AI के दौर में क्यों परेशान हैं भारत के युवा? रोहन मय्या ने बताई बदलती नौकरी की असली तस्वीर

भारत में हर साल लाखों युवा कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके नौकरी की तलाश में निकलते हैं। डिग्री हाथ में होती है, उम्मीदें बड़ी होती हैं और मन में एक सीधा सा सपना रहता है एक अच्छी नौकरी मिले, कमाई शुरू हो और धीरे-धीरे जिंदगी स्थिर हो जाए। लेकिन Artificial Intelligence यानी AI के तेजी से बढ़ते दौर में यह पुराना करियर फॉर्मूला अब उतना सीधा नहीं रह गया है।
इसी बदलाव को लेकर Aeos Games के को-फाउंडर और Y Combinator से जुड़े उद्यमी Rohan Mayya ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भारत के युवा इतने परेशान और निराश क्यों दिखाई दे रहे हैं।
उनकी पोस्ट के मुताबिक भारत हर साल करीब 1 करोड़ ग्रेजुएट तैयार करता है, जिनमें लगभग 15 लाख इंजीनियर होते हैं। लेकिन समस्या सिर्फ इतनी नहीं है कि युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही। असली चिंता यह है कि जिस डिजिटल दुनिया को कभी रोजगार का सबसे सुरक्षित रास्ता माना जाता था, उसी में AI तेजी से कई कामों का तरीका बदल रहा है।
डिग्री बढ़ रही है, लेकिन नौकरी की गारंटी घट रही है
भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से हुआ है। शिक्षा मंत्रालय के AISHE 2021-22 के मुताबिक देश में उच्च शिक्षा में कुल नामांकन 4.33 करोड़ तक पहुंच गया था, जो 2014-15 के 3.42 करोड़ से काफी अधिक है।
यानी ज्यादा युवा कॉलेज और यूनिवर्सिटी तक पहुंच रहे हैं। लेकिन डिग्री हासिल कर लेना और नौकरी के लिए तैयार होना दो अलग बातें हैं।
ILO की India Employment Report 2024 ने भी शिक्षा और रोजगार के बीच इसी अंतर को रेखांकित किया था। रिपोर्ट में कहा गया कि युवाओं की शिक्षा का स्तर बढ़ा है, लेकिन educated youth की employability और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
यही वह जगह है जहां आज का युवा फंसता हुआ दिखाई देता है डिग्री है, लेकिन बाजार जिस स्किल की मांग कर रहा है, वह जरूरी नहीं कि कॉलेज में सिखाई गई हो।
AI ने क्यों बढ़ा दी चिंता?
कुछ साल पहले तक किसी युवा को अगर टेक्नोलॉजी आती थी तो उसके सामने नौकरी के काफी विकल्प होते थे। Coding, customer support, testing, content, data और दूसरी डिजिटल सेवाओं में लगातार अवसर बन रहे थे।
लेकिन Generative AI ने इस तस्वीर को तेजी से बदल दिया है।
अब AI कुछ ऐसे काम कर सकता है, जिनके लिए पहले घंटों इंसानी मेहनत लगती थी। कोड लिखने से लेकर दस्तावेज तैयार करने, डेटा को व्यवस्थित करने, ग्राहक के सवालों का जवाब देने और डिजाइन से जुड़े शुरुआती काम तक कई क्षेत्रों में AI एक productivity tool बन चुका है।
NITI Aayog की 2025 की Roadmap for Job Creation in the AI Economy रिपोर्ट भी बताती है कि AI का असर एक जैसा नहीं होगा। कुछ routine और scalable jobs ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं, जबकि दूसरी तरफ नए AI-based roles भी पैदा होंगे।
यानी कहानी सिर्फ “AI नौकरी खा जाएगा” की नहीं है। असली कहानी है AI नौकरी करने के तरीके को बदल देगा।
भारत के युवाओं की परेशानी सिर्फ AI नहीं है
रोहन मय्या की पोस्ट की दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने युवाओं की परेशानी के लिए सिर्फ AI को जिम्मेदार नहीं माना।
उन्होंने महंगाई, घरों की बढ़ती कीमतें, कमजोर entry-level opportunities, manufacturing में प्रवेश की मुश्किलें, R&D की कमी और विदेश जाकर करियर बनाने के बदलते समीकरण जैसे कई मुद्दे गिनाए।
यानी युवा के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “नौकरी मिलेगी या नहीं?”
सवाल यह भी है कि नौकरी मिलने के बाद क्या उसकी कमाई से वह अपने भविष्य के बड़े लक्ष्य पूरे कर पाएगा?
अगर शुरुआती सैलरी धीमी गति से बढ़े और दूसरी तरफ किराया, घर, शिक्षा और रोजमर्रा की चीजों की लागत तेजी से बढ़े, तो नौकरी होने के बावजूद आर्थिक दबाव महसूस हो सकता है।
बेरोजगारी के आंकड़े भी पूरी कहानी बताते हैं
MoSPI की PLFS 2025 रिपोर्ट के मुताबिक 15-29 वर्ष के युवाओं की अखिल भारतीय बेरोजगारी दर 9.9% रही। शहरी युवाओं के लिए यह दर 13.6% थी। युवा महिलाओं में शहरी बेरोजगारी दर 18.9% दर्ज की गई।
इससे एक महत्वपूर्ण बात समझ आती है—युवा रोजगार की समस्या सिर्फ सोशल मीडिया की बहस नहीं है। रोजगार बाजार में प्रवेश करने वाले युवाओं के लिए शुरुआती दौर वास्तव में चुनौतीपूर्ण है।
और अब इसमें AI का नया factor जुड़ गया है।
लेकिन AI सिर्फ खतरा नहीं, बड़ा मौका भी है
यहां कहानी का दूसरा और शायद ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है।
NITI Aayog की रिपोर्ट ने AI को केवल job destroyer के रूप में नहीं देखा। रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत सही तरीके से तैयारी करता है तो AI नए अवसर पैदा कर सकता है। रिपोर्ट ने 2031 तक भारतीय टेक सेक्टर में संभावित रूप से 15 लाख नौकरियों के नुकसान का जोखिम बताया, लेकिन दूसरी तरफ सही रणनीति के साथ 40 लाख तक नए अवसर पैदा होने की संभावना भी रखी।
यानी फर्क AI और इंसान के बीच नहीं, बल्कि AI को इस्तेमाल करने वाले और उसे इस्तेमाल न करने वाले इंसान के बीच बढ़ सकता है।
आने वाले समय में AI prompt engineering, AI architecture, AIOps, AI research और दूसरे specialized roles की मांग बढ़ने की संभावना रिपोर्ट में बताई गई है।
तो युवा करें क्या?
यही इस पूरी बहस की सबसे काम की बात है।
आज किसी युवा के लिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि “मेरे पास डिग्री है।”
उसे यह भी दिखाना होगा कि वह अपनी field में वास्तविक समस्या हल कर सकता है।
अगर कोई student coding सीख रहा है तो उसे AI tools के साथ coding करना भी आना चाहिए। Content writer है तो research, editing और AI-assisted workflows समझने चाहिए। Designer है तो AI को competitor नहीं, productivity tool की तरह इस्तेमाल करना सीख सकता है।
यानी आने वाले समय में skill + AI literacy + human judgment का combination ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल
भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादियों में से एक है। यह उसकी ताकत भी है और चुनौती भी।
अगर हर साल बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेकर नौकरी के बाजार में आते हैं, तो अर्थव्यवस्था को उतनी ही तेजी से नए अवसर पैदा करने होंगे।
NITI Aayog ने भी AI economy के लिए education system में AI fluency, बड़े स्तर पर reskilling और upskilling तथा industry-academia-government के बेहतर coordination की जरूरत पर जोर दिया है।
इसलिए आने वाले वर्षों में सिर्फ “कितने युवा graduate हुए” यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं होगा। ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल होगा—“उनमें से कितने युवा बदलती economy में काम करने के लिए तैयार हैं?”
असली डर AI नहीं, बदलाव से पीछे छूट जाना है
रोहन मय्या की पोस्ट को अगर एक लाइन में समझना हो तो मुद्दा सिर्फ AI से नौकरी जाने का डर नहीं है। असली चिंता यह है कि रोजगार की पुरानी व्यवस्था तेजी से बदल रही है और युवा उस बदलाव की रफ्तार से खुद को अपडेट नहीं कर पा रहे हैं।
अच्छी बात यह है कि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
AI जहां कुछ पुराने कामों को छोटा कर सकता है, वहीं नए काम, नई कंपनियां और नई industries भी पैदा कर सकता है। भारत के सामने मौका है कि वह सिर्फ AI का इस्तेमाल करने वाला बाजार न बने, बल्कि AI talent और innovation का बड़ा केंद्र बने।
आखिरकार आने वाले समय में शायद सबसे मूल्यवान सवाल यह नहीं होगा कि “AI मेरी नौकरी लेगा?”
बल्कि सवाल होगा “मैं AI के साथ मिलकर ऐसा क्या कर सकता हूं, जो अकेले AI के लिए आसान नहीं है?”
यही बदलाव भारत के करोड़ों युवाओं के लिए चुनौती को अवसर में बदल सकता है।