेरस पर 13 दीपक क्यों जलाए जाते हैं?
धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में दीपक जलाने की संख्या और स्थान की परंपरा अलग हो सकती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस की शाम घर के अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाने से सकारात्मकता आती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यम दीपक माना जाता है।
यम दीपक मृत्यु के देवता भगवान यमराज को समर्पित होता है। इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों की रक्षा होती है।
यम दीपक कब और कैसे जलाएं?
धनतेरस की शाम सूर्यास्त के बाद यम दीपक जलाने की परंपरा है। इसके लिए मिट्टी का दीपक लिया जाता है। उसमें सरसों या तिल का तेल डालकर बाती लगाई जाती है।
दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखने की परंपरा है। दीपक जलाते समय भगवान यमराज का स्मरण करके परिवार की सुख-शांति और दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यम दीपक को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परंपराएं मिलती हैं, इसलिए अपने परिवार की पारंपरिक पूजा-विधि का पालन करना भी उचित माना जाता है।
13 दीपक कहां-कहां जलाएं?
धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा में दीपकों को घर के अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों पर रखने की मान्यता है। सामान्य तौर पर घर का मुख्य द्वार, पूजा स्थल, रसोई, आंगन और घर के आसपास के स्थानों पर दीपक जलाए जाते हैं।
हालांकि 13 दीपक रखने की कोई एक सर्वमान्य विधि नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसके नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए इसे धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस के दिन खरीदारी को लेकर भी लोगों में काफी उत्साह रहता है। इस दिन सोना, चांदी, पीतल, तांबा और अन्य धातुओं से बनी वस्तुएं खरीदने की परंपरा है।
इसके अलावा नए बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन घर के लिए उपयोगी सामान या लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा भी खरीदते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार धनतेरस पर खरीदी गई वस्तु को शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हालांकि खरीदारी अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार ही करनी चाहिए।
धनतेरस की पूजा में किन बातों का रखें ध्यान?
धनतेरस की पूजा करते समय घर को साफ-सुथरा रखना चाहिए। पूजा स्थल पर दीपक जलाने के बाद कुछ समय तक उसे सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।
पूजा के दौरान मन को शांत रखना और भगवान का ध्यान करना महत्वपूर्ण माना जाता है। केवल महंगी चीज खरीदना ही धनतेरस की पूजा का उद्देश्य नहीं है। इस पर्व का संबंध आरोग्य, समृद्धि, सकारात्मकता और परिवार की खुशहाली से भी जोड़ा जाता है।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों होती है?
धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है।
इसी वजह से धनतेरस पर लोग भगवान धन्वंतरि की पूजा करके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। इस दिन स्वास्थ्य को धन से भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
धनतेरस का असली संदेश क्या है?
धनतेरस केवल खरीदारी और धन-संपत्ति का त्योहार नहीं है। इस पर्व का एक महत्वपूर्ण संदेश स्वास्थ्य और सुखी जीवन भी है। भगवान धन्वंतरि आरोग्य का प्रतीक हैं, माता लक्ष्मी समृद्धि का और भगवान कुबेर धन के प्रतीक माने जाते हैं।
वहीं यम दीपक जीवन की अनिश्चितता और परिवार की सुरक्षा की कामना से जुड़ा हुआ है। इसलिए धनतेरस पर पूजा, दीपदान और प्रार्थना का विशेष महत्व माना जाता है।
ध्यान दें: धनतेरस की पूजा और दीपदान की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ भिन्न हो सकती हैं। पूजा का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना सबसे उचित रहेगा।