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भारतीय हॉकी टीम ने रचा इतिहास, जापान को 4-1 से हराकर छठी बार जीती एशियन चैंपियंस ट्रॉफी

By Aarti Mishra · Published 05 Nov 2026, 23:22 · Updated 05 Nov 2026, 23:22

भारतीय हॉकी टीम ने जापान को हराकर एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 जीती

भारतीय हॉकी टीम ने एक बार फिर एशिया में अपनी बादशाहत साबित कर दी है। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को मोहाली में खेले गए एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 के फाइनल मुकाबले में भारत ने जापान को 4-1 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने इस जीत के साथ टूर्नामेंट के इतिहास में छठी बार खिताब जीतने का रिकॉर्ड बना दिया। मुकाबले की शुरुआत भारत के लिए अच्छी नहीं रही थी। जापान ने शुरुआती मिनटों में ही गोल करके बढ़त बना ली थी और पहले हाफ तक भारतीय टीम 0-1 से पीछे थी। लेकिन दूसरे हाफ में भारतीय खिलाड़ियों ने ऐसा पलटवार किया कि जापान की टीम संभल नहीं पाई।

भारत की इस जीत के हीरो शिलानंद लाकड़ा, दिलप्रीत सिंह, जुगराज सिंह और विवेक सागर प्रसाद रहे। चारों खिलाड़ियों ने एक-एक गोल करके टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। खास बात यह रही कि भारतीय टीम ने आखिरी क्वार्टर में अपना आक्रामक खेल दिखाया और लगातार गोल करके जापान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

India vs Japan Final: मोहाली में भारत ने छठी बार जीता खिताब

एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला पंजाब के मोहाली स्थित ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में खेला गया। घरेलू मैदान पर भारतीय टीम को दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिला। स्टेडियम में मौजूद फैंस लगातार टीम इंडिया का हौसला बढ़ाते रहे।

भारत इस टूर्नामेंट में डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में उतरा था। टीम ने लीग स्टेज में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने सभी पांच मुकाबले जीते थे। भारत ने लीग चरण में 15 अंक हासिल किए और 34 गोल किए, जबकि विरोधी टीमें उसके खिलाफ केवल पांच गोल कर सकीं।

सेमीफाइनल में भी भारत ने दक्षिण कोरिया को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। दूसरी ओर जापान ने मलेशिया को हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया था। फाइनल में जापान ने भारत को कड़ी टक्कर दी, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव में शानदार प्रदर्शन करके ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

तीसरे मिनट में जापान ने किया पहला गोल, भारत पर बढ़ा दबाव

फाइनल मुकाबले की शुरुआत जापान के लिए शानदार रही। मैच के तीसरे मिनट में जापानी खिलाड़ी काजुमासा मात्सुमोतो ने भारतीय डिफेंस को भेदते हुए शानदार रिवर्स हिट लगाई। उनका यह शॉट भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा को छकाते हुए गोलपोस्ट में पहुंच गया। इसके साथ ही जापान ने 1-0 की बढ़त बना ली।

शुरुआती गोल के बाद भारतीय टीम ने बराबरी करने की कोशिश तेज कर दी। अभिषेक ने 10वें मिनट में गोल करने का प्रयास किया, लेकिन उनका शॉट निशाने से चूक गया। इसके बाद अंगद बीर सिंह को भी गोल करने का मौका मिला, मगर जापान के डिफेंडरों ने शानदार बचाव किया।

जापान की टीम ने पहले हाफ में अपनी रक्षात्मक रणनीति को मजबूती से लागू किया। भारतीय खिलाड़ियों को गोल करने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा। जापान ने पेनल्टी कॉर्नर के जरिए भी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उसे दूसरा गोल नहीं करने दिया।

पहले हाफ का खेल समाप्त होने तक भारत 0-1 से पीछे था। घरेलू दर्शकों के सामने मुकाबला गंवाने का खतरा जरूर था, लेकिन भारतीय टीम ने हार नहीं मानी।

तीसरे क्वार्टर में शिलानंद लाकड़ा ने भारत को दिलाई बराबरी

हाफ टाइम के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने ज्यादा आक्रामक अंदाज में खेलना शुरू किया। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बढ़ाया और जापान के गोलपोस्ट पर लगातार हमले किए। कप्तान हरमनप्रीत सिंह और सुखजीत सिंह ने गोल करने के कई प्रयास किए।

भारत को पेनल्टी कॉर्नर के मौके भी मिले। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने ड्रैग फ्लिक लगाने की कोशिश की, लेकिन जापान के गोलकीपर किशो कुरोदा ने शानदार बचाव कर दिया। सुखजीत सिंह का एक और प्रयास भी गोल में तब्दील नहीं हो सका।

आखिरकार मैच के 42वें मिनट में भारतीय टीम को बड़ी सफलता मिली। लगातार हमलों के बीच आदित्य लालगे ने शानदार रिवर्स फ्लिक पास दिया। गेंद सीधे शिलानंद लाकड़ा तक पहुंची और उन्होंने करीब से शॉट लगाकर गोल कर दिया।

इस गोल के साथ भारत ने मुकाबले में 1-1 से बराबरी कर ली। जापान ने इस गोल के खिलाफ रिव्यू भी लिया, लेकिन मैदानी अंपायर का फैसला बरकरार रहा। इसके बाद स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

आखिरी क्वार्टर में दिलप्रीत और जुगराज ने पलट दिया मैच

बराबरी के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया। अब भारत लगातार जापान के गोलपोस्ट पर हमले कर रहा था। मैच के 49वें मिनट में दिलप्रीत सिंह ने शानदार गोल करके भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी।

इस गोल में हार्दिक सिंह की भूमिका काफी अहम रही। उन्होंने जापानी खिलाड़ियों के दबाव के बीच गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और शानदार पास दिलप्रीत तक पहुंचाया। दिलप्रीत ने गेंद को संभालते हुए पीठ की ओर से बेहतरीन फिनिश किया और भारत को पहली बार मुकाबले में आगे कर दिया।

इसके कुछ ही मिनट बाद भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। इस बार जुगराज सिंह ने जिम्मेदारी संभाली। मैच के 53वें मिनट में उन्होंने जोरदार ड्रैग फ्लिक लगाई, जिसे जापान का गोलकीपर रोक नहीं पाया। इस गोल के साथ भारत ने स्कोर 3-1 कर दिया।

अब मुकाबला पूरी तरह भारतीय टीम के नियंत्रण में आ चुका था। जापान के खिलाड़ियों के लिए वापसी करना मुश्किल होता जा रहा था।

विवेक सागर प्रसाद ने चौथा गोल करके जीत पर लगाई मुहर

भारतीय टीम यहीं नहीं रुकी। मैच के आखिरी हिस्से में विवेक सागर प्रसाद ने शानदार गोल करके भारत की जीत पक्की कर दी। नीलाकांता शर्मा ने गेंद पर कब्जा हासिल किया और इसके बाद शिलानंद लाकड़ा ने गोल करने की कोशिश की।

जापान के गोलकीपर ने पहला शॉट तो रोक लिया, लेकिन गेंद रिबाउंड होकर विवेक सागर प्रसाद के पास पहुंच गई। विवेक ने बिना मौका गंवाए जोरदार हाफ वॉली शॉट लगाया और गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया।

इसके साथ ही भारत ने मुकाबले में 4-1 की निर्णायक बढ़त बना ली। अंतिम सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ी जश्न में डूब गए। मोहाली का स्टेडियम भारत माता की जय और चक दे इंडिया के नारों से गूंज उठा।

एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का छठा खिताब

जापान को हराकर भारत ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में छठी बार खिताब जीत लिया। इससे पहले भारतीय टीम ने 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 में यह ट्रॉफी अपने नाम की थी। साल 2018 में भारत और पाकिस्तान संयुक्त विजेता रहे थे।

इस जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट में अपनी बादशाहत और मजबूत कर ली है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम इस प्रतियोगिता की सबसे सफल टीम बन गई है।

हार्दिक सिंह के 200 मैच और नीलाकांता की भावुक विदाई भी रही चर्चा में

इस फाइनल मुकाबले में भारतीय हॉकी के लिए दो और खास पल देखने को मिले। मिडफील्डर हार्दिक सिंह ने अपना 200वां सीनियर अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला। उनके लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि मोहाली का यही स्टेडियम कभी उनके हॉकी सफर का शुरुआती हिस्सा रहा था। वर्ष 2013 में वह इसी मैदान पर बॉल-बॉय की भूमिका निभा चुके हैं।

वहीं, भारतीय मिडफील्डर नीलाकांता शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने का फैसला किया। उन्होंने भारत के लिए 163 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले और 20 गोल किए। टोक्यो ओलंपिक 2020 में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी वह हिस्सा रहे थे। उनके साथियों ने उन्हें भावुक अंदाज में विदाई दी।

भारतीय हॉकी के लिए क्यों खास है यह जीत?

भारत की यह जीत केवल एक ट्रॉफी हासिल करने तक सीमित नहीं है। यह टीम के आत्मविश्वास, खिलाड़ियों की मेहनत और दबाव में वापसी करने की क्षमता का भी उदाहरण है। जापान के खिलाफ शुरुआती गोल खाने के बावजूद भारतीय टीम ने धैर्य नहीं खोया। तीसरे क्वार्टर में बराबरी की और आखिरी क्वार्टर में तीन गोल करके मुकाबले को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया।

कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारतीय टीम ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह बड़े मुकाबलों में दबाव को कैसे संभालती है। अब इस खिताबी जीत से भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए और मजबूत होगा।

कुल मिलाकर, मोहाली में भारत की 4-1 की जीत भारतीय हॉकी के लिए यादगार बन गई है। जापान ने शुरुआत में चुनौती जरूर पेश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के शानदार पलटवार के सामने उसकी एक नहीं चली। छठी बार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर भारत ने एक बार फिर तिरंगा ऊंचा कर दिया।