KHABAR BITE की महत्वपूर्ण खबरों और अपडेट के लिए जुड़े रहें
Bite Size News, Right Size Information
👤
BREAKING NEWS
Choti Diwali 2026 Live: छोटी दिवाली कब है? 7 या 8 नवंबर, जानें पूजा का शुभ समय, यम दीपदान और काली चौदस की पूरी विधिअमित शाह ने देहरादून से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- उत्तराखंड में 10 साल में बदली विकास की तस्वीरदिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई जहरीली, GRAP-3 लागू; निर्माण कार्यों से लेकर वाहनों तक पर लगी पाबंदीछोटी दिवाली 2026: क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी? जानें अभ्यंग स्नान, यम दीपदान और भगवान कृष्ण की पूजा का महत्वअयोध्या दीपोत्सव 2026: राम की पैड़ी के 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीप, ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां तेजदीवाली पर ड्राई डे का नियम: कितने दिन शराब की दुकानों पर रहेगी पाबंदी? दिल्ली, यूपी और महाराष्ट्र के नियम जानेंदीपावली पर जितेंद्र मिश्रा ने दिया आत्मनिर्भर भारत और विकसित हरियाणा का संदेश, बोले- लोकल फॉर वोकल को बनाएं अभियानधनतेरस पर किसकी पूजा करें? 13 दीपक जलाने से पहले जान लें सही विधि, शुभ समय और यम दीपक का महत्वरणबीर, साई और यश की ‘रामायण’ ने मचाई धूम, फैंस ने बताया मास्टरपीसभारतीय हॉकी टीम ने रचा इतिहास, जापान को 4-1 से हराकर छठी बार जीती एशियन चैंपियंस ट्रॉफी
राज्य समाचार

दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं! सुप्रीम कोर्ट ने विराट कोहली जैसे सितारों से की जागरूकता फैलाने की अपील

By Aarti Mishra · Published 29 Oct 2026, 19:00 · Updated 29 Oct 2026, 19:00

पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख और विराट कोहली

दिवाली का त्योहार आते ही पटाखों, प्रदूषण और लोगों की सेहत को लेकर बहस तेज हो जाती है। खासकर दिल्ली-NCR में हर साल सर्दियों के दौरान खराब होती हवा के बीच पटाखों के इस्तेमाल पर सवाल उठते हैं। पर्यावरण संरक्षण की मांग करने वाले लोग जहां पटाखों पर सख्त पाबंदी लगाने की वकालत करते हैं, वहीं कई लोग इसे त्योहार की परंपरा और खुशियों से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर इस बहस को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय संतुलित रास्ता अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए विराट कोहली जैसी लोकप्रिय हस्तियों की मदद ली जा सकती है। इसका मकसद लोगों को केवल प्रतिबंधों के जरिए नहीं, बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी के जरिए भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना है।

हालांकि, अदालत की इस टिप्पणी का अर्थ यह नहीं है कि पटाखों के इस्तेमाल पर सभी तरह की पाबंदियां खत्म हो गई हैं। दिल्ली-NCR में पटाखों को लेकर लागू नियमों और अदालत के अंतिम आदेश की शर्तों को समझना जरूरी है।

पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय संतुलित रास्ते पर जोर

दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय रहा है। दिवाली के आसपास पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को और खराब कर सकता है। इसी वजह से हर साल पटाखों की बिक्री, निर्माण और इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठती है।

सुप्रीम कोर्ट में भी इस विषय पर सुनवाई के दौरान पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग सामने आई। इस मामले में अदालत का रुख इस बात पर केंद्रित रहा कि पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक और संतुलित समाधान भी तलाशना जरूरी है।

पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय ऐसा रास्ता निकालने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे प्रदूषण को नियंत्रित करने की कोशिश की जा सके और नियमों का पालन भी सुनिश्चित हो। हालांकि, इस संबंध में कौन-सी शर्तें लागू होंगी, यह अदालत के औपचारिक आदेश और संबंधित प्रशासन के निर्देशों से ही स्पष्ट होगा।

विराट कोहली जैसे सितारों को क्यों किया गया याद?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में विराट कोहली जैसी लोकप्रिय हस्तियों को जागरूकता अभियान से जोड़ने का विचार खास तौर पर चर्चा में है। इसके पीछे एक बड़ी वजह है कि मशहूर खिलाड़ियों और फिल्मी सितारों की बात लाखों-करोड़ों लोग सुनते हैं। सोशल मीडिया के दौर में उनका एक संदेश भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकता है।

विराट कोहली देश के लोकप्रिय क्रिकेटरों में शामिल हैं। युवा दर्शकों के बीच उनकी अच्छी-खासी लोकप्रियता है। यदि ऐसे खिलाड़ी प्रदूषण कम करने, जिम्मेदारी से त्योहार मनाने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दें, तो उसका व्यापक असर हो सकता है।

मसलन, किसी जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को बताया जा सकता है कि पटाखों के धुएं से हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और इसका असर बच्चों, बुजुर्गों तथा सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है। लोकप्रिय हस्तियां लोगों से नियमों का पालन करने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील कर सकती हैं।

हालांकि, विराट कोहली या किसी अन्य सेलिब्रिटी के किसी विशेष अभियान में शामिल होने की पुष्टि तभी मानी जानी चाहिए, जब इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आए। अदालत की टिप्पणी को किसी हस्ती की भागीदारी की घोषणा समझना सही नहीं होगा।

दिवाली पर पटाखों से प्रदूषण क्यों बढ़ जाता है?

दिवाली के समय दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण होते हैं। इस दौरान मौसम में बदलाव, हवा की धीमी गति, तापमान में गिरावट और प्रदूषक कणों के वातावरण में जमा होने जैसी परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके साथ पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।

पटाखे जलने पर हवा में PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ सकती है। ये कण सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। खासकर PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंचने में सक्षम होते हैं।

इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा के मरीजों और पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों को आंखों में जलन, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।

यह समझना भी जरूरी है कि दिल्ली-NCR का प्रदूषण केवल पटाखों की वजह से नहीं होता। वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाना और मौसम संबंधी परिस्थितियां भी इसमें योगदान देती हैं। इसलिए प्रदूषण से निपटने के लिए किसी एक स्रोत पर कार्रवाई के साथ-साथ व्यापक रणनीति की आवश्यकता होती है।

क्या पटाखों पर रोक लगाने की मांग गलत है?

पटाखों पर रोक लगाने की मांग के पीछे पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएं हैं। दूसरी ओर, त्योहारों के दौरान पटाखे जलाने की परंपरा से जुड़े लोगों का तर्क है कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय नियमों के तहत सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी जानी चाहिए।

यह बहस केवल त्योहार मनाने के तरीके तक सीमित नहीं है। इसमें बच्चों और बुजुर्गों की सेहत, साफ हवा में सांस लेने का अधिकार, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएं, व्यापारियों की आजीविका और सरकारी नियमों को लागू करने की व्यावहारिक चुनौतियां भी शामिल हैं।

इसीलिए इस मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रदूषण को नजरअंदाज करना उचित नहीं है, लेकिन किसी भी नीति को प्रभावी बनाने के लिए उसका स्पष्ट होना और जमीन पर लागू हो पाना भी जरूरी है।

यदि नियम बनाए जाते हैं, तो लोगों को उनकी जानकारी देना, प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री पर निगरानी रखना और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है।

ग्रीन पटाखे क्या हैं और क्या वे पूरी तरह सुरक्षित हैं?

पटाखों पर चर्चा के दौरान ग्रीन पटाखों का विकल्प भी सामने आता है। इन्हें पारंपरिक पटाखों की तुलना में कुछ प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ग्रीन पटाखे पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त या स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं।

इनसे भी धुआं, कण और आवाज पैदा हो सकती है। इसलिए ग्रीन पटाखों के नाम पर किसी भी उत्पाद को बिना जांच के सुरक्षित मानना ठीक नहीं है। जहां ऐसे पटाखों की अनुमति हो, वहां भी केवल निर्धारित मानकों का पालन करने वाले उत्पादों और लागू सरकारी नियमों पर ध्यान देना चाहिए।

दिल्ली-NCR में पटाखों से संबंधित नियम समय-समय पर अदालत के आदेशों और प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर बदल सकते हैं। इसलिए केवल पुराने नियमों या सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों के भरोसे पटाखे खरीदना या जलाना उचित नहीं होगा।

जागरूकता के साथ सख्ती भी जरूरी

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल प्रतिबंध लगाना ही पर्याप्त नहीं है। लोगों को यह समझाना भी जरूरी है कि उनके छोटे-छोटे फैसले पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।

स्कूलों, सामाजिक संगठनों, स्थानीय प्रशासन और लोकप्रिय हस्तियों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं। ऐसे अभियानों में पटाखों के धुएं से होने वाले नुकसान, कचरे के सही निपटान और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने की जानकारी दी जा सकती है।

इसके साथ नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। यदि प्रतिबंधित पटाखे खुलेआम बेचे जाते रहें और नियमों का उल्लंघन होता रहे, तो केवल जागरूकता से अपेक्षित परिणाम हासिल करना मुश्किल होगा।

इसलिए जागरूकता और कानून का प्रभावी पालन एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। लोगों को सही जानकारी मिले और प्रशासन नियमों को निष्पक्ष तरीके से लागू करे, तभी प्रदूषण कम करने की कोशिश मजबूत हो सकती है।

दिल्ली-NCR में दिवाली पर आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण बात अदालत के औपचारिक आदेश और दिल्ली-NCR में लागू होने वाली शर्तें होंगी। पटाखों की बिक्री, उनके प्रकार, इस्तेमाल की अनुमति और प्रतिबंधों से जुड़े निर्देशों को इन्हीं के आधार पर समझना होगा।

फिलहाल इस बहस का बड़ा संदेश यह है कि प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल एकतरफा फैसलों से नहीं, बल्कि नियमों, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी से निकाला जा सकता है। विराट कोहली जैसे लोकप्रिय खिलाड़ियों को जागरूकता से जोड़ने का विचार भी इसी दिशा में देखा जा सकता है।

दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है। इसे मनाते समय दूसरों की सेहत और पर्यावरण का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि लोग जिम्मेदारी से त्योहार मनाएं, प्रशासन नियमों का पालन कराए और प्रभावशाली हस्तियां सही संदेश पहुंचाएं, तो साफ हवा की दिशा में बेहतर कदम उठाए जा सकते हैं।