आजमगढ़ डबल मर्डर केस में 19 साल बाद बड़ा फैसला, ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत 8 दोषी करार

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में करीब 19 साल पुराने चर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुदरी गांव में दशहरे के दिन हुई गोलीबारी में दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में अदालत ने ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत आठ आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में अदालत अब 29 अक्टूबर 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी।
लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे के फैसले के बाद आजमगढ़ में यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत के फैसले के बाद पुलिस ने दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेजने की कार्रवाई की। मामले में एक अन्य क्रॉस केस में भी अदालत ने छह आरोपियों को कातिलाना हमले और मारपीट का दोषी पाया है। करीब दो दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले पर अब सभी की नजरें 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
21 अक्टूबर 2007 को दशहरे के दिन हुई थी वारदात
यह मामला 21 अक्टूबर 2007 का है। आजमगढ़ के रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुदरी गांव में दशहरे के दिन दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उस समय गांव में प्रधानी चुनाव की रंजिश और आपसी वर्चस्व को लेकर विवाद चल रहा था।
बताया गया कि घटना के दिन रामजन्म सिंह अपने घर के दरवाजे पर बैठे थे। इसी दौरान तत्कालीन ग्राम प्रधान विपिन सिंह सहित कई लोग कथित तौर पर हथियारों के साथ वहां पहुंचे। आरोप था कि विवाद बढ़ने के बाद फायरिंग की गई, जिसमें दो सगे भाइयों पारसनाथ सिंह और तालुकदार सिंह की गोली लगने से मौत हो गई।
इसी घटना के दौरान कुछ अन्य लोग भी घायल हुए थे। वारदात के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया और मामला पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत आठ आरोपी दोषी
इस मामले में अदालत ने ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत आठ आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया है। मुकदमे में विपिन सिंह के अलावा राजेश सिंह, रणजीत सिंह, बलवंत सिंह, पंकज सिंह, लोकनाथ सिंह, जीवन प्रकाश सिंह और शिवदास सिंह के नाम शामिल हैं। मामले में आरोपी राधेश्याम सिंह की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया। दोषी करार दिए जाने के बाद पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
करीब 19 साल तक चले इस मामले में फैसला आने के बाद अदालत परिसर में लोगों की भीड़ जुटी रही। दोनों पक्षों के लोग फैसले को लेकर उत्सुक थे। अब अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि दोषियों को किस तरह की सजा दी जाएगी।
प्रधानी चुनाव की रंजिश से जुड़ा था मामला
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस विवाद के पीछे गांव में राजनीतिक वर्चस्व और प्रधानी चुनाव से जुड़ी रंजिश को प्रमुख कारण बताया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय चुनावों को लेकर होने वाले विवाद कई बार गंभीर आपराधिक घटनाओं का रूप ले लेते हैं। इस मामले में भी आपसी विवाद के बाद हिंसक घटना होने का आरोप लगाया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के दिन हमलावरों के पास लाइसेंसी राइफल, पिस्टल और अन्य हथियार थे। आरोप था कि फायरिंग के दौरान पारसनाथ सिंह और तालुकदार सिंह को निशाना बनाया गया, जिससे दोनों की जान चली गई। घटना में अन्य लोगों के घायल होने की बात भी सामने आई थी।
हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में आरोप और अदालत द्वारा साबित किए गए तथ्यों के बीच अंतर होता है। इस मामले में अदालत ने सुनवाई के बाद आठ आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है। सजा की वास्तविक अवधि का फैसला अभी बाकी है।
मुकदमे में पेश किए गए 17 गवाह
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य मुकदमे की सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
इतने लंबे समय तक मुकदमे का चलना इस बात को भी सामने लाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लग सकता है। पीड़ित परिवारों के लिए इतने वर्षों तक न्याय का इंतजार करना आसान नहीं होता। इस मामले में भी घटना के बाद से फैसला आने तक लंबा समय बीत गया।
अब दोषियों को सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया बाकी है। 29 अक्टूबर की तारीख इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उसी दिन अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी।
क्रॉस केस में भी छह आरोपी दोषी
इस घटना से जुड़े एक अन्य मुकदमे यानी क्रॉस केस में भी अदालत ने फैसला सुनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में छह आरोपियों को कातिलाना हमले और मारपीट का दोषी पाया गया है। दोनों मामलों में सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 29 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है।
क्रॉस केस में फैसला आने से यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, दोनों मुकदमों के आरोपों और दोषसिद्धि को अलग-अलग समझना जरूरी है, क्योंकि प्रत्येक मामले में अदालत का निर्णय संबंधित साक्ष्यों और आरोपों के आधार पर होता है।
29 अक्टूबर को होगा सजा पर फैसला
अब इस पूरे मामले में सबसे अहम तारीख 29 अक्टूबर 2026 है। इसी दिन अदालत दोषियों की सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी। अदालत अपराध की गंभीरता, मामले से जुड़े कानूनी प्रावधानों और अन्य प्रासंगिक तथ्यों पर विचार करने के बाद सजा निर्धारित करेगी।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि आठ आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है, लेकिन उन्हें कितने वर्ष की सजा मिलेगी या सजा का स्वरूप क्या होगा, इसका अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।
करीब 19 साल पुराने इस मामले में दोषसिद्धि का फैसला पीड़ित परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है। अब सबकी निगाहें आगामी सुनवाई पर हैं, जहां अदालत सजा को लेकर अपना निर्णय सुनाएगी।
आजमगढ़ के रुदरी गांव में 21 अक्टूबर 2007 को दशहरे के दिन हुए दोहरे हत्याकांड में अदालत ने करीब 19 साल बाद अहम फैसला सुनाया है। पारसनाथ सिंह और तालुकदार सिंह की हत्या के मामले में ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत आठ आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 17 गवाह पेश किए थे।
अब 29 अक्टूबर 2026 को अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी। इस दिन यह स्पष्ट होगा कि दोषियों को किस तरह की सजा दी जाती है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में आए फैसले के बाद अब पीड़ित परिवारों को सजा सुनाए जाने का इंतजार है।