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प्रयागराज में हाईकोर्ट अधिकारियों के लिए बनेंगे 845 नए सरकारी आवास, योगी कैबिनेट के फैसले से आवासीय सुविधाओं को मिलेगी मजबूती

By Aarti Mishra · Published 27 Oct 2026, 16:39 · Updated 27 Oct 2026, 16:39

प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिकारियों के लिए प्रस्तावित 845 सरकारी आवासों की परियोजना

उत्तर प्रदेश में सरकारी सुविधाओं और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयागराज के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक के एजेंडे में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिकारियों के लिए 845 नए सरकारी आवासों के निर्माण का प्रस्ताव शामिल किया गया है। ये आवास प्रयागराज के देवघाट-झलवा क्षेत्र में बनाए जाने की योजना है।

प्रस्ताव के अनुसार, इन आवासों में टाइप-3 श्रेणी के 533 और टाइप-4 श्रेणी के 312 आवास शामिल होंगे। इस परियोजना का उद्देश्य हाईकोर्ट के अधिकारियों के लिए बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना और न्यायिक संस्थानों से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस प्रस्ताव को कैबिनेट बैठक के एजेंडे में शामिल बताया गया है। इसलिए इसे अंतिम रूप से मंजूर परियोजना मानने से पहले बैठक के बाद जारी होने वाली आधिकारिक पुष्टि देखना जरूरी है।

प्रयागराज में कहां बनेंगे 845 सरकारी आवास?

प्रस्तावित आवासीय परियोजना के लिए प्रयागराज के देवघाट-झलवा क्षेत्र को चुना गया है। इस क्षेत्र में पहले भी न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं के विकास की योजनाएं सामने आती रही हैं।

नई योजना में इलाहाबाद हाईकोर्ट के क्लास-1 और क्लास-2 श्रेणी के अधिकारियों के लिए कुल 845 आवास बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसमें 533 टाइप-3 और 312 टाइप-4 आवास शामिल हैं। इस तरह दोनों श्रेणियों को मिलाकर बड़ी संख्या में नए सरकारी आवास उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई है।

सरकारी आवासों का निर्माण केवल रहने की जगह उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होता। इससे अधिकारियों को कार्यस्थल के आसपास व्यवस्थित आवासीय सुविधा मिल सकती है। प्रयागराज जैसे शहर में, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट एक प्रमुख न्यायिक संस्थान है, ऐसी परियोजनाएं संस्थागत जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

टाइप-3 और टाइप-4 के होंगे आवास, जानिए क्या है पूरी योजना

845 आवासों की इस योजना में दो अलग-अलग श्रेणियों के सरकारी आवास बनाए जाने का प्रस्ताव है। टाइप-3 श्रेणी के 533 आवास और टाइप-4 श्रेणी के 312 आवास शामिल होंगे।

सरकारी आवासों को अलग-अलग टाइप में बांटने का उद्देश्य पद, सेवा नियमों और पात्रता के अनुसार आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना होता है। अलग-अलग श्रेणियों के आवासों का आकार, कमरों की संख्या और सुविधाएं संबंधित सरकारी मानकों के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।

इस परियोजना में दोनों श्रेणियों के आवासों का निर्माण प्रस्तावित होने से हाईकोर्ट के अधिकारियों की आवासीय जरूरतों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन आवासों के डिजाइन, निर्माण की समय-सीमा, प्रति आवास लागत और अन्य सुविधाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है।

हाईकोर्ट के अधिकारियों के लिए आवास क्यों जरूरी?

इलाहाबाद हाईकोर्ट उत्तर प्रदेश के प्रमुख न्यायिक संस्थानों में शामिल है। प्रयागराज में स्थित इस न्यायालय में बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी, अधिवक्ता और वादकारी विभिन्न कानूनी कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में न्यायिक संस्थान से जुड़े अधिकारियों के लिए पर्याप्त आवासीय सुविधाएं होना प्रशासनिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सरकारी आवास उपलब्ध होने से अधिकारियों को निजी मकान किराये पर लेने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा मिलने से समय की बचत और दैनिक कामकाज में सहूलियत मिल सकती है।

न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय सुविधाओं का विकास संस्थागत बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें कार्यालय भवनों, आवासीय परिसरों, पार्किंग, संपर्क मार्ग और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास भी शामिल हो सकता है।

हालांकि, 845 आवासों की प्रस्तावित परियोजना के अंतर्गत कौन-कौन सी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित की जाएंगी, इसका विवरण आधिकारिक परियोजना दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

देवघाट-झलवा में पहले भी विकसित हुई हैं न्यायिक आवासीय परियोजनाएं

प्रयागराज का देवघाट-झलवा क्षेत्र न्यायिक संस्थानों से जुड़ी आवासीय और अन्य सुविधाओं के विकास के लिए पहले भी चर्चा में रहा है। इस क्षेत्र में न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसर विकसित करने की योजनाएं बनाई गई हैं।

वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार ने देवघाट-झलवा में प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना के तहत आवास, क्लब और कम्युनिटी सेंटर से संबंधित संशोधित लागत को मंजूरी दी थी। उस समय सरकार ने न्यायमूर्तियों और कर्मचारियों के लिए आवास की कमी को परियोजना की प्रमुख जरूरतों में शामिल किया था।

इसके अलावा, हाईकोर्ट के कर्मचारियों के लिए भी बड़ी संख्या में आवास बनाने की योजनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे पता चलता है कि प्रयागराज में न्यायिक व्यवस्था से जुड़े आवासीय बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है।

नई प्रस्तावित योजना इसी व्यापक जरूरत के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, 845 नए आवासों का निर्माण पहले से चल रही परियोजनाओं से किस तरह जुड़ा होगा, इसकी जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगी।

कैबिनेट बैठक में वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी पर नजर

किसी भी सरकारी निर्माण परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए केवल प्रस्ताव तैयार करना पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय मंजूरी, बजट का प्रावधान, निर्माण एजेंसी का चयन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।

845 आवासों की परियोजना को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के साथ धनराशि जारी करने का प्रस्ताव कैबिनेट के एजेंडे में शामिल बताया गया है।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों को निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। इसमें निर्माण की लागत, टेंडर, काम पूरा करने की समय-सीमा और निर्माण की गुणवत्ता जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल परियोजना की कुल लागत और निर्माण शुरू होने की संभावित तारीख के बारे में पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इनसे जुड़े किसी भी आंकड़े को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।

न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम

उत्तर प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अदालतों की संख्या बढ़ाने, न्यायिक परिसरों का विकास करने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य के 75 जिलों में 900 नए न्यायालय स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस योजना का उद्देश्य मामलों के निस्तारण में तेजी लाना और न्यायिक व्यवस्था की क्षमता बढ़ाना है।

ऐसे में प्रयागराज में हाईकोर्ट अधिकारियों के लिए प्रस्तावित 845 आवासों की योजना को न्यायिक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास के संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि, न्यायालयों की संख्या बढ़ाने और आवास निर्माण की परियोजनाएं अलग-अलग योजनाएं हैं, जिनके अपने उद्देश्य और प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं।

प्रयागराज में 845 आवासों की योजना पर रहेगी नजर

प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिकारियों के लिए 845 सरकारी आवासों के निर्माण का प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। योजना के तहत देवघाट-झलवा क्षेत्र में टाइप-3 के 533 और टाइप-4 के 312 आवास बनाए जाने की बात सामने आई है।

इस परियोजना का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों की आवासीय जरूरतों को पूरा करना और प्रयागराज में न्यायिक संस्थानों से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। अब इस प्रस्ताव पर कैबिनेट के अंतिम निर्णय, परियोजना की कुल लागत, निर्माण की समय-सीमा और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया से संबंधित आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और निर्माण कार्य निर्धारित समय पर आगे बढ़ता है, तो आने वाले समय में हाईकोर्ट के अधिकारियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।