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रामायण में दिखेगी सोने की लंका की भव्यता: रावण का 1 करोड़ का सिंहासन भी पड़ा फीका, शूर्पणखा के रथ पर खर्च हुई ज्यादा रकम

By Aarti Mishra · Published 05 Nov 2026, 23:06 · Updated 05 Nov 2026, 23:06

रामायण फिल्म में रावण का सोने का सिंहासन और शूर्पणखा का भव्य रथ

रामायण की कहानी में लंका का नाम आते ही सोने से बनी भव्य नगरी, ऊंचे महल, विशाल दरबार और रावण की शाही जीवनशैली की तस्वीर आंखों के सामने आने लगती है। रामायण में लंका सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि उस दौर की समृद्धि, वास्तुकला और शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। अब बड़े पर्दे पर रामायण की इसी भव्य दुनिया को जीवंत करने की तैयारी ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि फिल्म में रावण के सिंहासन से लेकर शूर्पणखा के रथ तक, हर छोटी-बड़ी चीज को बेहद खास अंदाज में तैयार किया जा रहा है।

फिल्म की चर्चा के बीच सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात इसके भव्य सेट और महंगे प्रॉप्स को लेकर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि रावण के सिंहासन को तैयार करने में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि शूर्पणखा के रथ की लागत इससे भी ज्यादा बताई जा रही है। इसके अलावा सोने की लंका को पर्दे पर उतारने के लिए सैकड़ों कारीगरों और वर्कर्स की मेहनत ली गई है। हालांकि इन खर्चों और निर्माण से जुड़े आंकड़ों को आधिकारिक पुष्टि के साथ देखना जरूरी है।

रावण के सिंहासन को बनाने में लगे चार महीने, 24 कैरेट सोने की हुई फिनिशिंग

फिल्म में रावण का किरदार अभिनेता यश निभा रहे हैं। उनके किरदार को प्रभावशाली दिखाने के लिए सिर्फ वेशभूषा और मेकअप पर ही नहीं, बल्कि उनके बैठने के अंदाज और शाही दरबार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसी वजह से रावण का सिंहासन फिल्म के सबसे खास प्रॉप्स में शामिल है।

फिल्म के आर्ट डायरेक्टर रमेश ने प्रभात खबर को दिए इंटरव्यू में इसके निर्माण से जुड़ी दिलचस्प बातें साझा की हैं। उनके मुताबिक, रावण के सिंहासन को तैयार करने में करीब चार महीने का समय लगा। इसकी शुरुआती डिजाइन मिट्टी से तैयार की गई थी। सबसे पहले क्ले मॉडल बनाया गया और फिर उसका मोल्ड तैयार करके फाइबर की मदद से सिंहासन को अंतिम आकार दिया गया।

इस सिंहासन की सबसे खास बात इसकी गोल्ड फिनिशिंग है। इसे शाही और असली सोने जैसा लुक देने के लिए 24 कैरेट गोल्ड लीफिंग का इस्तेमाल किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में काफी मेहनत और बारीकी की जरूरत पड़ी। यही वजह है कि इस एक सिंहासन को बनाने में लगभग एक करोड़ रुपये खर्च हुए। India Today+1

शूर्पणखा का रथ रावण के सिंहासन से भी महंगा

अगर आपको लगता है कि रावण का एक करोड़ रुपये का सिंहासन ही फिल्म का सबसे महंगा प्रॉप होगा, तो शूर्पणखा का रथ आपको हैरान कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म में शूर्पणखा के लिए तैयार किए गए रथ की कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये है। यानी रावण के सिंहासन से लगभग 50 लाख रुपये ज्यादा।

फिल्म में शूर्पणखा का किरदार अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह निभा रही हैं। उनके रथ को केवल दिखावे के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया कि शूटिंग के दौरान इसका इस्तेमाल भी किया जा सके। इसे तैयार करने में करीब तीन महीने लगे।

किसी ऐतिहासिक और पौराणिक दुनिया को पर्दे पर दिखाना आसान नहीं होता। खासकर तब, जब उस दुनिया के बारे में दर्शकों के मन में पहले से एक खास तस्वीर बनी हुई हो। शूर्पणखा का रथ भी इसी सोच के साथ तैयार किया गया है। इसके डिजाइन, आकार और बनावट में ऐसी भव्यता रखने की कोशिश की गई, जो लंका की राजसी शक्ति को दिखा सके। Free Press Journal+2

लंका बनाने में एक साथ जुटे 500 से 600 वर्कर्स

रामायण की कहानी में लंका का विशेष महत्व है। यही रावण का साम्राज्य था और यहीं से राम-रावण युद्ध की कहानी आगे बढ़ती है। ऐसे में फिल्म में लंका को साधारण सेट के रूप में दिखाना मेकर्स के लिए पर्याप्त नहीं था। उन्हें एक ऐसी नगरी तैयार करनी थी, जो देखने में विशाल, समृद्ध और भव्य लगे।

आर्ट डायरेक्टर रमेश के मुताबिक, लंका का सेट तैयार करने के दौरान एक समय में करीब 500 से 600 वर्कर्स एक साथ काम कर रहे थे। इतने बड़े सेट को तैयार करने के लिए अलग-अलग विभागों के लोगों ने मिलकर काम किया। इसमें कारीगर, तकनीशियन, डिजाइनर और निर्माण से जुड़े कर्मचारी शामिल थे।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म के लिए लंका तैयार करना कितना बड़ा काम रहा होगा। दीवारों की बनावट से लेकर फर्श, सजावट और सुनहरे रंग की बारीकियों तक पर ध्यान दिया गया। मेकर्स की कोशिश रही कि दर्शकों को ऐसा महसूस हो, जैसे वे सचमुच रावण की सोने की नगरी में पहुंच गए हों। India Today+1

फिल्म के लिए बनाए गए 150 से ज्यादा सेट

फिल्म की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके लिए 150 से ज्यादा सेट तैयार किए गए। इनका निर्माण मुंबई की फिल्म सिटी स्थित प्राइम फोकस स्टूडियो में किया गया। सेट बनाने का काम अप्रैल 2024 में शुरू हुआ था, जबकि आर्ट डिपार्टमेंट की टीम फरवरी 2024 से ही इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी।

हर सेट को अंतिम रूप देने से पहले उसके डिजाइन में करीब 10 से 15 बार बदलाव किए गए। इसका मकसद सिर्फ सुंदर लोकेशन तैयार करना नहीं था, बल्कि कहानी के हिसाब से हर जगह को वास्तविक और प्रभावशाली बनाना था।

आजकल फिल्मों में ग्रीन स्क्रीन और कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी यानी CGI का काफी इस्तेमाल होता है। लेकिन इस फिल्म में कई जगह असली सेट तैयार करने पर भी जोर दिया गया। इससे कलाकारों को शूटिंग के दौरान वास्तविक माहौल मिलता है और उनके अभिनय में भी उस वातावरण का प्रभाव दिखाई दे सकता है। India Today+1

24 फीट ऊंचा जटायु का मॉडल भी किया गया तैयार

फिल्म में सिर्फ लंका, सिंहासन और रथ ही बड़े पैमाने पर तैयार नहीं किए गए हैं। जटायु से जुड़े एक दृश्य के लिए भी आर्ट डिपार्टमेंट ने खास इंतजाम किया। इसके लिए करीब 24 फीट ऊंचा जटायु का स्केलेटन मॉडल बनाया गया।

इस मॉडल को तैयार करने का उद्देश्य कलाकारों को शूटिंग के दौरान सही आई-लाइन देना था। जब किसी कलाकार को किसी विशालकाय काल्पनिक या पौराणिक पात्र के साथ दृश्य करना होता है, तो उसके सामने वास्तविक आकार का मॉडल होने से अभिनय करना आसान हो जाता है। इससे कलाकार को अंदाजा रहता है कि उसे किस दिशा में देखना है और संवाद किस तरह बोलने हैं।

यह छोटी-सी तकनीकी व्यवस्था फिल्म के दृश्यों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

50 फीट का पुष्पक विमान बनाने में लगे 40 से 50 दिन

रामायण में पुष्पक विमान का भी खास स्थान है। यह रावण से जुड़ा एक प्रसिद्ध दिव्य विमान है, जिसका उल्लेख रामायण की कथा में मिलता है। फिल्म में इसे भी बड़े आकार में दिखाने की तैयारी की गई।

आर्ट डायरेक्टर के मुताबिक, पुष्पक विमान का व्यास करीब 50 फीट रखा गया। इसका आकार इतना बड़ा था कि इसे स्टूडियो के अंदर एक साथ तैयार करना संभव नहीं था। इसलिए इसे चार अलग-अलग हिस्सों में बनाया गया। इन हिस्सों को तैयार करने में करीब 40 से 50 दिन का समय लगा।

बताया गया कि निर्देशक नितेश तिवारी ने पुष्पक विमान की कल्पना और डिजाइन पर लगभग छह साल तक काम किया। इससे समझा जा सकता है कि फिल्म में दिखाई जाने वाली चीजों के पीछे कितनी लंबी तैयारी की गई है। India Today+2

नितेश तिवारी खुद करते थे हर सेट की जांच

इतने बड़े प्रोजेक्ट में निर्देशक की जिम्मेदारी भी काफी बढ़ जाती है। फिल्म के आर्ट डायरेक्टर रमेश ने बताया कि नितेश तिवारी हर सेट की बारीकी पर नजर रखते थे। शूटिंग से एक दिन पहले वह खुद सेट का निरीक्षण करते थे।

इतना ही नहीं, शूटिंग से करीब चार दिन पहले ही निर्देशक स्टोरीबोर्ड और कॉन्सेप्ट आर्ट को देख लेते थे। इससे टीम को पहले से पता रहता था कि किस दृश्य में किस तरह का सेट और किस प्रकार की सजावट चाहिए।

इस तरह की तैयारी से शूटिंग के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। कलाकारों से लेकर तकनीकी टीम तक सभी को अपने काम की स्पष्ट जानकारी रहती है।

बड़े क्राउड सीन के लिए जुटे 1000 कलाकार

फिल्म में युद्ध और विशाल सेनाओं से जुड़े दृश्यों को प्रभावशाली बनाने के लिए भी बड़े स्तर पर तैयारी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बड़े क्राउड सीक्वेंस में करीब 1000 डांसर्स और जूनियर आर्टिस्ट तक शामिल हुए।

इस तरह के दृश्यों को तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं होता। इसमें कलाकारों की संख्या, उनकी वेशभूषा, मूवमेंट और कैमरे के सामने उनकी स्थिति का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। खासकर रामायण जैसी कहानी में सेना और युद्ध से जुड़े दृश्य दर्शकों के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

क्यों खास है फिल्म की इतनी भव्य तैयारी?

रामायण भारत की सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण पौराणिक कथाओं में से एक है। इस कहानी को पहले भी टीवी और फिल्मों में दिखाया जा चुका है। इसलिए नितेश तिवारी के सामने चुनौती केवल कहानी को दोबारा पर्दे पर लाने की नहीं, बल्कि उसे नए दौर के दर्शकों के लिए बड़े सिनेमाई अनुभव में बदलने की भी है।

रावण का एक करोड़ रुपये का सिंहासन, शूर्पणखा का डेढ़ करोड़ रुपये का रथ, 150 से ज्यादा सेट और लंका निर्माण में लगे 500 से 600 वर्कर्स इस तैयारी की बड़ी तस्वीर पेश करते हैं।

हालांकि, किसी फिल्म की सफलता केवल उसके बजट या महंगे सेट से तय नहीं होती। कहानी, कलाकारों का अभिनय, संगीत, निर्देशन और तकनीकी गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। अब देखना होगा कि पर्दे पर दिखाई गई यह मेहनत दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

कुल मिलाकर, रामायण की यह भव्य दुनिया फिल्म निर्माण में भारतीय सिनेमा के बढ़ते पैमाने और कारीगरों की मेहनत को सामने लाती है। रावण के सिंहासन से महंगा शूर्पणखा का रथ और सोने की लंका तैयार करने में जुटे सैकड़ों वर्कर्स की कहानी निश्चित रूप से फिल्म के पर्दे के पीछे की सबसे दिलचस्प बातों में शामिल है।