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गुजरात में कांग्रेस की हार पर अमित शाह का राहुल गांधी से सवाल, बोले- 40 साल से नहीं जीते, क्या यह SIR का नतीजा है?

By Aarti Mishra · Published 13 Oct 2026, 20:19 · Updated 13 Oct 2026, 20:19

गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से दूर है, तो क्या उसकी चुनावी हार का कारण भी SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है? शाह ने राहुल गांधी को चुनावी नतीजों से सबक लेने और अपनी पार्टी की लगातार हार पर आत्ममंथन करने की सलाह दी।

अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।

गुजरात निकाय चुनाव में BJP का प्रदर्शन कैसा रहा?

13 अक्टूबर 2026 को घोषित गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में भाजपा ने गांधीनगर महानगरपालिका सहित थरा और ओखा के निकायों में जीत दर्ज की। इन परिणामों ने राज्य में भाजपा की राजनीतिक स्थिति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

गांधीनगर महानगरपालिका की कुल 44 सीटों में भाजपा ने 38 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। आम आदमी पार्टी इस बार अपना खाता नहीं खोल सकी। थरा नगरपालिका में भाजपा को 24 में से 19 सीटें मिलीं, जबकि ओखा नगरपालिका में भी पार्टी ने बहुमत हासिल किया।

गांधीनगर में भाजपा की सीटों की संख्या 2021 के मुकाबले कुछ कम जरूर हुई, लेकिन पार्टी ने नगर निगम में अपना नियंत्रण बनाए रखा। कांग्रेस ने भी पिछले चुनाव की तुलना में अपनी सीटों में बढ़ोतरी की। इसलिए नतीजों को केवल एकतरफा तस्वीर के रूप में देखने के बजाय अलग-अलग निकायों के प्रदर्शन और पिछले चुनाव से हुए बदलावों को भी समझना जरूरी है।

अमित शाह ने राहुल गांधी से क्या सवाल पूछा?

गुजरात में भाजपा की जीत के बाद अमित शाह ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी हार के कारणों पर विचार करना चाहिए, न कि हर चुनावी नतीजे को SIR से जोड़कर देखना चाहिए।

शाह ने अपने बयान में 1985 के गुजरात चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को राज्य में जीत हासिल किए लंबे समय हो गया है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि यदि कांग्रेस की हार के पीछे SIR जिम्मेदार है, तो गुजरात में पार्टी इतने वर्षों से चुनाव क्यों नहीं जीत पा रही है?

यह सवाल सीधे तौर पर कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन और उसकी राजनीतिक रणनीति पर निशाना था। शाह का तर्क है कि किसी राजनीतिक दल को अपनी हार के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि मतदाता उससे क्यों दूर हो रहे हैं।

हालांकि, यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि अमित शाह का बयान राजनीतिक आरोप और सवाल के रूप में सामने आया है। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि SIR को लेकर विपक्ष की सभी आपत्तियां गलत हैं या कांग्रेस की चुनावी हार का एकमात्र कारण उसकी रणनीति ही है।

SIR को लेकर क्यों हो रही है राजनीतिक बहस?

SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। यह निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची की विस्तृत जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य योग्य मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करना और मृत, स्थानांतरित, दोहरी प्रविष्टि वाले या अन्य कारणों से अपात्र नामों की पहचान करना है।

सामान्य तौर पर मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट किया जाता है, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण में अधिक व्यापक सत्यापन किया जा सकता है। इस दौरान मतदाताओं के विवरण की जांच होती है और जरूरत पड़ने पर उनसे निर्धारित जानकारी या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

विवाद इस बात को लेकर है कि इस प्रक्रिया को लागू करते समय कहीं ऐसे योग्य मतदाताओं के नाम तो नहीं हट रहे, जिन्हें मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। विपक्षी दलों ने कुछ स्थानों पर मतदाता सूची से नाम हटने और दस्तावेजों से जुड़ी कठिनाइयों को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े पक्षों का कहना है कि सही मतदाता सूची स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए आवश्यक है।

इसलिए SIR को लेकर बहस के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं पहला, मतदाता सूची को गलत या दोहरी प्रविष्टियों से मुक्त करना; और दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि किसी भी योग्य भारतीय नागरिक का नाम गलती से सूची से बाहर न हो।

क्या कांग्रेस की हार का कारण केवल SIR है?

यह सवाल राजनीतिक बहस के केंद्र में है, लेकिन इसका जवाब केवल एक बयान या एक चुनाव के नतीजे से तय नहीं किया जा सकता।

किसी राजनीतिक दल के प्रदर्शन पर कई कारकों का असर पड़ सकता है। इनमें संगठन की मजबूती, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे, प्रचार अभियान, नेतृत्व पर भरोसा, सरकार के कामकाज को लेकर मतदाताओं की राय और विपक्ष की रणनीति शामिल हैं।

गुजरात में कांग्रेस का लंबे समय से कमजोर चुनावी प्रदर्शन भाजपा के लिए राजनीतिक तर्क का विषय रहा है। अमित शाह ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी से सवाल किया। लेकिन यह निष्कर्ष निकालने के लिए कि कांग्रेस की हार के पीछे कौन-से कारण कितने जिम्मेदार हैं, अलग-अलग चुनावों के आंकड़ों, वोट प्रतिशत, क्षेत्रवार नतीजों और मतदाताओं के रुझान का अध्ययन करना होगा।

इसी तरह, SIR का चुनावों पर कितना प्रभाव पड़ा, इसका आकलन करने के लिए भी मतदाता सूची में हुए बदलाव, हटाए गए नामों की स्थिति, शिकायतों के निपटारे और निर्वाचन परिणामों से संबंधित विश्वसनीय आंकड़ों की जरूरत होगी। केवल भाजपा की जीत या कांग्रेस की हार से SIR के प्रभाव को निर्णायक रूप से साबित नहीं किया जा सकता।

घुसपैठियों और मतदाता सूची को लेकर अमित शाह का रुख

SIR पर अपने राजनीतिक तर्क में अमित शाह घुसपैठ के मुद्दे को भी उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम होने चाहिए और अवैध रूप से आए विदेशी नागरिकों को मतदान का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से भी मतदाता सूची की शुद्धता को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

विपक्ष की ओर से उठाए गए सवाल मुख्य रूप से प्रक्रिया की पारदर्शिता, दस्तावेजों की उपलब्धता और योग्य मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने से जुड़े हैं। इन दोनों पहलुओं का मूल्यांकन तथ्यों और संबंधित मामलों के आधार पर होना चाहिए।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के नाम, पते या दस्तावेज में गड़बड़ी होने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि वह विदेशी नागरिक है। पात्रता से संबंधित मामलों की जांच निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जानी चाहिए।

गुजरात के नतीजों से कांग्रेस को क्या संदेश मिला?

गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत ने कांग्रेस के सामने संगठन और रणनीति से जुड़े सवाल फिर खड़े किए हैं। गांधीनगर में कांग्रेस ने पांच सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और एक वार्ड में सभी चार सीटों पर जीत भी हासिल की, लेकिन कुल मिलाकर नगर निगम में भाजपा का बहुमत बरकरार रहा।

कांग्रेस के लिए चुनौती यह होगी कि वह स्थानीय स्तर पर अपना संगठन मजबूत करे, मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाए और अपने चुनावी समर्थन को सीटों में बदलने की रणनीति तैयार करे।

वहीं भाजपा इन परिणामों को अपने संगठन और नेतृत्व के समर्थन के रूप में पेश कर रही है। अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता है।

आगे क्या होगा?

SIR को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले समय में भी जारी रहने की संभावना है। इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया, मतदाता सूची में सुधार, शिकायतों के निपटारे और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

राजनीतिक दलों के लिए भी चुनावी नतीजों का विश्लेषण जरूरी है। भाजपा गुजरात में अपनी जीत को समर्थन के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस के सामने अपने प्रदर्शन में सुधार करने की चुनौती है। लेकिन SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और दावों का मूल्यांकन ठोस आंकड़ों और प्रमाणों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

गुजरात में भाजपा की जीत के बाद अमित शाह ने राहुल गांधी से सवाल पूछकर कांग्रेस की चुनावी रणनीति और SIR पर उसके विरोध को निशाने पर लिया है। उनका बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है। असल सवाल यह है कि मतदाता सूची को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाते हुए प्रत्येक योग्य मतदाता का अधिकार कैसे सुरक्षित रखा जाए और राजनीतिक दल अपनी चुनावी हार से क्या सीख लेते हैं।