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गुटखा और तंबाकू वाले पान मसाले पर एक साल की रोक, सरकार ने जारी किया सख्त आदेश

By Aarti Mishra · Published 13 Oct 2026, 19:59 · Updated 13 Oct 2026, 20:19

गुटखा-पान मसाला बैन 2026: आम लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों ने गुटखा और तंबाकू या निकोटीन युक्त पान मसाले के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है। ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आदेश जारी किए गए हैं। बिहार में 30 मार्च 2026 से एक साल के लिए प्रतिबंध लागू किया गया, जबकि कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी इस साल संबंधित प्रतिबंधों को लेकर आदेश जारी हुए हैं।

किस राज्य में लगा है एक साल का प्रतिबंध?

गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाले पर प्रतिबंध की खबर अलग-अलग राज्यों से सामने आई है। बिहार में खाद्य सुरक्षा आयुक्त की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 30 मार्च 2026 से तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा-पान मसाले के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगाई गई है। इस आदेश का उद्देश्य ऐसे उत्पादों की उपलब्धता को नियंत्रित करना और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। जागरण की रिपोर्ट में भी इस फैसले की जानकारी दी गई है।

कर्नाटक में भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने 2026 में तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों पर एक साल के प्रतिबंध की अधिसूचना जारी की। वहीं महाराष्ट्र में गुटखा, पान मसाला और कुछ समान उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण तथा बिक्री पर प्रतिबंध से संबंधित आदेश जारी किया गया। इन राज्यों में आदेश की तारीख और प्रतिबंध के दायरे में कुछ अंतर हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय प्रशासन की अधिसूचना को देखना जरूरी है।

किन कानूनों के तहत लिया गया फैसला?

इस तरह के प्रतिबंध के पीछे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बन्धन) विनियम, 2011 के प्रावधान अहम हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 30 के तहत राज्य का खाद्य सुरक्षा आयुक्त जनस्वास्थ्य के हित में कुछ खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर निर्धारित अवधि के लिए रोक लगा सकता है। वहीं, विनियम 2.3.4 में खाद्य उत्पादों में तंबाकू और निकोटीन को सामग्री के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक का प्रावधान है।

सरल शब्दों में, खाद्य सुरक्षा विभाग का उद्देश्य ऐसे उत्पादों की बिक्री और आपूर्ति पर नियंत्रण रखना है, जिनमें तंबाकू या निकोटीन मिलाया गया हो और जो लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह हों। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की जानकारी में भी इन नियमों और प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है।

किन उत्पादों पर लागू हो सकता है प्रतिबंध?

प्रतिबंध का दायरा संबंधित राज्य की अधिसूचना में लिखी शर्तों पर निर्भर करता है। आम तौर पर तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला इसके दायरे में आते हैं। कुछ आदेशों में इनके अलावा सुगंधित या फ्लेवरयुक्त तंबाकू, खैनी, खारा, मावा और इसी तरह के अन्य उत्पादों को भी शामिल किया गया है।

कई बार निर्माता अलग-अलग पैकेट में पान मसाला और तंबाकू बेचते हैं, जिन्हें ग्राहक मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ राज्यों के आदेश ऐसे अलग-अलग बेचे जाने वाले उत्पादों को भी कवर करते हैं, यदि उनकी पैकेजिंग या बिक्री का तरीका उन्हें मिलाकर इस्तेमाल करने की सुविधा देता है।

हालांकि, हर प्रकार के सादे पान मसाले पर स्वतः एक जैसा प्रतिबंध लागू है, ऐसा मानना सही नहीं होगा। यह देखना आवश्यक है कि संबंधित आदेश में किन उत्पादों और किन सामग्रियों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

गुटखा और तंबाकू सेहत के लिए क्यों खतरनाक हैं?

गुटखा और तंबाकू युक्त चबाने वाले उत्पादों का इस्तेमाल कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है। तंबाकू में मौजूद निकोटीन लत पैदा कर सकता है। इसके लगातार इस्तेमाल से व्यक्ति के लिए इसे छोड़ना मुश्किल हो सकता है।

तंबाकू का सेवन मुंह, गले और शरीर के दूसरे हिस्सों में कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। चबाने वाले तंबाकू से मसूड़ों और दांतों को नुकसान पहुंच सकता है। मुंह में जलन, सफेद या लाल धब्बे और मुंह खोलने में परेशानी जैसे लक्षण भी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।

यह भी समझना जरूरी है कि केवल धूम्रपान न करना ही तंबाकू से सुरक्षित रहने के लिए पर्याप्त नहीं है। गुटखा और दूसरे चबाने वाले तंबाकू उत्पाद भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इनके इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को कम करने का सबसे अच्छा तरीका इनसे दूरी बनाना है।

प्रतिबंध लागू कराने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होता। प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को बाजारों और दुकानों की जांच करनी होती है। जरूरत पड़ने पर संदिग्ध उत्पादों के नमूने लिए जा सकते हैं और प्रतिबंधित सामान की बिक्री या भंडारण पाए जाने पर लागू कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इस प्रक्रिया में थोक विक्रेताओं, दुकानदारों, परिवहनकर्ताओं और आपूर्ति से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। यदि प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री जारी रहती है, तो आदेश का उद्देश्य पूरा करना मुश्किल हो जाता है।

आम लोग भी प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री की सूचना संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग या स्थानीय प्रशासन को दे सकते हैं। शिकायत करते समय दुकान का स्थान, उत्पाद का नाम और उपलब्ध प्रमाण जैसी जानकारी देना उपयोगी हो सकता है। शिकायत दर्ज कराने के लिए राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग के आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए।

क्या एक साल के प्रतिबंध का मतलब हर पान मसाले पर रोक है?

इस सवाल का जवाब संबंधित राज्य के आदेश पर निर्भर करता है। यदि अधिसूचना में तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाले का उल्लेख है, तो प्रतिबंध का मुख्य दायरा उन्हीं उत्पादों पर केंद्रित होता है। यदि आदेश में अन्य तंबाकू युक्त या मिलाकर इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद भी शामिल हैं, तो उन पर भी रोक लागू हो सकती है।

इसी तरह, प्रतिबंध की अवधि आदेश में दी गई प्रभावी तारीख से तय होती है। इसलिए किसी राज्य में जारी एक साल की रोक को बिना जांच किए दूसरे राज्य पर लागू मानना उचित नहीं है।

जनस्वास्थ्य के लिए जरूरी है जागरूकता

गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाले पर प्रतिबंध का मकसद केवल बाजार से उत्पाद हटाना नहीं, बल्कि लोगों को इनके नुकसान के प्रति जागरूक करना भी है। खासकर युवाओं और किशोरों को तंबाकू की लत से बचाने के लिए परिवार, स्कूल और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है।

यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से गुटखा या तंबाकू का सेवन कर रहा है, तो उसे छोड़ने के लिए चिकित्सक या तंबाकू छोड़ने में मदद देने वाली स्वास्थ्य सेवाओं से सलाह लेनी चाहिए। मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव, सफेद या लाल धब्बे, लगातार दर्द या मुंह खोलने में परेशानी होने पर जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।

गुटखा और तंबाकू या निकोटीन युक्त पान मसाले पर एक साल का प्रतिबंध जनस्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इसका प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब आदेश का सख्ती से पालन हो, अवैध बिक्री पर निगरानी रखी जाए और लोगों को तंबाकू के खतरों के बारे में सही जानकारी मिले। पाठकों को सलाह है कि वे अपने राज्य में लागू ताजा सरकारी अधिसूचना के आधार पर प्रतिबंध का सटीक दायरा और अवधि जरूर जांचें।